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Kaithal News: पीएमओ पर बाहर निजी अस्पताल में बच्चेदानी के ऑपरेशन करने व पेट में दो धागे छोड़ने का आरोप
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मामले की सुनवाई करते कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा। संवाद
- फोटो : सांकेतिक
कैथल। सिविल अस्पताल में तैनात कार्यवाहक पीएमओ पर निजी अस्पताल में ऑपरेशन करने व ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं। मामला जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के सामने उठा। मंत्री ने सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला को इस मामले में नेगलिजेंस बोर्ड गठित कर जांच करवाने के आदेश दिए हैं।
गांव सेरधा निवासी रामनिवास ने कष्ट निवारण समिति को दी शिकायत में कार्यवाहक पीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं और वे अपनी पार्टनर के साथ बच्चा करना चाहते थे। बच्चेदानी का ऑपरेशन खुलवाने के लिए कंसल अस्पताल में गए थे और वहां पर 4 मई को किसी महिला डॉक्टर के बजाय नागरिक अस्पताल के पीएमओ ने खुद उनकी पार्टनर रोशनी का ऑपरेशन किया। इसके बाद 6 मई को उन्हें दवाइयां देकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई लेकिन रोशनी के पेट में दर्द रहने लगा और खून भी बह रहा था। उसके बाद उन्होंने दो अलग-अलग जगह अल्ट्रासाउंड करवाए तो दोनों ही सेंटर संचालकों ने जहां से ऑपरेशन करवाया था, वहीं जाने के लिए बोला, क्योंकि उनको पता था कि डॉ. दिनेश कंसल सरकारी अस्पताल कैथल में पीएमओ हैं। यही कारण था कि दोनों ही सेंटर संचालकों ने उन्हें कुछ नहीं बताया।
रिपोर्ट भी नहीं दी
30 जून को वे दोबारा कंसल अस्पताल में गए और खुद पीएमओ ने ही एक-एक मीटर के धागे पेट से निकाले और बताया कि इन्हीं की वजह से परेशानी हो रही है। वे दोनों धागे आज भी उनके पास हैं। उन्होंने लापरवाही होने के बावजूद दोनों बार उनसे करीब 50 हजार रुपये भी लिए और रिपोर्ट देने से भी मना कर दिया। उसके बाद उन्होंने सरकारी अस्पताल से इलाज शुरू किया है।शिकायतकर्ता कष्ट निवारण समिति की बैठक में नहीं पहुंचा लेकिन ये सभी जानकारी समिति को की गई शिकायत के आधार पर दी गई हैं।
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सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के सामने नेगलिजेंस बोर्ड गठित करने और पूरे मामले की जांच करवाने के आदेश दिए हैं।
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लगाए गए आरोप निराधार : पीएमओ
कार्यवाहक पीएमओ डॉ. दिनेश कंसल का कहना है कि लगाए गए आरोप निराधार हैं। वे बच्चेदानी का ऑपरेशन नहीं कर सकते हैं और उनकी पत्नी जो डॉक्टर हैं और संचालक हैं उन्होंने ही ऑपरेशन किया था। शिकायतकर्ता स्वतंत्र है और कुछ भी आरोप लगा सकते हैं।
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गांव सेरधा निवासी रामनिवास ने कष्ट निवारण समिति को दी शिकायत में कार्यवाहक पीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं और वे अपनी पार्टनर के साथ बच्चा करना चाहते थे। बच्चेदानी का ऑपरेशन खुलवाने के लिए कंसल अस्पताल में गए थे और वहां पर 4 मई को किसी महिला डॉक्टर के बजाय नागरिक अस्पताल के पीएमओ ने खुद उनकी पार्टनर रोशनी का ऑपरेशन किया। इसके बाद 6 मई को उन्हें दवाइयां देकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई लेकिन रोशनी के पेट में दर्द रहने लगा और खून भी बह रहा था। उसके बाद उन्होंने दो अलग-अलग जगह अल्ट्रासाउंड करवाए तो दोनों ही सेंटर संचालकों ने जहां से ऑपरेशन करवाया था, वहीं जाने के लिए बोला, क्योंकि उनको पता था कि डॉ. दिनेश कंसल सरकारी अस्पताल कैथल में पीएमओ हैं। यही कारण था कि दोनों ही सेंटर संचालकों ने उन्हें कुछ नहीं बताया।
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रिपोर्ट भी नहीं दी
30 जून को वे दोबारा कंसल अस्पताल में गए और खुद पीएमओ ने ही एक-एक मीटर के धागे पेट से निकाले और बताया कि इन्हीं की वजह से परेशानी हो रही है। वे दोनों धागे आज भी उनके पास हैं। उन्होंने लापरवाही होने के बावजूद दोनों बार उनसे करीब 50 हजार रुपये भी लिए और रिपोर्ट देने से भी मना कर दिया। उसके बाद उन्होंने सरकारी अस्पताल से इलाज शुरू किया है।शिकायतकर्ता कष्ट निवारण समिति की बैठक में नहीं पहुंचा लेकिन ये सभी जानकारी समिति को की गई शिकायत के आधार पर दी गई हैं।
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सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के सामने नेगलिजेंस बोर्ड गठित करने और पूरे मामले की जांच करवाने के आदेश दिए हैं।
लगाए गए आरोप निराधार : पीएमओ
कार्यवाहक पीएमओ डॉ. दिनेश कंसल का कहना है कि लगाए गए आरोप निराधार हैं। वे बच्चेदानी का ऑपरेशन नहीं कर सकते हैं और उनकी पत्नी जो डॉक्टर हैं और संचालक हैं उन्होंने ही ऑपरेशन किया था। शिकायतकर्ता स्वतंत्र है और कुछ भी आरोप लगा सकते हैं।

मामले की सुनवाई करते कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा। संवाद- फोटो : सांकेतिक