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Kaithal News: ईश्वर कुंडू से मिलने पहुंचे अमेरिकी विद्यार्थी
Wed, 10 Jan 2024 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 10 Jan 2024 02:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कृषि जैविक उत्पाद बनाकर देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का डंका बजा चुके किसान एवं वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू की सफलता का अन्वेषण करने के लिए बीथेल यूनिवर्सिटी अमेरिका से पत्रकारिता के विद्यार्थियों का एक दल मंगलवार को उनके गांव कैलरम पहुंचा। ये विद्यार्थी उनकी सफलता की कहानी जानना चाहते हैं।
इस दल के कोऑर्डिनेटर कुमार मुकेश ने बताया कि अमेरिका के पत्रकारिता के छात्र भारत वर्ष में छिपी उन प्रतिभाओं का अध्ययन करने के लिए भारत में आए हैं, जो बिना संसाधनों के ही अपनी खोज से नाम व पैसा कमा चुके हों। इसी कड़ी में यह दल गांव कैलरम में वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू के प्रतिष्ठान पहुंचा।
दल में शामिल अमेरिकन छात्र-छात्राओं ने ईश्वर कुंडू के करीब सात घंटे तक उनकी प्रेरणा, खोज, उसका विस्तार व देश-विदेश में मिले सम्मान आदि के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। दल के सदस्यों ने किसान वैज्ञानिक की खोज से लेकर कृषि जैविक उत्पाद के निर्माण तक की जानकारी भी हासिल की।
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छात्र जेम्स विलियम्स ने कहा कि छोटे से गांव के किसान वैज्ञानिक ने सीमित संसाधनों के साथ अपने ही स्तर पर जो उपलब्धि हासिल की, वह एक काल्पनिक कहानी की तरह से लगती है। जेम्स विलियम्स ने कहा कि वे लोग किसान वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू से इतने प्रभावित हुए कि वे उन पर थीसिस भी लिखेंगे। मारिया ने कहा कि एक छोटे से गांव के व्यक्ति ने अपने देश की सीमाओं को भी पार कर जिस तरह मास कम्यूनिकेशन किया वह उनके पत्रकारिता विषय की शिक्षा के लिए आदर्श है।
ईश्वर सिंह की खासियत
ईश्वर सिंह कुंडू कैथल के कैलरम के उन्नतशील किसान हैं। उन्होंने गहन शोध के बाद हर्बल कीटनाशक विकसित किया है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों-मकोड़ों को तो नष्ट कर देता है, लेकिन फसलों के लिए उपयोगी कीड़ों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।
आरंभिक पढ़ाई के बाद नौकरी में असफल रहे। 1988 में पेस्टिसाइड्ज की दुकान खोली। एक कीटनाशक से वह बहुत बीमार हो गए। कीटनाशक की हानिकारक शक्ति के संबंध में सोचा। सेहत पर खतरनाक असर को समझा तो वहां से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ।
उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सलाह मशविरा किया और अंत में इन्होंने खुद ही एक हर्बल उत्पाद बनाने ठान ली। पांच साल के व्यापक शोध के बाद इन्होंने अपना उत्पाद एक दोस्त के खेत में आजमाया। मित्रों ने कहा उत्पाद तो कमाल है। वहीं से सूत्र (फॉर्मूला) का नाम कमाल ही पड़ गया।
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कलायत। कृषि जैविक उत्पाद बनाकर देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का डंका बजा चुके किसान एवं वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू की सफलता का अन्वेषण करने के लिए बीथेल यूनिवर्सिटी अमेरिका से पत्रकारिता के विद्यार्थियों का एक दल मंगलवार को उनके गांव कैलरम पहुंचा। ये विद्यार्थी उनकी सफलता की कहानी जानना चाहते हैं।
इस दल के कोऑर्डिनेटर कुमार मुकेश ने बताया कि अमेरिका के पत्रकारिता के छात्र भारत वर्ष में छिपी उन प्रतिभाओं का अध्ययन करने के लिए भारत में आए हैं, जो बिना संसाधनों के ही अपनी खोज से नाम व पैसा कमा चुके हों। इसी कड़ी में यह दल गांव कैलरम में वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू के प्रतिष्ठान पहुंचा।
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दल में शामिल अमेरिकन छात्र-छात्राओं ने ईश्वर कुंडू के करीब सात घंटे तक उनकी प्रेरणा, खोज, उसका विस्तार व देश-विदेश में मिले सम्मान आदि के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। दल के सदस्यों ने किसान वैज्ञानिक की खोज से लेकर कृषि जैविक उत्पाद के निर्माण तक की जानकारी भी हासिल की।
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छात्र जेम्स विलियम्स ने कहा कि छोटे से गांव के किसान वैज्ञानिक ने सीमित संसाधनों के साथ अपने ही स्तर पर जो उपलब्धि हासिल की, वह एक काल्पनिक कहानी की तरह से लगती है। जेम्स विलियम्स ने कहा कि वे लोग किसान वैज्ञानिक ईश्वर कुंडू से इतने प्रभावित हुए कि वे उन पर थीसिस भी लिखेंगे। मारिया ने कहा कि एक छोटे से गांव के व्यक्ति ने अपने देश की सीमाओं को भी पार कर जिस तरह मास कम्यूनिकेशन किया वह उनके पत्रकारिता विषय की शिक्षा के लिए आदर्श है।
ईश्वर सिंह की खासियत
ईश्वर सिंह कुंडू कैथल के कैलरम के उन्नतशील किसान हैं। उन्होंने गहन शोध के बाद हर्बल कीटनाशक विकसित किया है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों-मकोड़ों को तो नष्ट कर देता है, लेकिन फसलों के लिए उपयोगी कीड़ों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।
आरंभिक पढ़ाई के बाद नौकरी में असफल रहे। 1988 में पेस्टिसाइड्ज की दुकान खोली। एक कीटनाशक से वह बहुत बीमार हो गए। कीटनाशक की हानिकारक शक्ति के संबंध में सोचा। सेहत पर खतरनाक असर को समझा तो वहां से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ।
उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सलाह मशविरा किया और अंत में इन्होंने खुद ही एक हर्बल उत्पाद बनाने ठान ली। पांच साल के व्यापक शोध के बाद इन्होंने अपना उत्पाद एक दोस्त के खेत में आजमाया। मित्रों ने कहा उत्पाद तो कमाल है। वहीं से सूत्र (फॉर्मूला) का नाम कमाल ही पड़ गया।