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दरकते मकानों और शहर का कारण खोजेगा सीबीआरआई
कैथल
Updated Wed, 30 Apr 2014 12:12 AM IST
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कैथल। शहर के विभिन्न हिस्सों में आ रही दरारों एवं दरकते आशियानों के कारण ढूंढने का काम अब केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान करेगा।
नगर परिषद ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्ज इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) को इस बारे में पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि शहर में लगातार आ रही लोगों के भवनों में दरारों का असली कारण का पता लगाया जाए, ताकि लोगों को इससे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
कई इलाकों के भवनों में दरारें
पुराने शहर जिसे पहले सात दरवाजों के भीतर का इलाका माना जाता था, उसमें कई भवनों में दरारें आ रही हैं। मेन बाजार के निकट शास्त्री मार्केट, प्रेम गली, बोड़ान मोहल्ला, श्री मंजी साहिब गुरुद्वारे के पीछे के इलाकों सहित कई लोगों के भवनाें में दरारें आ रही हैं।
इसके अलावा भी नगर परिषद को इस बारे में शिकायत मिलती रहती हैं। शिकायतों के बाद नगर परिषद एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच पड़ताल भी करते हैं। लेकिन कोई ठोस कारण इसका अभी तक नजर नहीं आया है। अक्सर लोग पेय जलापूर्ति पाइपलाइन के लीक होने का आरोप लगाते हैं तो कई लोग गंदे पानी के नालों की लीकेज इसका कारण बताते हैं। लेकिन असली कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पिछले साल भी एक घर में दरवाजा पूरी तरह से नीचे धंस गया था। जिसमें किसी को जानी नुकसान नहीं हुआ था।
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कई कारण हैं जमीन के धंसने के
विशेषज्ञों के अनुसार शहर में जमीन के धंसने के कई कारण हैं। जिसमें जहां कई जगह पाइपलाइन लीक पाई जाती है। वहीं, शहर में धड़ल्ले से बिना किसी विशेष अनुमति के लगाए जा रहे सबमर्सिबल इसका एक सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। सरकारी क्षेत्रों ही 350 से ज्यादा सबमर्सिबल बताए जा रहे हैं। जबकि प्राईवेट कितने होंगे, इसका कोई आंकड़ा ही नहीं है। इन सबमर्सिबल पंप्स के माध्यम से पानी का अंधाधुंध दोहन हो रहा है।
जिस कारण भू-जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। सरकार द्वारा तो पीने के पानी की सुविधा के लिए ये लगाए जा रहे हैं, लेकिन निजी तौर पर थोड़ी सी जरूरत पर ही बिना अनुमति के सबमर्सिबल पंप लगा दिया जाता है। इसके अलावा पुराने समय में डाली गई पाइपलाइनें एवं सीवरेज की लाइनें भी जमीन के धंसने का एक बड़ा कारण हो सकता है। वहीं कोई पुरानी सुरंग भी इसके पीछे एक वजह मानी जा रही है।
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नगर परिषद ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्ज इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) को इस बारे में पत्र लिखकर गुहार लगाई है कि शहर में लगातार आ रही लोगों के भवनों में दरारों का असली कारण का पता लगाया जाए, ताकि लोगों को इससे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
कई इलाकों के भवनों में दरारें
पुराने शहर जिसे पहले सात दरवाजों के भीतर का इलाका माना जाता था, उसमें कई भवनों में दरारें आ रही हैं। मेन बाजार के निकट शास्त्री मार्केट, प्रेम गली, बोड़ान मोहल्ला, श्री मंजी साहिब गुरुद्वारे के पीछे के इलाकों सहित कई लोगों के भवनाें में दरारें आ रही हैं।
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इसके अलावा भी नगर परिषद को इस बारे में शिकायत मिलती रहती हैं। शिकायतों के बाद नगर परिषद एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच पड़ताल भी करते हैं। लेकिन कोई ठोस कारण इसका अभी तक नजर नहीं आया है। अक्सर लोग पेय जलापूर्ति पाइपलाइन के लीक होने का आरोप लगाते हैं तो कई लोग गंदे पानी के नालों की लीकेज इसका कारण बताते हैं। लेकिन असली कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पिछले साल भी एक घर में दरवाजा पूरी तरह से नीचे धंस गया था। जिसमें किसी को जानी नुकसान नहीं हुआ था।
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कई कारण हैं जमीन के धंसने के
विशेषज्ञों के अनुसार शहर में जमीन के धंसने के कई कारण हैं। जिसमें जहां कई जगह पाइपलाइन लीक पाई जाती है। वहीं, शहर में धड़ल्ले से बिना किसी विशेष अनुमति के लगाए जा रहे सबमर्सिबल इसका एक सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। सरकारी क्षेत्रों ही 350 से ज्यादा सबमर्सिबल बताए जा रहे हैं। जबकि प्राईवेट कितने होंगे, इसका कोई आंकड़ा ही नहीं है। इन सबमर्सिबल पंप्स के माध्यम से पानी का अंधाधुंध दोहन हो रहा है।
जिस कारण भू-जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। सरकार द्वारा तो पीने के पानी की सुविधा के लिए ये लगाए जा रहे हैं, लेकिन निजी तौर पर थोड़ी सी जरूरत पर ही बिना अनुमति के सबमर्सिबल पंप लगा दिया जाता है। इसके अलावा पुराने समय में डाली गई पाइपलाइनें एवं सीवरेज की लाइनें भी जमीन के धंसने का एक बड़ा कारण हो सकता है। वहीं कोई पुरानी सुरंग भी इसके पीछे एक वजह मानी जा रही है।