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अब आईजी अस्पताल में कैंसर पीड़ितों की होगी पहचान
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Sun, 27 Jul 2014 12:01 AM IST
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कैथल। इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल में अब कैंसर पीड़ितों की पहचान की जा सकेगी। इसके जल्द ही अस्पताल में टेस्ट सुविधा शुरू हो जाएगी।
गौरतलब है कि जिले में पिछले कुछ समय से कैंसर के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पिछले छह में करीब कैसंर के 198 मरीज सामने आ चुके हैं। ये तो वे मरीज हैं, जो सरकार द्वारा पास बनवाने के लिए विभाग के पास आते हैं तथा उन्हें यहां रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होता है।
इसके अलावा ऐसे बहुत से मरीज हैं, जो यहां रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाते। लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चल पाता कि वे कैंसर से पीड़ित हैं। जब तक पता चलता है, तब तक वे मौत के मुहाने पर खड़े होते हैं। ऐसे में यदि मरीज को समय रहते पता चल जाए तो काफी लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
प्रारंभिक जांच के लिए टेस्ट
जिला अस्पताल में अब लोगाें शुरू में ही पता चल सकेगा कि कहीं वे कैंसर के मरीज तो नहीं हैं। सिविल सर्जन डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने बताया कि जिला अस्पताल में फाइन निडल एक्सपेरेशन साइडोलॉजी (एफएनएसी) टेस्ट शुरू किया जा रहा है। जिसके माध्यम से शरीर में कहीं पर भी यदि गांठ बनी है, तो उसमें से नमूना लेकर जांच की जा सकेगी कि इस गांठ में कैंसर के लक्षण हैं या नहीं।
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इसमें स्तन, गला अथवा शरीर में कहीं पर भी कैंसर हो तो उसका पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में पैथालॉजिस्ट की नियुक्ति के बाद यह टेस्ट शुरू किया जा रहा है। प्रदेश के अन्य अस्पतालों में संभवत: मुश्किल ही जिलास्तर पर यह टेस्ट होगा। निजी अस्पतालों से करवाए जाने में यह काफी महंगा होता है। सरकारी अस्पताल में न्यूनतम दरों पर यह सुविधा मिल सकेगी।
बीते छह महीने में 198 मरीजों की पहचान
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी तो ट्रांसपोर्ट सुविधा के लिए ही लोग रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। इसमें भी छह माह में 198 मरीजों का पता चल चुका है। ऐसे बहुत से मरीज हो सकते हैं, जिनका अभी पता ही नहीं है। इसके कारणों पर अध्ययन किया जाएगा। फिलहाल ज्यादातर केस गले के कैंसर के हैं। जिसके लिए पर्यावरण में मौजूद कीटनाशकों एवं धूम्रपान को ही बड़ कारण माना जा रहा है।
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कैथल। इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल में अब कैंसर पीड़ितों की पहचान की जा सकेगी। इसके जल्द ही अस्पताल में टेस्ट सुविधा शुरू हो जाएगी।
गौरतलब है कि जिले में पिछले कुछ समय से कैंसर के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पिछले छह में करीब कैसंर के 198 मरीज सामने आ चुके हैं। ये तो वे मरीज हैं, जो सरकार द्वारा पास बनवाने के लिए विभाग के पास आते हैं तथा उन्हें यहां रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होता है।
इसके अलावा ऐसे बहुत से मरीज हैं, जो यहां रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाते। लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चल पाता कि वे कैंसर से पीड़ित हैं। जब तक पता चलता है, तब तक वे मौत के मुहाने पर खड़े होते हैं। ऐसे में यदि मरीज को समय रहते पता चल जाए तो काफी लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
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प्रारंभिक जांच के लिए टेस्ट
जिला अस्पताल में अब लोगाें शुरू में ही पता चल सकेगा कि कहीं वे कैंसर के मरीज तो नहीं हैं। सिविल सर्जन डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने बताया कि जिला अस्पताल में फाइन निडल एक्सपेरेशन साइडोलॉजी (एफएनएसी) टेस्ट शुरू किया जा रहा है। जिसके माध्यम से शरीर में कहीं पर भी यदि गांठ बनी है, तो उसमें से नमूना लेकर जांच की जा सकेगी कि इस गांठ में कैंसर के लक्षण हैं या नहीं।
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इसमें स्तन, गला अथवा शरीर में कहीं पर भी कैंसर हो तो उसका पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में पैथालॉजिस्ट की नियुक्ति के बाद यह टेस्ट शुरू किया जा रहा है। प्रदेश के अन्य अस्पतालों में संभवत: मुश्किल ही जिलास्तर पर यह टेस्ट होगा। निजी अस्पतालों से करवाए जाने में यह काफी महंगा होता है। सरकारी अस्पताल में न्यूनतम दरों पर यह सुविधा मिल सकेगी।
बीते छह महीने में 198 मरीजों की पहचान
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी तो ट्रांसपोर्ट सुविधा के लिए ही लोग रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। इसमें भी छह माह में 198 मरीजों का पता चल चुका है। ऐसे बहुत से मरीज हो सकते हैं, जिनका अभी पता ही नहीं है। इसके कारणों पर अध्ययन किया जाएगा। फिलहाल ज्यादातर केस गले के कैंसर के हैं। जिसके लिए पर्यावरण में मौजूद कीटनाशकों एवं धूम्रपान को ही बड़ कारण माना जा रहा है।