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शहर के गणमान्य लोगों ने बताया बजट को सामान्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Feb 2021 12:29 AM IST
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केंद्र सरकार के बजट में की गई कई घोषणाओं से जहां लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर लाभ मिलेगा, वहीं आयकर स्लैब में कोई घोषणा न होने से निराशा भी हाथ लगी है। कृषि सैस से कृषि का तो भला होगा, लेकिन आम जनता को महंगा पेट्रोल व डीजल भी लेना होगा। इसके अलावा सड़कों की मजबूती, टैक्स ऑडिट की सीमा 10 करोड़ किए जाने, स्वास्थ्य क्षेत्र में की गई घोषणाओं का जहां लोगों ने स्वागत किया। वहीं कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें कुछ भी घोषणा न होने से निराश हैं। अमर उजाला जिला कार्यालय में बजट को लेकर शहर के कई क्षेत्रों से गणमान्य लोगों ने संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेकर बजट पर चर्चा की।
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इस चर्चा में जिला टैक्सेशन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गोयल, पंजाबी वेलफेयर सभा के अध्यक्ष सुष्म कपूर, सेक्टर 21 आरडब्ल्यूए के चेयरमैन डा. अजय मित्तल, व्यापार मंडल के नरेंद्र अग्रवाल, अध्यापिका अंजू कुंडू, पुलिस सेवानिवृत्त एसोसिएशन के प्रधान व सीनियर सिटीजन एसोसिएशन से ओमप्रकाश करोड़ा, अधिवक्ता शमशेर कुंडू, हैंडलूम व्यवसाय से जुड़े सतीश राजपाल, वाइड विजन क्लब के सदस्य एवं युवा अधिवक्ता लक्षित जैन, उद्योगपति सतीश मुखीजा ने भाग लिया और अपने विचार रखे।
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जिला टैक्सेशन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गोयल ने कहा कि शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए बजट में कई अच्छे प्रावधान किए गए हैं। लेकिन सबसे निराशाजनक बात यह है कि आयकर स्लैब को नहीं बढ़ाया गया। वरिष्ठ नागरिकों को जरूरत राहत दी है। उस पर भी क्लॉज लगा दिया गया कि जिनकी आय का स्त्रोत केवल पेंशन व ब्याज है, उन्हें ही सुपर सिटीजन क्लास में आयकर रिटर्न भरने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने टैक्स ऑडिट करवाने की सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ की है, जिससे मध्यम उद्योग जगत को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन इसमें भी 95 प्रतिशत तक ऑनलाइन भुगतान करने पर राहत मिलेगी।
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पंजाबी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रवक्ता एवं म्यूचअल फंड कारोबार से जुड़े सुष्म कपूर ने कहा कि बजट में फार्म 80 सी के तहत आयकर में छूट मिलती है। इसे बढ़ाकर कम से कम ढाई लाख किया जाना चाहिए था। लेकिन उल्टा सरकार ने इस क्षेत्र को आयकर के दायरे में लाने की बात कही है। जिससे म्यूचअल फंडस क्षेत्र में मायूसी है। लांग टर्म में लोगों को इससे नुकसान होगा।
वाइड विजन ग्रुप के सदस्य एवं युवा अधिवक्ता लक्षित जैन का कहना है कि सरकार ने एमएसएमई में कई योजनाएं लागू कर रोजगार सृजन का प्रयास किया है। लेकिन कोरोना काल में जो नौकरियां गईं, उन्हें देने के लिए कोई विशेष योजना सामने नहीं आई। प्राइवेट सेक्टर में जरूर सरकार ने रोजगार बढ़ाने की दिशा में कई फैसले लिए हैं, लेकिन सरकारी सेक्टर में नौकरियां कम होंगी। यूथ पर ओर अधिक फोकस करना चाहिए था। कौशल विकास योजना में 2020 तक चार साल तक पैसा दिया गया, इस बार जिक्र नजर नहीं आ रहा।
