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Kaithal News: बंदरों को काबू करने की कोशिश नाकाम
Mon, 24 Mar 2025 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 24 Mar 2025 01:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। पिछले दिनों नगर पालिका ने बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने की कार्रवाई शुरू की लेकिन वह असफल साबित हुई है। यह आरोपी स्थानीय लोगों के हैं। उनका आरोप है कि यहां पर
बंदरों को पकड़ने के काम में महज खानापूर्ति की गई।
गौरतलब है कि नगर में घूम रहे बंदर इन दिनों गली मोहल्लों के सिकंदर बने हुए हैं। इनकी गतिविधियों में यदि कोई रोकटोक करता है तो उसकी बस खैर नहीं। उस पर ये हमला कर देते हैं। लोग इन बंदरों से परेशान हैं। नगर के लोगों ने बताया कि वह अपने घर की छतों पर कपड़े तक सुखाने नहीं जा सकते। बंदर कपड़े उतार कर फाड़ देते हैं या कपड़े लेकर भाग जाते हैं। बंदर घर की रसोई में घुसकर खाने पीने की चीजें उठा ले जाते हैं।
लोगों का कहा है कि बंदरों की चहल कदमी के चलते न दिन का चैन और न रात का आराम है। वानरों की टोली किस समय कहां आ धमकें, कहा नहीं जा सकता। हालात उस समय और भी पेचीदा हो जाते हैं जब ये वानर आदमियों को घेर कर काटने से भी गुरेज नहीं करते। दहशत में आए लोग यदि इनको लाठी दिखाएं तो सामने वाले पर हमला कर देते हैं। इस कारण कई बार चोट भी लग जाती है।
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नागरिक कुलबीर, राजेश शर्मा, रामफल, कुलदीप, अशोक, रमन, अमन,जतिन, जय देव ने बताया कि बंदर घरों में काफी नुकसान कर रहे है। कई लोग बंदरों के हमले से चोटिल और घायल भी हो चुके हैं। लोगों ने बताया कि कई बार नगर पालिका व जिला प्रशासन को बंदरों की समस्या से अवगत करवाया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा। नागरिकों ने प्रेस के माध्यम से नगर पालिका व जिला प्रशासन से बंदरों से निजात दिलवाने की गुहार लगाई है।
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राजौंद। पिछले दिनों नगर पालिका ने बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ने की कार्रवाई शुरू की लेकिन वह असफल साबित हुई है। यह आरोपी स्थानीय लोगों के हैं। उनका आरोप है कि यहां पर
बंदरों को पकड़ने के काम में महज खानापूर्ति की गई।
गौरतलब है कि नगर में घूम रहे बंदर इन दिनों गली मोहल्लों के सिकंदर बने हुए हैं। इनकी गतिविधियों में यदि कोई रोकटोक करता है तो उसकी बस खैर नहीं। उस पर ये हमला कर देते हैं। लोग इन बंदरों से परेशान हैं। नगर के लोगों ने बताया कि वह अपने घर की छतों पर कपड़े तक सुखाने नहीं जा सकते। बंदर कपड़े उतार कर फाड़ देते हैं या कपड़े लेकर भाग जाते हैं। बंदर घर की रसोई में घुसकर खाने पीने की चीजें उठा ले जाते हैं।
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लोगों का कहा है कि बंदरों की चहल कदमी के चलते न दिन का चैन और न रात का आराम है। वानरों की टोली किस समय कहां आ धमकें, कहा नहीं जा सकता। हालात उस समय और भी पेचीदा हो जाते हैं जब ये वानर आदमियों को घेर कर काटने से भी गुरेज नहीं करते। दहशत में आए लोग यदि इनको लाठी दिखाएं तो सामने वाले पर हमला कर देते हैं। इस कारण कई बार चोट भी लग जाती है।
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नागरिक कुलबीर, राजेश शर्मा, रामफल, कुलदीप, अशोक, रमन, अमन,जतिन, जय देव ने बताया कि बंदर घरों में काफी नुकसान कर रहे है। कई लोग बंदरों के हमले से चोटिल और घायल भी हो चुके हैं। लोगों ने बताया कि कई बार नगर पालिका व जिला प्रशासन को बंदरों की समस्या से अवगत करवाया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा। नागरिकों ने प्रेस के माध्यम से नगर पालिका व जिला प्रशासन से बंदरों से निजात दिलवाने की गुहार लगाई है।