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Kaithal News: एनएच जाम केस में 9 साल बाद सभी 24 आरोपी बरी
Tue, 12 Aug 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 12 Aug 2025 01:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वर्ष 2017 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम को सजा सुनाए जाने से पहले कैथल में नेशनल हाईवे-65 पर जाम लगाने के मामले में अदालत ने करीब नौ साल बाद फैसला सुनाते हुए सभी 24 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला डॉ. अमन इंद्र सिंह की अदालत ने सुनाया।
मामला 25 अगस्त 2017 का है, जब पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में बाबा राम रहीम की पेशी और सजा की घोषणा से पहले उनके 400-500 अनुयायियों ने जींद रोड स्थित डेरा सच्चा सौदा के पास लंबा जाम लगाकर विरोध जताया था।
तत्कालीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट व तहसीलदार राकेश कुमार ने सिविल लाइन थाना में शिकायत दी थी कि आरोपी घातक हथियारों से लैस होकर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144 के आदेश की अवहेलना कर रहे थे। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई। मामले में घटनास्थल का मानचित्र तैयार किया गया, गवाहों के बयान दर्ज हुए और आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया गया। इसके बाद करीब नौ साल तक ट्रायल चला। सभी आरोपी इस दौरान जमानत पर थे। इनमें से एक आरोपी की 2019 में मौत हो जाने पर उसका नाम मामले से हटा दिया गया था।
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कैथल। वर्ष 2017 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम को सजा सुनाए जाने से पहले कैथल में नेशनल हाईवे-65 पर जाम लगाने के मामले में अदालत ने करीब नौ साल बाद फैसला सुनाते हुए सभी 24 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला डॉ. अमन इंद्र सिंह की अदालत ने सुनाया।
मामला 25 अगस्त 2017 का है, जब पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में बाबा राम रहीम की पेशी और सजा की घोषणा से पहले उनके 400-500 अनुयायियों ने जींद रोड स्थित डेरा सच्चा सौदा के पास लंबा जाम लगाकर विरोध जताया था।
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तत्कालीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट व तहसीलदार राकेश कुमार ने सिविल लाइन थाना में शिकायत दी थी कि आरोपी घातक हथियारों से लैस होकर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 144 के आदेश की अवहेलना कर रहे थे। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई। मामले में घटनास्थल का मानचित्र तैयार किया गया, गवाहों के बयान दर्ज हुए और आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया गया। इसके बाद करीब नौ साल तक ट्रायल चला। सभी आरोपी इस दौरान जमानत पर थे। इनमें से एक आरोपी की 2019 में मौत हो जाने पर उसका नाम मामले से हटा दिया गया था।
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