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Kaithal News: जलाए जाने लगे फसल अवशेष

Thu, 26 Sep 2024 05:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 26 Sep 2024 05:09 AM IST
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burning of crop residues
जितेंद्र पांचाल
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कैथल। धान का सीजन शुरू हो चुका है। जिले में कई जगहों पर फसल की कटाई हो चुकी है। ऐसे में मनाही के बावजूद सीजन की शुरुआत में ही फसल के अवशेष जलाए जा रहे हैं। कटाई के बाद फसल अवशेष जलाने का एक मामला सामने आया है। इस मामले में कृषि विभाग ने एक किसान के खिलाफ 2500 रुपये जुर्माना किया है।

गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले ही धान की अगेती किस्मों की कटाई शुरू हुई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसान फसल के अवशेष जलाएंगे तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा। उधर, पर्यावरण प्रदूषित करने के मामले में कुछ दिन पहले ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने राइस मिलरों को जुर्माना भी लगाया था।
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कृषि विभाग ने निगरानी के लिए लगाई 77 टीमें ः फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि विभाग ने जिले में 77 टीमें लगाई हैं। सेटेलाइट से निगरानी रखने के साथ-साथ ये टीमें भी फसल अवशेषों में आग लगाने के मामलों में निगरानी रखे हैं। इनमें से ग्रामीण स्तर पर 70 और खंड स्तर पर साम टीमें काय कर रही हैं। गांवों की टीमों में विभागीय कर्मचारी, चौकीदार व मुखिया को शामिल किया गया है।
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इसके अलावा खंड स्तर की टीमों में एक पुलिस अधिकारी अथवा कर्मचारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कर्मचारी, कृषि विज्ञान केंद्र और राजस्व विभाग के कर्मचारी शामिल किए गए हैं। ये टीमें लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।

उपमंडल कृषि अधिकारी सतीश कुमार नारा ने बताया कि जिले में सीजन की शुरूआत में ही फसल अवशेष जलाने का एक मामला सामने आ चुका है। संबंधित किसान को जुर्माना किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि फसल के अवशेषों को न जलाएं। उनका सही तरीके से प्रबंधन करें। इससे पर्यावरण प्रदूषण नहीं होगा और किसानों के साथ-साथ आमजन को लाभ होगा। संवाद
पहले सेटेलाइट से

आती है लोकेशन
जिले में अगर कहीं पर भी फसल के अवशेष जलाए जाते हैं तो सबसे पहले सेटेलाइट पर लोकेशन आती है। लोकेशन आने पर विभाग की ओर से गठित टीमें मौके का निरीक्षण करती हैं। फसल अवशेष जलाए हुए मिलने पर संबंधित किसान के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाती है। इसके तहत किसानों को जुर्माना किया जा रहा है।

ये होते हैं नुकसान
अवशेष जलाने से 100% नत्रजन, 25% फास्फोरस, 20% पोटाश और 60% सल्फर का नुकसान होता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति में गिरावट आती हैं। भूमि की संरचना में क्षति होने से पोषक तत्वों का समुचित मात्रा में स्थानांतरण नहीं हो पाता है तथा अतिरिक्त जल की निकासी भी नहीं हो पाती है।
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