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डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य
ब्यूरो कैथल
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:08 AM IST
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अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देती महिला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रविवार को जिले भर में छठ पूजा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर कामनाएं कीं। यहां बाबा शीतलपुरी के डेरे पर स्थित तालाब में रविवार को छठ पूजा पर्व का आयोजन किया गया। इस मौके शहर भर से भारी संख्या में महिलाओं ने तालाब के घाट पर शाम के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामनाएं मांगी।
छठ पर्व एक ऐसा पर्व है, जिसमें किसी पुरोहित की जरूरत नहीं होती। इसमें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। व्रती घाट के किनारे सूर्य की पूजा करके अर्घ्य देती हैं। महिलाओं ने पूजा के दौरान यहां लोक गीत भी गाए। जन विकास सेवा समिति के प्रधान डा. बीएस शास्त्री ने बताया कि छठ पर्व के दौरान महिलाएं पुत्र प्राप्ति और संतान की सुरक्षा व परिवार में सुख शांति के लिए चार दिन उपवास रखती हैं। उन्होंने बताया कि चार दिन तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। अगले दिन खरना होता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती दो दिन तक पानी भी नहीं पीते। तीसरे दिन शाम को डूबते और चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ पूजा संपन्न होती है। सोमवार को महिलाएं व्रत खोलेंगी। महिलाएं खीर खाकर अपना उपवास खत्म करती हैं।
उधर, बड़ी देवी माता मंदिर के निकट स्थित तीर्थ में महिलाओं की पूजा-अर्चना के चलते तीर्थ के आस-पास दुकानें सजाई गईं। जहां से महिलाओं ने पूजा का सामान खरीदा। इस मौके पर सुनीता, अनीता, हेमलता, प्रमिला, रीना, संगीता, वीनिता सहित अन्य महिलाओं ने घाट पर सूर्य देवता की पूजा की। इस दौरान समिति के सदस्य कमलेश, मोती राम, राहलु, अरविंद, देवानी, सुमन, निर्मल, उर्मिला, संतोष सहित अन्य मौजूद रहे।
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छठ पर्व एक ऐसा पर्व है, जिसमें किसी पुरोहित की जरूरत नहीं होती। इसमें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। व्रती घाट के किनारे सूर्य की पूजा करके अर्घ्य देती हैं। महिलाओं ने पूजा के दौरान यहां लोक गीत भी गाए। जन विकास सेवा समिति के प्रधान डा. बीएस शास्त्री ने बताया कि छठ पर्व के दौरान महिलाएं पुत्र प्राप्ति और संतान की सुरक्षा व परिवार में सुख शांति के लिए चार दिन उपवास रखती हैं। उन्होंने बताया कि चार दिन तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। अगले दिन खरना होता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती दो दिन तक पानी भी नहीं पीते। तीसरे दिन शाम को डूबते और चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ पूजा संपन्न होती है। सोमवार को महिलाएं व्रत खोलेंगी। महिलाएं खीर खाकर अपना उपवास खत्म करती हैं।
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उधर, बड़ी देवी माता मंदिर के निकट स्थित तीर्थ में महिलाओं की पूजा-अर्चना के चलते तीर्थ के आस-पास दुकानें सजाई गईं। जहां से महिलाओं ने पूजा का सामान खरीदा। इस मौके पर सुनीता, अनीता, हेमलता, प्रमिला, रीना, संगीता, वीनिता सहित अन्य महिलाओं ने घाट पर सूर्य देवता की पूजा की। इस दौरान समिति के सदस्य कमलेश, मोती राम, राहलु, अरविंद, देवानी, सुमन, निर्मल, उर्मिला, संतोष सहित अन्य मौजूद रहे।
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