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आयोग की सख्ती से बैनर और पोस्टर का धंधा ठप, कारोबारी मायूस
कैथल
Updated Sun, 23 Mar 2014 12:22 AM IST
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कैथल। चुनाव में दो पैसे कमाने के इंतजार में बैठे लोगाें का धंधा आचार संहिता और निर्वाचन आयोग की सख्ती के चलते ठप हो गया है। इस चुनाव मेें आयोग की सख्ती के चलते झंडे, पोस्टर एवं बैनर सहित पर्चों तक का वितरण नहीं किया जा रहा है। जिस कारण जिले भर में कहीं भी पोस्टर एवं बैनर आदि नहीं दिखाई दे रही हैं। मतदाता खामोश हैं। लेकिन चुनाव में इन प्रचार माध्यमों से दो पैसे कमाने की आस लगाए बैठे लोग खाली बैठने को मजबूर हैं।
चुनाव के इंतजार में किया निवेश
कैथल शहर में ही अकेले एक दर्जन से ज्यादा फ्लैक्स बोर्ड बनाने का काम करने वाली बड़ी फर्में हैं। इसके अलावा गुहला-चीका, ढांड, पूंडरी एवं सीवन सहित कलायत व राजौंद में भी यह काम करने वाले काफी संख्या में हैं। इनमें से अधिकतर ने चुनाव को देखते हुए पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के झंडों, बैनर, पोस्टर, पर्चे के लिए निवेश किया था, ताकि चुनाव में मिलने वाले ऑर्डरों से वे आमदनी कमा सकें। कैथल शहर में दो फ्लैक्स मालिकों ने तो 20-20 लाख रुपये की नई मशीनें भी लगाई थीं। लेकिन चुनाव आयोग की सख्ती के कारण अब ये महज शोपीस बन कर रह गई हैं।
न के बराबर मिल रहे हैं ऑर्डर
इंडियन एडवर्टाइजिंग के संजय और सफायर मीडिया के साहिल का कहना है कि चुनाव को देखते हुए जो तैयारियां की थीं, वे सभी धरी की धरी रह गईं। आयोग की हिदायतों के कारण उनके पास अभी तक कोई खास ऑर्डर नहीं आए हैं। इस बार धंधा शून्य है। कोई भी राजनीतिक दल झंडों, बैनरों और यहां तक की पर्चों के लिए भी ऑर्डर नहीं कर रहा है।
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संजय कुमार का कहना है कि इससे केवल इन फर्मों में काम करने वाले लोगों का धंधा ठप नहीं हुआ है, बल्कि अकेले कैथल शहर में 500 ऐसे लोग खाली बैठने को मजबूर हैं। जो झंडे सीलने, बिल्ले बनाने, पर्चे वितरित करने, पर्चे, पोस्टर एवं फ्लैक्स बनाने एवं लगाने का काम करते हैं। ये सभी बेसब्री से चुनाव का इंतजार कर रहे थे। लेकिन नेता आयोग के डंडे के डर से इस ओर रुख नहीं कर रहे हैं।
दूसरे पोस्टर भी हटाए गए : दुकानदार
साहिल का कहना है कि अधिकारी निर्वाचन आयोग के निर्देशों का बहाना बनाकर उन पोस्टरों को भी नहीं छोड़ रहे, जो निर्वाचन आयोग से अनुमति लेकर लगाए जा रहे हैं। आयोग के निर्देशों की आड़ उनके वे पोस्टर, बैनर एवं फ्लैक्स भी हटवा रहे हैं, जिनका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।
वे मार्केट में किसी अन्य उद्देश्य के लिए लगाए जा रहे हैं। उधर, जिला निर्वाचन अधिकारी डीसी एन के सोलंकी के अनुसार शहर में पोस्टर एवं बैनर लगाने के लिए जगह निश्चित की गई है। राजनेता अनुमति लेकर वहां पोस्टर लगवा सकते हैं। जिले में आयोग के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
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चुनाव के इंतजार में किया निवेश
कैथल शहर में ही अकेले एक दर्जन से ज्यादा फ्लैक्स बोर्ड बनाने का काम करने वाली बड़ी फर्में हैं। इसके अलावा गुहला-चीका, ढांड, पूंडरी एवं सीवन सहित कलायत व राजौंद में भी यह काम करने वाले काफी संख्या में हैं। इनमें से अधिकतर ने चुनाव को देखते हुए पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के झंडों, बैनर, पोस्टर, पर्चे के लिए निवेश किया था, ताकि चुनाव में मिलने वाले ऑर्डरों से वे आमदनी कमा सकें। कैथल शहर में दो फ्लैक्स मालिकों ने तो 20-20 लाख रुपये की नई मशीनें भी लगाई थीं। लेकिन चुनाव आयोग की सख्ती के कारण अब ये महज शोपीस बन कर रह गई हैं।
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न के बराबर मिल रहे हैं ऑर्डर
इंडियन एडवर्टाइजिंग के संजय और सफायर मीडिया के साहिल का कहना है कि चुनाव को देखते हुए जो तैयारियां की थीं, वे सभी धरी की धरी रह गईं। आयोग की हिदायतों के कारण उनके पास अभी तक कोई खास ऑर्डर नहीं आए हैं। इस बार धंधा शून्य है। कोई भी राजनीतिक दल झंडों, बैनरों और यहां तक की पर्चों के लिए भी ऑर्डर नहीं कर रहा है।
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संजय कुमार का कहना है कि इससे केवल इन फर्मों में काम करने वाले लोगों का धंधा ठप नहीं हुआ है, बल्कि अकेले कैथल शहर में 500 ऐसे लोग खाली बैठने को मजबूर हैं। जो झंडे सीलने, बिल्ले बनाने, पर्चे वितरित करने, पर्चे, पोस्टर एवं फ्लैक्स बनाने एवं लगाने का काम करते हैं। ये सभी बेसब्री से चुनाव का इंतजार कर रहे थे। लेकिन नेता आयोग के डंडे के डर से इस ओर रुख नहीं कर रहे हैं।
दूसरे पोस्टर भी हटाए गए : दुकानदार
साहिल का कहना है कि अधिकारी निर्वाचन आयोग के निर्देशों का बहाना बनाकर उन पोस्टरों को भी नहीं छोड़ रहे, जो निर्वाचन आयोग से अनुमति लेकर लगाए जा रहे हैं। आयोग के निर्देशों की आड़ उनके वे पोस्टर, बैनर एवं फ्लैक्स भी हटवा रहे हैं, जिनका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।
वे मार्केट में किसी अन्य उद्देश्य के लिए लगाए जा रहे हैं। उधर, जिला निर्वाचन अधिकारी डीसी एन के सोलंकी के अनुसार शहर में पोस्टर एवं बैनर लगाने के लिए जगह निश्चित की गई है। राजनेता अनुमति लेकर वहां पोस्टर लगवा सकते हैं। जिले में आयोग के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है।