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Kaithal News: मुक्केबाज लासू यादव बनीं युवतियों के लिए प्रेरणा

Thu, 19 Feb 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 19 Feb 2026 01:12 AM IST
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Boxer Lasu Yadav becomes an inspiration for young women
अंबर
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कैथल। जिले की होनहार बेटी लासू यादव खेल और नौकरी दोनों क्षेत्रों में अपनी मेहनत से मिसाल कायम कर रही हैं। किसान परिवार से निकलकर मुक्केबाजी के रिंग तक और फिर भारतीय रेल में टीटीई (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) के पद तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी है।

लासू यादव, रमेश कुमार की पुत्री हैं। उनके पिता किसान हैं और परिवार में एक छोटा भाई है। साधारण परिवार से आने वाली लासू ने कम उम्र में ही बड़ा सपना देखा। उन्होंने 12 वर्ष की आयु में मुक्केबाजी की शुरुआत की और आज 21 वर्ष की उम्र में सशक्त मुक्केबाज के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
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वर्तमान में लासू कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमए अंग्रेजी अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भारतीय रेल में टीटीई के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी, पढ़ाई और खेल—तीनों जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन लासू ने अपने अनुशासन और समय प्रबंधन से इसे संभव कर दिखाया है।
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लासू का प्रशिक्षण कैथल स्थित आरकेएसडी कॉलेज बॉक्सिंग अकादमी में होता है। यहां उन्हें कोच राजेंद्र सिंह और गुरमीत सिंह का मार्गदर्शन मिलता है। दोनों कोचों के निर्देशन में उन्होंने अपनी तकनीक, फिटनेस और रिंग रणनीति को मजबूत किया है। वे प्रतिदिन सुबह तीन घंटे और शाम को तीन घंटे कड़ा अभ्यास करती हैं। उनकी दिनचर्या में फिटनेस ट्रेनिंग, स्पैरिंग और तकनीकी अभ्यास शामिल है। खिलाड़ी से बातचीत में लासू ने बताया कि शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन परिवार और कोचों के समर्थन ने हौसला बढ़ाया। उनका लक्ष्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना है। उन्होंने कहा कि एक महिला खिलाड़ी के रूप में सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

लासू का मानना है कि खेल शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। रेलवे में नौकरी के दौरान भी वे फिटनेस पर ध्यान देती हैं और अवकाश में कैथल आकर अभ्यास करती हैं। संवाद


अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच गुरमीत सिंह ने कहा कि लासू में जबरदस्त स्टैमिना और फाइटिंग स्पिरिट है। वे रिंग में आक्रामक और संतुलित खेल दिखाती हैं, जो उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है। यदि उन्हें निरंतर अवसर और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिलता रहा, तो वे भविष्य में बड़े पदक जीत सकती हैं।कैथल की यह बेटी आज क्षेत्र की अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। किसान की बेटी ने साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
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