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Kaithal News: मामलों के निपटारे के लिए अभियान 30 सितंबर तक
Tue, 19 Aug 2025 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 19 Aug 2025 01:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। देशभर में लंबित मामलों के निपटारे के लिए 1 जुलाई से चल रहा मध्यस्थता राष्ट्र के लिए विशेष अभियान 30 सितंबर 2025 तक चलेगा। यह एक स्वैच्छिक और गोपनीय प्रक्रिया है, जिसमें एक निष्पक्ष मध्यस्थ (तृतीय पक्ष) विवादित पक्षों को अदालत जाए बिना आपसी सहमति से समाधान निकालने में मदद करता है। वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्रों में विशेष रूप से मध्यस्थता की जाती है।
इसका उद्देश्य आम नागरिकों, संस्थानों और न्यायपालिका को सुलभ व सौहार्दपूर्ण समाधान की ओर प्रेरित करना है। यह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के तहत दो पक्ष निष्पक्ष मध्यस्थ की मदद से आपसी सहमति से विवाद सुलझाते हैं। अभियान का मकसद न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम करना, त्वरित और सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान को बढ़ावा देना है।
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मध्यस्थता के माध्यम से वैवाहिक विवाद, दुर्घटना के मामले, घरेलू हिंसा (गैर-आपराधिक पहलू), चैक बाउंस, व्यवसायिक विवाद, सेवा मामले, समझौता योग्य आपराधिक विवाद, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, विभाजन व बेदखली, भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों को हल किया जा सकता है।
कंवल कुमार ने कहा कि यदि विवाद को सुलझाना है तो अदालत नहीं, मध्यस्थता सबसे बेहतर विकल्प है। मध्यस्थता केंद्रों का लाभ लेने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला मध्यस्थता केंद्र और संबंधित अदालत से संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा टोल-फ्री नंबर 15100 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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कैथल। देशभर में लंबित मामलों के निपटारे के लिए 1 जुलाई से चल रहा मध्यस्थता राष्ट्र के लिए विशेष अभियान 30 सितंबर 2025 तक चलेगा। यह एक स्वैच्छिक और गोपनीय प्रक्रिया है, जिसमें एक निष्पक्ष मध्यस्थ (तृतीय पक्ष) विवादित पक्षों को अदालत जाए बिना आपसी सहमति से समाधान निकालने में मदद करता है। वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्रों में विशेष रूप से मध्यस्थता की जाती है।
इसका उद्देश्य आम नागरिकों, संस्थानों और न्यायपालिका को सुलभ व सौहार्दपूर्ण समाधान की ओर प्रेरित करना है। यह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने दी।
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उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के तहत दो पक्ष निष्पक्ष मध्यस्थ की मदद से आपसी सहमति से विवाद सुलझाते हैं। अभियान का मकसद न्यायिक प्रणाली पर बोझ कम करना, त्वरित और सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान को बढ़ावा देना है।
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मध्यस्थता के माध्यम से वैवाहिक विवाद, दुर्घटना के मामले, घरेलू हिंसा (गैर-आपराधिक पहलू), चैक बाउंस, व्यवसायिक विवाद, सेवा मामले, समझौता योग्य आपराधिक विवाद, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, विभाजन व बेदखली, भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों को हल किया जा सकता है।
कंवल कुमार ने कहा कि यदि विवाद को सुलझाना है तो अदालत नहीं, मध्यस्थता सबसे बेहतर विकल्प है। मध्यस्थता केंद्रों का लाभ लेने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला मध्यस्थता केंद्र और संबंधित अदालत से संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा टोल-फ्री नंबर 15100 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।