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पराली जलाना किसानों की मजबूरी प्रशासन करे सहयोग : गुरनाम सिंह
Thu, 23 Oct 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 23 Oct 2025 01:08 AM IST
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22kht_23_ बैठक में समस्या पर मंथन करते किसान नेता
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। प्रदूषण के संदर्भ में किसानों पर लगाए जा रहे आरोपों के विरोध में कलायत उपमंडल के लांबा खेड़ी गांव में बुधवार को किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें किसान नेता गुरनाम सिंह सहारण और जियालाल सिंहमार ने कहा कि किसान प्रदूषण के लिए दोषी नहीं हैं बल्कि वे स्वयं इसके प्रतिकूल प्रभाव झेल रहे हैं। गुरनाम सिंह ने पराली जलाने को किसानों की मजबूरी बताया। ऐसा वे न करें, प्रशासन को सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता होने के बावजूद किसान आर्थिक तंगी में है और पराली प्रबंधन के लिए महंगी मशीनरी जैसे हैप्पी सीडर खरीदना या किराए पर लेना छोटे किसानों के लिए असंभव है। उन्होंने कहा कि अगली फसल की बुवाई के लिए समय बहुत कम होता है, इसलिए पराली जलाना किसानों के लिए किफायती तरीका बन जाता है। महापंचायत में किसानों ने तर्क दिया कि प्रदूषण के मुख्य स्रोत उद्योग, वाहन उत्सर्जन और शहरों में बढ़ता निर्माण कार्य हैं।
किसान नेता जियालाल सिंहमार ने कहा कि पराली प्रदूषण एक मौसमी समस्या है, जबकि उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं साल भर पर्यावरण को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान रासायनिक उर्वरकों और प्रदूषित हवा-पानी से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
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किसान नेता सुरेंद्र चौसाला ने सरकार से मांग की कि किसानों को दंडित करने के बजाय उन्हें सहयोग दिया जाए। उन्होंने कहा कि सस्ती तकनीक, मशीनों पर पर्याप्त सब्सिडी, आर्थिक सहायता और पराली के वैकल्पिक उपयोग जैसे बायोगैस या खाद के लिए प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
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कलायत। प्रदूषण के संदर्भ में किसानों पर लगाए जा रहे आरोपों के विरोध में कलायत उपमंडल के लांबा खेड़ी गांव में बुधवार को किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें किसान नेता गुरनाम सिंह सहारण और जियालाल सिंहमार ने कहा कि किसान प्रदूषण के लिए दोषी नहीं हैं बल्कि वे स्वयं इसके प्रतिकूल प्रभाव झेल रहे हैं। गुरनाम सिंह ने पराली जलाने को किसानों की मजबूरी बताया। ऐसा वे न करें, प्रशासन को सहयोग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता होने के बावजूद किसान आर्थिक तंगी में है और पराली प्रबंधन के लिए महंगी मशीनरी जैसे हैप्पी सीडर खरीदना या किराए पर लेना छोटे किसानों के लिए असंभव है। उन्होंने कहा कि अगली फसल की बुवाई के लिए समय बहुत कम होता है, इसलिए पराली जलाना किसानों के लिए किफायती तरीका बन जाता है। महापंचायत में किसानों ने तर्क दिया कि प्रदूषण के मुख्य स्रोत उद्योग, वाहन उत्सर्जन और शहरों में बढ़ता निर्माण कार्य हैं।
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किसान नेता जियालाल सिंहमार ने कहा कि पराली प्रदूषण एक मौसमी समस्या है, जबकि उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं साल भर पर्यावरण को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान रासायनिक उर्वरकों और प्रदूषित हवा-पानी से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
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किसान नेता सुरेंद्र चौसाला ने सरकार से मांग की कि किसानों को दंडित करने के बजाय उन्हें सहयोग दिया जाए। उन्होंने कहा कि सस्ती तकनीक, मशीनों पर पर्याप्त सब्सिडी, आर्थिक सहायता और पराली के वैकल्पिक उपयोग जैसे बायोगैस या खाद के लिए प्रशिक्षण देना आवश्यक है।