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Kaithal News: कसान में बिना दहेज शादी बनी मिसाल
Sun, 23 Feb 2025 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 23 Feb 2025 12:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद/कैथल। खंड के कसान गांव के वीएलडीए (पशु चिकित्सा और पशुधन विकास सहायक) डॉक्टर समीर ने जींद के बेलरखा गांव की एमएससी गणित बीएड पास युवती अंजू धतरवाल के साथ रचाए विवाह में एक रुपया व नारियल लेकर मिसाल पेश की है।
समीर व उनके माता पिता की इच्छा थी कि वह बिना दहेज के दुल्हन को अपने घर लाएं। वर पक्ष के इस फैसले की हर जगह प्रशंसा हो रही है। दूल्हे समीर के पिता वजीर चंद व माता सुमन कसान गांव के सरकारी स्कूल में बतौर अध्यापक कार्यरत हैं। उनका यह मानना है कि दुल्हन ही दहेज है, जो समाज के लिए भी एक अच्छी सीख है।
उन्होंने बताया कि जब उनके बेटे के रिश्ते की बात चली तो उन्होंने दहेज न लेने की बात वधु पक्ष के सामने रखकर यह स्पष्ट कर दिया कि उनके विचार दहेज नामक बुराई के उन्मूलन के पक्ष में हैं। उनकी यह सोच है कि जब हम दहेज लेना बंद कर देंगे तो दहेज देना अपने आप बंद हो जाएगा। दूल्हे के परिजनों का यह मानना है कि दुल्हन के पिता की ओर से एक सुशिक्षित बेटी उन्हें सौंपकर जिंदगी भर के लिए उनका ऋणी बना दिया है।
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लड़की के पिता रमेश धतरवाल भी बगैर दहेज के शादी के लिए राजी हो गए। बेलारखा गांव में हिंदू रीति रिवाज और सादगी से दो फरवरी बसंत पंचमी के दिन समीर व अंजू का विवाह हुआ था।
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राजौंद/कैथल। खंड के कसान गांव के वीएलडीए (पशु चिकित्सा और पशुधन विकास सहायक) डॉक्टर समीर ने जींद के बेलरखा गांव की एमएससी गणित बीएड पास युवती अंजू धतरवाल के साथ रचाए विवाह में एक रुपया व नारियल लेकर मिसाल पेश की है।
समीर व उनके माता पिता की इच्छा थी कि वह बिना दहेज के दुल्हन को अपने घर लाएं। वर पक्ष के इस फैसले की हर जगह प्रशंसा हो रही है। दूल्हे समीर के पिता वजीर चंद व माता सुमन कसान गांव के सरकारी स्कूल में बतौर अध्यापक कार्यरत हैं। उनका यह मानना है कि दुल्हन ही दहेज है, जो समाज के लिए भी एक अच्छी सीख है।
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उन्होंने बताया कि जब उनके बेटे के रिश्ते की बात चली तो उन्होंने दहेज न लेने की बात वधु पक्ष के सामने रखकर यह स्पष्ट कर दिया कि उनके विचार दहेज नामक बुराई के उन्मूलन के पक्ष में हैं। उनकी यह सोच है कि जब हम दहेज लेना बंद कर देंगे तो दहेज देना अपने आप बंद हो जाएगा। दूल्हे के परिजनों का यह मानना है कि दुल्हन के पिता की ओर से एक सुशिक्षित बेटी उन्हें सौंपकर जिंदगी भर के लिए उनका ऋणी बना दिया है।
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लड़की के पिता रमेश धतरवाल भी बगैर दहेज के शादी के लिए राजी हो गए। बेलारखा गांव में हिंदू रीति रिवाज और सादगी से दो फरवरी बसंत पंचमी के दिन समीर व अंजू का विवाह हुआ था।