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Kaithal News: वैसाख पूर्णिमा पर अवतरित हुए बुद्ध ः अनिरुद्ध
Tue, 13 May 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 13 May 2025 01:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि जी के मंदिर में आयोजित होने वाला बैसाख पूर्णिमा का मासिक मेला धूमधाम से संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारी अनिरुद्ध गौतम ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को पूर्णमासी के महत्व व इससे मिलने वाले फल के बारे में विस्तार से बताया गया। कथा में गौतम ने बताया कि वैसे तो हर पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व होता है लेकिन बैशाख मास की पूर्णिमा का महत्व इसलिए बढ़ जाता, क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का अवतार हुआ था।
उन्होंने कहा कि पूर्णिमा के व्रत को संपूर्ण व्रत माना जाता है तथा इसके विधि पूर्वक रखने से जिस पुण्य की प्राप्ति होती है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर अन्न व वस्त्र का दान करना बहुत ही फलदायी होता है इससे परिवार में सुख समृद्धि होने के साथ हर मनोकामना पूर्ण होती है। गौतम ने बताया कि पूर्णिमा के दिन जितना महत्व कथा सुनने का है उसके कई गुणा अधिक महत्व पौराणिक तीर्थ में डुबकी लगाने का है।
लंबे समय के बाद श्रद्धालुओं ने तीर्थ में लगाई डुबकी : पिछले कई मास से तीर्थ में जल नहीं था जिसके कारण हर माह पूर्णिमा मेले में आने वाले श्रद्धालु तीर्थ स्नान से वंचित चल रहे थे। मंदिर के पुजारियों ने तीर्थ के किनारे पर बोर लगवा कर तीर्थ में जल संग्रह अभियान को शुरू किया गया।
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कलायत। श्री कपिल मुनि जी के मंदिर में आयोजित होने वाला बैसाख पूर्णिमा का मासिक मेला धूमधाम से संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारी अनिरुद्ध गौतम ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को पूर्णमासी के महत्व व इससे मिलने वाले फल के बारे में विस्तार से बताया गया। कथा में गौतम ने बताया कि वैसे तो हर पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व होता है लेकिन बैशाख मास की पूर्णिमा का महत्व इसलिए बढ़ जाता, क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का अवतार हुआ था।
उन्होंने कहा कि पूर्णिमा के व्रत को संपूर्ण व्रत माना जाता है तथा इसके विधि पूर्वक रखने से जिस पुण्य की प्राप्ति होती है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर अन्न व वस्त्र का दान करना बहुत ही फलदायी होता है इससे परिवार में सुख समृद्धि होने के साथ हर मनोकामना पूर्ण होती है। गौतम ने बताया कि पूर्णिमा के दिन जितना महत्व कथा सुनने का है उसके कई गुणा अधिक महत्व पौराणिक तीर्थ में डुबकी लगाने का है।
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लंबे समय के बाद श्रद्धालुओं ने तीर्थ में लगाई डुबकी : पिछले कई मास से तीर्थ में जल नहीं था जिसके कारण हर माह पूर्णिमा मेले में आने वाले श्रद्धालु तीर्थ स्नान से वंचित चल रहे थे। मंदिर के पुजारियों ने तीर्थ के किनारे पर बोर लगवा कर तीर्थ में जल संग्रह अभियान को शुरू किया गया।
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