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बढ़ते लिंगानुपात का कारण हरियाणा नहीं एम्स का नारा : दुष्यंत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Feb 2023 02:40 AM IST
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AIIMS slogan is not the reason for increasing sex ratio: Dushyant
कैथल। देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले जयंती में निर्भया कांड की वकील रही सीमा सुनिधि कुशवाहा की ओर से मौजूदा राजनीति को पुरुष प्रधान राजनीतिक व्यवस्था बता कही बातों का उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अपने ही अंदाज में जवाब दिया। दुष्यंत ने कहा कि बढ़ते लिंगानुपात का कारण हरियाणा नहीं, अल्ट्रासाउंड मशीन के आने के बाद एम्स का नारा प्रचलित था कि बेटा पाना है तो एम्स आना है।
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महिला अधिवक्ता का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में महिलाओं को राजनीतिक अवसर कम मिलता है। इसके जवाब में दुष्यंत चौटाला ने अपने घर तक का उदाहरण दे दिया। उन्होंने कहा कि उनके घर में उनकी मां और वे खुद विधायक हैं। उनके घर में ही 50 फीसद आरक्षण लागू है। डिप्टी सीएम के भाषण से पहले कार्यक्रम में अपने संबोधन में सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा सुनिधि ने कहा कि उन्हें दुख होता है कि जब झज्जर के लिंगानुपात की रिपोर्ट आती है। उसमें बेटियों की संख्या काफी कम होती है। वे अपने गांव की पहली आठवीं से आगे पढ़ी लड़की हैं। उन्हें मौका नहीं मिलता तो वे निर्भया को न्याय नहीं दिलवा पातीं, वे श्रद्धा के लिए नहीं लड़ पाती।
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उन्होंने कहा कि पिता की संपत्ति के लिए बेटियां कभी नहीं लड़तीं, बेटे लड़ते हैं। डिप्टी सीएम के सामने कुशवाहा ने इंदिरा गांधी, मायावती, ममता बनर्जी, जयललिता जैसी महिलाओं की प्रशंसा की। उन्होंने डिप्टी सीएम से मांग कर डाली कि हरियाणा में महिला सुरक्षा गारंटी बिल लाया जाए। वे स्वयं इस बिल को पारित करने के लिए प्रधानमंत्री से मांग करेंगी। वे यहीं नहीं रुकी, बल्कि डिप्टी सीएम के सामने यहां तक कह दिया कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में जो व्यक्ति एक बार पीएम, सीएम, विधायक बन जाए तो फिर वही या उसके परिवार के सदस्य ही आगे बढ़ते हैं। इसीलिए उनका मानना है कि महिलाओं को राजनीति में भागीदारी दी जाए।
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इन सब बातों को सुनकर संबोधन देने उठे डिप्टी सीएम से सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता की कई बातों का जवाब दिया। उन्होंने सावित्रीबाई और ज्योतिबा फूले को नमन करने के बाद कहा कि 12वीं तक बेशक बेटियों की संख्या कम है, यदि देखा जाए तो उच्च शिक्षा में बेटियों की संख्या ज्यादा है। नौकरियों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। उन्होंने कहा कि बढ़ते लिंगानुपात का कारण हरियाणा नहीं, इतिहास में देखा जाए तो जब अल्ट्रासाउंड मशीन आई थी तो उस समय नारा सुना था..बेटा पाना है तो एम्स में आना है...जैसे नारों के कारण यह फर्क हुआ।
2011 की जनगणना में हरियाणा का लिंगानुपात 833 था। जो आज बढ़कर 908 हो गया है। अगले पांच साल में निश्चित तौर पर इसे 1000 से पार कर देंगे। दुष्यंत चौटाला भी यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने हाथों से पंचायती राज एक्ट में महिलाओं को 50 फीसद आरक्षण दिया है, लेकिन यह 51 फीसद नहीं होगा, न ही 49 फीसद।

उन्होंने कहा कि वे भी थोड़े बहुत वकील हैं और मेरे घर में वह और उनकी मां विधायक हैं। उनके घर में 50 फीसद आरक्षण लागू है। जजपा ने 23 महिलाओं को टिकट दिया था। आगे भी यह संख्या बढ़ाई जाएगी। वे स्वयं बैठकों में आने पर जनप्रतिनिधियों से पूछते हैं कि आप खुद हैं या पत्नी सदस्य हैं। जब वे बताते हैं कि पत्नी है तो वे सदस्यों को एमपी यानी मेंबर का पति और सरपंचों के पतियों को एसपी यानी सरपंच पति कहकर बुलाते हैं। बेटियों ने हर क्षेत्र में नाम कमाया है। हरियाणा सरकार बेटियों के लिए काफी कुछ कर रही है। आने समय में काफी कुछ करना बाकि भी है।
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