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Kaithal News: गाउन व टोपी की परंपरा तोड़ पहनी धोती, कुर्ता-पाजामा और साड़ी

Thu, 20 Mar 2025 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 20 Mar 2025 01:04 AM IST
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Breaking the tradition of gown and cap, wore dhoti, kurta-pyjama and sari
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से बुधवार को आरकेएसडी कॉलेज के सभागार में आयोजित प्रथम दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह में छात्र-छात्राएं पारंपरिक भारतीय परिधानों में नजर आए। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय ने शिरकत की।
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दीक्षांत समारोह में अंग्रेजों के समय से चली आ रही गाउन व टोपी पहनने की परंपरा तोड़ते हुए विद्यार्थियों ने स्वदेशी परिधान धोती, कुर्ता-पाजामा और साड़ी में डिग्रियां ली। समारोह में कुल 527 छात्रों को स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्रियां प्रदान की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 38 छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना हम सबका कर्तव्य है।
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उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढऩे का आह्वान किया। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से ही दीक्षांत समारोह आयोजित करने का प्रयास किया जा रहा था, और राज्यपाल के मार्गदर्शन में सपना साकार हुआ। संवाद
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