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Kaithal News: कलायत के कात्यायनी शक्ति पीठ में लगातार उमड़ रहा आस्था का सैलाब

Sun, 28 Sep 2025 06:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 28 Sep 2025 06:11 AM IST
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A wave of faith continues to surge at the Katyayani Shakti Peeth in Kalayat.
27केएलटी46: कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में पूजा करते श्रद्धालु
निशीकांत शर्मा
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कलायत। अश्विन मास के शारदीय नवरात्रों में कलायत का मां कात्यायनी शक्ति पीठ श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कपिल मुनि मंदिर परिसर स्थित यह शक्ति पीठ अलसुबह से देर रात तक भक्तों की भीड़ से गुलजार रहता है।

किंवदंती है कि मां कात्यायनी के नाम पर ही इस नगर का नाम कलायत पड़ा। यहां नवरात्रों के दौरान माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

मंदिर के पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि कात्यायनी नवदुर्गा के नौ रूपों में छठवां रूप है। यह अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है। यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख प्रथम किया है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थी। सिंह पर आरूढ़ होकर मां ने इसी रूप में महिषासुर का वध किया था। वे शक्ति की आदि रूपा है जिसका उल्लेख ग्रंथों में मिलता है। कालिका-पुराण में उल्लेख मिलता है जिसमें उड़ीसा में देवी कात्यायनी और भगवान जगन्नाथ का स्थान बताया गया है।
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कात्यायनी के नाम पर कलायत पड़ा नाम ः मां कात्यायनी के नाम से ही कलायत का नामकरण माना जाता है। कात्यायनी का प्राचीनतम स्थान होने के कारण लोगों की मान्यता है कि कलायत व कात्यायनी एक दूसरे के पूरक हैं। हालांकि एक मत यह भी प्रबल है कि कलायत का नाम विष्णु के पांचवें अवतार भगवान कपिल के नाम पर हुआ है। कलायत के पौराणिक मंदिर में भगवान कपिल व मां कात्यायनी शक्ति पीठ दोनों ही स्थापित हैं।
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कात्यायन ऋषि कुल परंपरा में हुआ जन्म ः पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे।

इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं। संवाद
स्थापित है दुर्लभ विग्रह

मां कात्यायनी शक्ति पीठ के मुख्य पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि शक्ति पीठ में स्थित मां का विग्रह अपने आप में अद्वितीय और दुर्लभ है। इस पीठ में मां का जो विग्रह है उस पर मां शेर की सवारी घोड़े की सवारी की तरह से कर रही है। ऐसा माना जाता है कि मां का ऐसा विग्रह शायद कलायत शक्ति पीठ में ही है। इसके अलावा मंदिर में मां दुर्गा, मां सरस्वती व काली की पाषाणकालीन दुर्लभ मूर्तियां भी स्थापित हैं। इनका बाकायदा रजिस्ट्रेशन करवाया हुआ है। पीठ में स्थित मां के विग्रह के अलावा मां का मंदिर भी हर दृष्टि से अपने आप में अद्वितीय है। दक्षिणोमुखी इस मंदिर में आठ कोण हैं जो हर देवी को समर्पित हैं तथा मां के दर्शनों के लिए आठ सीढिय़ां चढ़नी होती हैं।


ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी है कात्यायनी

स्वामी इंद्राचार्य जी महाराज ने बताया कि मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पतिरूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा कालिन्दी-यमुना के तट पर की थी। ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। जिन कन्याओं के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो उन्हें इस दिन मां कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए। इससे उन्हें मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।

27केएलटी46: कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में पूजा करते श्रद्धालु

27केएलटी46: कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में पूजा करते श्रद्धालु

27केएलटी46: कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में पूजा करते श्रद्धालु

27केएलटी46: कलायत के मां कात्यायनी शक्ति पीठ में पूजा करते श्रद्धालु

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