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Kaithal News: खेतों में धान की फसल में बाैना रोग का लिया जायजा
Wed, 30 Jul 2025 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 30 Jul 2025 01:28 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद की टीम ने कलायत उपमंडल के बात्ता व आसपास के गांवों में धान की फसल में बौना रोग को लेकर सर्वेक्षण किया।
टीम के डॉ. लक्ष्मी चंद ने बताया कि निरीक्षण के दौरान धान की फसल में सफेद पीठ वाला फुदका नजर नहीं आया, जो इस वायरस का प्रमुख वाहक होता है। हालांकि कुछ खेतों में बौने पौधे अवश्य मिले, लेकिन उनकी संख्या आर्थिक नुकसान की सीमा से कम पाई गई।
वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. जमुना नेगी ने कहा कि यदि बौने पौधे दिखाई दें, तो उन्हें उखाड़कर खेत से दूर मिट्टी में गाड़ दें। वहीं, अगर सफेद पीठ वाला फुदका दिखे, तो किसान बोफ्रॉजिन 25SC या फिप्रोनिल जैसी दवाओं का छिड़काव करें, जैसा कि लीफलेट में निर्देशित है।
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उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सतीशा नारा ने बताया कि यह बीमारी राइस ब्लैक स्ट्रीक डवार्फ वायरस से फैल रही है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और पत्तियाँ सूखने लगती हैं। उन्होंने बताया कि यह वायरस सफेद तेला नामक कीट के माध्यम से फैलता है। मौजूदा तापमान (28–35 डिग्री सेल्सियस) और मौसम के उतार-चढ़ाव इसके लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर रहे हैं।
इस मौके पर उन्होंने किसानों से सुबह-शाम खेतों की निगरानी करने और लक्षण दिखते ही कृषि विभाग से संपर्क करने की अपील की।
सर्वेक्षण टीम में डॉ. लक्ष्मी चंद, डॉ. जमुना नेगी, वैज्ञानिक सहायक लख्मी चंद, कुमारी रूबी, डॉ. सतीशा नारा, डॉ. विजय मान, डॉ. नरेश नैन, तकनीकी प्रबंधक रमेश समध्यान और कृषि पर्यवेक्षक राकेश कुंडू शामिल रहे।
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कलायत। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र फरीदाबाद की टीम ने कलायत उपमंडल के बात्ता व आसपास के गांवों में धान की फसल में बौना रोग को लेकर सर्वेक्षण किया।
टीम के डॉ. लक्ष्मी चंद ने बताया कि निरीक्षण के दौरान धान की फसल में सफेद पीठ वाला फुदका नजर नहीं आया, जो इस वायरस का प्रमुख वाहक होता है। हालांकि कुछ खेतों में बौने पौधे अवश्य मिले, लेकिन उनकी संख्या आर्थिक नुकसान की सीमा से कम पाई गई।
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वनस्पति संरक्षण अधिकारी डॉ. जमुना नेगी ने कहा कि यदि बौने पौधे दिखाई दें, तो उन्हें उखाड़कर खेत से दूर मिट्टी में गाड़ दें। वहीं, अगर सफेद पीठ वाला फुदका दिखे, तो किसान बोफ्रॉजिन 25SC या फिप्रोनिल जैसी दवाओं का छिड़काव करें, जैसा कि लीफलेट में निर्देशित है।
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उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सतीशा नारा ने बताया कि यह बीमारी राइस ब्लैक स्ट्रीक डवार्फ वायरस से फैल रही है, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और पत्तियाँ सूखने लगती हैं। उन्होंने बताया कि यह वायरस सफेद तेला नामक कीट के माध्यम से फैलता है। मौजूदा तापमान (28–35 डिग्री सेल्सियस) और मौसम के उतार-चढ़ाव इसके लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर रहे हैं।
इस मौके पर उन्होंने किसानों से सुबह-शाम खेतों की निगरानी करने और लक्षण दिखते ही कृषि विभाग से संपर्क करने की अपील की।
सर्वेक्षण टीम में डॉ. लक्ष्मी चंद, डॉ. जमुना नेगी, वैज्ञानिक सहायक लख्मी चंद, कुमारी रूबी, डॉ. सतीशा नारा, डॉ. विजय मान, डॉ. नरेश नैन, तकनीकी प्रबंधक रमेश समध्यान और कृषि पर्यवेक्षक राकेश कुंडू शामिल रहे।