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Kaithal News: मौनी अमावस्या पर बन रहा शिववास का अत्यंत शुभ संयोग

Wed, 29 Jan 2025 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 29 Jan 2025 01:16 AM IST
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A very auspicious coincidence of Shivavas is happening on Mauni Amavasya.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। माघ माह के कृष्ण पक्ष की तिथि के दिन आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इसे माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान-दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस बार बुधवार को मौनी अमावस्या है।

धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान करने खास विधान है। इस साल मौनी अमावस्या के दिन बेहद ही शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में जान लीजिए कि इस दिन क्या करना फलदायी रहेगा और क्या नहीं।
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पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि मौनी अमावस्या पर शिववास का अत्यंत ही शुभ संयोग बन रहा है। 29 जनवरी को शिववास योग शाम 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही मौनी अमावस्या के दिन सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है।
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उन्होंने बताया कि सिद्धि योग का संयोग रात 09 बजकर 22 मिनट तक है। इन दोनों ही योग में भगवान शिव की पूजा करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। इसके अलावा मौनी अमावस्या के दिन श्रवण एवं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। इसके अलावा इस बार अमावस्या तिथि पर स्वर्ण नक्षत्र का संयोग बन रहा है जो इसे और भी शुभ और लाभकारी बनाता है।

पंडित शांडिल्य ने बताया की अमावस्या तिथि पर चंद्रमा कमजोर स्थिति में होता है जिससे पितृ शांति के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन पितरों की शांति के लिए किए गए कर्मकांड अधिक प्रभावशाली और शांतिपूर्ण माने जाते हैं।

दीपक जलाने का महत्व ः मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पितर पृथ्वी पर आते हैं। इस दिन वे अपने वंशजों से तर्पण और दान की अपेक्षा करते हैं, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है। शाम को जब पितर अपने लोक लौटते हैं, तो उनके मार्ग को रोशन करने के लिए दीपक जलाया जाता है। ऐसा करने से पितर संतुष्ट होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
मौनी अमावस्या पर रखा जाता है मौन व्रत
मौनी अमावस्या पर मौन रहना आत्मसंयम का प्रतीक है। यह दिन ऋषि मुनियों और तपस्वियों की तपस्या और साधना की स्मृति को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मनु ने अपने मौन व्रत का पालन किया था। इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन व्रत रहकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ अमावस्या के दिन संगट तट और गंगा तट पर देवी-देवताओं का वास होता है। इस समय प्रयागराज में महाकुंभ भी चल रहा है। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में अमृत स्नान भी होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ के अमृत स्नान के समय में गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद ही शुभ रहता है। जो व्यक्ति इस समय गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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