सेक्टर 21 आरडब्ल्यूए के चेयरमैन डा. अजय मित्तल का कहना है कि आम आदमी को आयकर स्लैब में कोई परिवर्तन न किए जाने से निराशा हुई है। कपड़ा, मोबाइल चार्जर सहित आम जरूरत की चीजें महंगी की गई हैं, लेकिन चांदी, लोहा, स्टील जैसी वस्तुएं सस्ती की गई हैं। किसानों के लिए बजट बढ़ाया गया है, जो सराहनीय है।
व्यापार मंडल के उप-प्रधान नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बजट में आम आदमी को राहत दी जानी चाहिए थी। उन्हें उम्मीद थी कि आयुष्मान योजना को सभी के लिए लागू किया जाएगा। लेकिन इस पर चर्चा तक नजर नहीं आई। स्वास्थ्य पर ओर खर्च बढ़ाया जाना चाहिए था। प्रथमदृष्ट्या बजट में आम आदमी के लिए कुछ ज्यादा नजर नहीं आ रहा।
वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन सहित पुलिस सेवानिवृत्त कर्मचारी एसोसिएशन के प्रधान ओमप्रकाश करोड़ा का कहना था कि केंद्र सरकार किसानों के विरोध में पहले तीन कानून तो लेकर ही आ चुकी है। कृषि में सैस लगाकर यदि च्छा करे तो ठीक है। वरिष्ठ नागरिकों को यदि आयकर में छूट दी गई है तो यह सराहनीय है। किसानों की बात सरकार को माननी चाहिए और तीनों काले कानून वापिस लिए जाने चाहिए।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शेरगढ़ में अध्यापिका अंजू कुंडू ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य के लिए बजट बढ़ाया है। जो सराहनीय है। इसके अलावा कोरोना के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जिससे लोगों को दवा मिल सकेगी। यह सराहनीय है। सस्ते मकानों पर एक साल तक सरकार ने ब्याज की छूट दी है। यह भी सराहनीय फैसला है। इससे मध्यम वर्ग को थोड़ी बहुत राहत मिली है। आयकर छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए थी।
हैंडलूम क्षेत्र में शहर के बड़े व्यापारी एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े सतीश राजपाल ने कहा कि हैंडलूम उद्योग को राहत दी जानी चाहिए थी। सैस लगाने से डीजल व पैट्रोल महंगे तो होंगे, लेकिन इस पैसे का सदुपयोग हो और कृषि क्षेत्र की आय बढऩे से बाजार में रोजगार बढ़ें, तभी इसका लाभ रहेगा। बजट में महंगाई रोकने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए थे। यह सामान्य बजट दिख रहा है। सरकार ने देश में नेशनल हाईवेज को मजबूत करने की योजना पेश की है, जो जिससे विकास में तेजी आएगी।
उद्योगपति राजकुमार मुखीजा ने कहा कि स्टार्ट-अप इकाईयों के लिए कई तरह की राहत की घोषणा की गई है। जो स्वागत योग्य है। पहले से चल रहे उद्योगों के लिए भी राहत दी जानी चाहिए थी। पानी, प्लास्टिक वेस्ट व अन्य से फैले प्रदूषण से निपटने व पानी को ट्रीट करने के लिए 1.47 लाख करोड़ रुपये पांच साल में खर्च करने का प्रावधान किया गया है, यह सराहनीय है। वाहनों की आयु निर्धारित करने की नीति की घोषणा सराहनीय है।

अधिवक्ता शमशेर कुंडू ने कहा कि बजट से कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। यह सामान्य बजट है। सरकार ने कई क्षेत्रों को छुआ तक नहीं। बल्कि कृषि क्षेत्र में बड़ी घोषणाओं की उम्मीद थी। जो नहीं हो पाई। आम आदमी को निराशा हाथ लगी है। सरकारी कंपनियों में जो विनिवेश किया जा रहा है, उससे समझ नहीं आ रहा सरकार अपने पास क्या रखेगी?
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