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चौक पर लगा भिंडरांवाला का बैनर, पुलिस ने उतारा
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Fri, 05 Jun 2015 12:10 AM IST
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गुहला-चीका के ऊधम सिंह चौक के पास स्कूल की दीवार से सटे पेड़ पर किसी ने जरनैल सिंह भिंडरावाला का बैनर लगा गया। पुलिस व खुफिया विभाग को जब इस बात की खबर मिली तो हड़कंप मच गया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और बैनर को उतारकर थाने ले गई। दूसरी ओर, खुफिया विभाग यह जानने में जुटा रहा कि सारा दिन व्यस्त रहने वाले मेन चौक के पास आखिर कौन बैनर लगा गया।
बैनर पर जरनैल सिंह भिंडरांवाला का फोटो छपा है। साथ में जून 1984 में दरबार साहब में शहीद हुए लोगों को प्रणाम किया गया है। बैनर हालांकि समूह साध संगत गांव गुहला की ओर से लगाया गया है, मगर बैनर पर किसी भी संस्था अथवा व्यक्ति का नाम नहीं छपा है। बैनर को छापने वाले फ्लेक्स प्रिंटर का नाम भी प्रिंट नहीं है।
मौके पर पहुंचे पुलिस व खुफिया विभाग के अधिकारियों ने आस पास के रेहड़ी फड़ी वालों से इस बारे में पूछताछ की, लेकिन बैनर लगाने वालों की पहचान नहीं हो पाई। सिर्फ यह पता चल पाया कि बैनर सुबह नहीं था, दोपहर को ही किसी समय कोई लगा गया।
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बाहर के लोगों की हो सकती है शरारत
तीन तरफ से पंजाब से बिल्कुल सटा होने के बावजूद आतंकवाद के दिन में भी गुहला के इलाके में कोई छोटी सी भी वारदात नहीं हुई थी। गुहला में कहीं भी कट्टरपंथियों की कोई मौजूदगी भी कभी सामने नहीं आई। इस कारण यह किसी बाहरी व्यक्ति की शरारत हो सकती है, लेकिन नाम गुहला वासियों का लिख दिया गया है।
पंचायत चुनाव के मद्देनजर हरकत?
विधानसभा चुनाव के दौरान आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरने आए एक प्रत्याशी के समर्थकों ने भी यहां मेन चौक पर खालिस्तान जिंदाबाद लिखा झंडा लहराया था। लोगों का मानना है कि वोटों का ध्रुवीकरण करने के उद्देश्य से उस समय ऐसा किया गया था। अब चूंकि स्थानीय निकायों यानी पंचायतों और नगर पालिका चीका का चुनाव भी सिर पर है, इसलिए यह भी हो सकता है कि किसी ने इन्हीं चुनावों में फायदा लेने अथवा तनाव पैदा करने के लिए यह हरकत की गई हो।
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बैनर पर जरनैल सिंह भिंडरांवाला का फोटो छपा है। साथ में जून 1984 में दरबार साहब में शहीद हुए लोगों को प्रणाम किया गया है। बैनर हालांकि समूह साध संगत गांव गुहला की ओर से लगाया गया है, मगर बैनर पर किसी भी संस्था अथवा व्यक्ति का नाम नहीं छपा है। बैनर को छापने वाले फ्लेक्स प्रिंटर का नाम भी प्रिंट नहीं है।
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मौके पर पहुंचे पुलिस व खुफिया विभाग के अधिकारियों ने आस पास के रेहड़ी फड़ी वालों से इस बारे में पूछताछ की, लेकिन बैनर लगाने वालों की पहचान नहीं हो पाई। सिर्फ यह पता चल पाया कि बैनर सुबह नहीं था, दोपहर को ही किसी समय कोई लगा गया।
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बाहर के लोगों की हो सकती है शरारत
तीन तरफ से पंजाब से बिल्कुल सटा होने के बावजूद आतंकवाद के दिन में भी गुहला के इलाके में कोई छोटी सी भी वारदात नहीं हुई थी। गुहला में कहीं भी कट्टरपंथियों की कोई मौजूदगी भी कभी सामने नहीं आई। इस कारण यह किसी बाहरी व्यक्ति की शरारत हो सकती है, लेकिन नाम गुहला वासियों का लिख दिया गया है।
पंचायत चुनाव के मद्देनजर हरकत?
विधानसभा चुनाव के दौरान आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरने आए एक प्रत्याशी के समर्थकों ने भी यहां मेन चौक पर खालिस्तान जिंदाबाद लिखा झंडा लहराया था। लोगों का मानना है कि वोटों का ध्रुवीकरण करने के उद्देश्य से उस समय ऐसा किया गया था। अब चूंकि स्थानीय निकायों यानी पंचायतों और नगर पालिका चीका का चुनाव भी सिर पर है, इसलिए यह भी हो सकता है कि किसी ने इन्हीं चुनावों में फायदा लेने अथवा तनाव पैदा करने के लिए यह हरकत की गई हो।