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बीरेंद्र सिंह को आई गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व शोषण की याद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Sep 2022 02:39 AM IST
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Birendra Singh remembered poverty, corruption, unemployment and exploitation
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह को अब चुनावी राजनीति से रिटायर होने के बाद प्रदेश और देश में गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व शोषण की याद आई है। अब वे अपने साथियों के साथ इन समस्याओं पर सामाजिक लोगों के साथ मिलकर शोध रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद 23 मार्च को जींद में एक रैली का आयोजन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उनका कहना है कि इस रिपोर्ट पर जो भी राजनीतिक दल काम करने के लिए हामी भरेगा, उसका समर्थन करेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविवार को कैथल के सेक्टर-19 के सामुदायिक केंद्र में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
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छोटू राम विचार मंच के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र ढुल की अगुवाई में आयोजित जनसभा में कैथल सहित आस-पास के जिलों से भारी संख्या में समर्थक शामिल हुए। संवाद कार्यक्रम के नाम से आयोजित इस सभा में बीरेंद्र सिंह ने कहा कि आज देश व प्रदेश में राजनीतिक व्यवस्था को लेकर युवा ऊब चुका है। उसे समस्याओं का त्वरित समाधान चाहिए। पुरानी पार्टियों से जनता ऊब चुकी है, पंजाब इसका उदहारण है। गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शोषण से युवा तंग आ चुका है। इस अवसर पर पूर्व विधायक जोगी राम, पूर्व चेयरमैन बंसीलाल, दिलबाग सिंह, धर्मपाल मलिक, वीरेंद्र छौत, रामकुमार शर्मा, सुरेश शर्मा, अजमेर पूर्व सरपंच, पुष्पेंद्र टीक, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र तंवर, राजेंद्र बाखली, ईश्वर सीड़ा, रतन सरपंच, गुलाब सरपंच देवीगढ़, सुभाष सरपंच ढांडाखेड़ी, विजय सिंह रोहेड़ा, संदीप पूनिया, जसमेर फिरोजपुर सहित अनेकों गणमान्य लोग इस जनसभा में पहुंचे।
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सवाल पर बोले-मुझे 50 साल का अनुभव
जनसभा के बाद मीडिया से बातचीत में चौधरी बीरेंद्र सिंह से जब पूछा गया कि वे प्रदेश व केंद्र में मंत्री रहे। तब क्या ऐसा माहौल नजर नहीं आया तो उन्होंने कहा कि उनका राजनीति में 50 साल का अनुभव है। अब उन्हें ये समस्याएं ज्यादा नजर आई हैं, जिनका तत्काल समाधान चाहिए। राजनीति में परिवारवाद में केवल कांग्रेस को कोसने की बजाए यह देखना चाहिए कि कई पार्टियों में परिवारों को आगे बढ़ाया जा रहा है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर उन्होंने कहा कि यात्रा से कुछ नहीं होता। देश के लिए विपक्ष का कमजोर होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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