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Kaithal News: कुत्तों के लिए बंद मीट मार्केट में बनेगा शेल्टर होम, होगी नसबंदी
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कमल बहल
कैथल। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के लिए नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने की जगह चिह्नित कर ली है।
नगर परिषद की ओर से शहर के डोगरा गेट पर बनी जेल के पास बंद पड़ी मीट मार्केट पर इसका निर्माण किया जाएगा। प्रशासनिक अनुमति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया को भी शुरू किया जाएगा।
एक कुत्ते की नसबंदी करने में करीब ढाई हजार रुपये का खर्च आएगा। कुत्तों की नसबंदी करने के लिए नगर परिषद पशुपालन विभाग की टीम के डॉक्टरों की ड्यूटी लगाएगी। इसके बाद इन्हें शेल्टर होम में छोड़ा जाएगा।
नगर परिषद की ओर से करीब आठ माह पहले ही करवाए गए सर्वे के तहत शहर में कुत्तों की संख्या करीब 10 हजार है। पहले भी नगर परिषद ने कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए योजना बनाई, लेकिन कुछ कागजी कार्यवाही की खामियों के बीच यह सिरे नहीं चढ़ पाई थी। वहीं, जिला नागरिक अस्पताल में भी प्रतिदिन चार से पांच केस कुत्तों के काटने के आ रहे हैं। अगस्त माह में भी अभी तक 120 के करीब कुत्तों के काटने के केस सामने आ चुके हैं। जिनका रेबीज का इलाज अस्पताल से चल रहा है।
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एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने केवल खूंखार कुत्तों को ही शेल्टर होम में भेजने के आदेश जारी किए हैं। फिर भी नगर परिषद की टीम सभी कुत्तों की नसबंदी करवा शेल्टर होम भेजेगी। नगर परिषद की ओर से इसस पहले कभी भी कुत्तों की नसबंदी का काम नहीं किया गया है।
नगर परिषद की अध्यक्ष के अनुसार कुत्तों का शेल्टर होम बनाने के लिए डीसी से प्रशासनिक अनुमति मिलते ही आगामी कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
कुत्तों के काटने से होती हैं बीमारियां : कुत्ते के काटने से मुख्य रूप से रेबीज (और बैक्टीरियल संक्रमण (जैसे सेल्युलाइटिस या स्टैफ संक्रमण) हो सकता है, जो टिटनेस का भी जोखिम पैदा कर सकता है। रेबीज एक वायरल बीमारी है जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के कारण घाव में दर्द, लालिमा, सूजन और मवाद आ सकती है और यदि यह रक्तप्रवाह में फैल जाए तो सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।
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कैथल। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने के लिए नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने की जगह चिह्नित कर ली है।
नगर परिषद की ओर से शहर के डोगरा गेट पर बनी जेल के पास बंद पड़ी मीट मार्केट पर इसका निर्माण किया जाएगा। प्रशासनिक अनुमति मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया को भी शुरू किया जाएगा।
एक कुत्ते की नसबंदी करने में करीब ढाई हजार रुपये का खर्च आएगा। कुत्तों की नसबंदी करने के लिए नगर परिषद पशुपालन विभाग की टीम के डॉक्टरों की ड्यूटी लगाएगी। इसके बाद इन्हें शेल्टर होम में छोड़ा जाएगा।
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नगर परिषद की ओर से करीब आठ माह पहले ही करवाए गए सर्वे के तहत शहर में कुत्तों की संख्या करीब 10 हजार है। पहले भी नगर परिषद ने कुत्तों की नसबंदी करवाने के लिए योजना बनाई, लेकिन कुछ कागजी कार्यवाही की खामियों के बीच यह सिरे नहीं चढ़ पाई थी। वहीं, जिला नागरिक अस्पताल में भी प्रतिदिन चार से पांच केस कुत्तों के काटने के आ रहे हैं। अगस्त माह में भी अभी तक 120 के करीब कुत्तों के काटने के केस सामने आ चुके हैं। जिनका रेबीज का इलाज अस्पताल से चल रहा है।
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एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने केवल खूंखार कुत्तों को ही शेल्टर होम में भेजने के आदेश जारी किए हैं। फिर भी नगर परिषद की टीम सभी कुत्तों की नसबंदी करवा शेल्टर होम भेजेगी। नगर परिषद की ओर से इसस पहले कभी भी कुत्तों की नसबंदी का काम नहीं किया गया है।
नगर परिषद की अध्यक्ष के अनुसार कुत्तों का शेल्टर होम बनाने के लिए डीसी से प्रशासनिक अनुमति मिलते ही आगामी कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
कुत्तों के काटने से होती हैं बीमारियां : कुत्ते के काटने से मुख्य रूप से रेबीज (और बैक्टीरियल संक्रमण (जैसे सेल्युलाइटिस या स्टैफ संक्रमण) हो सकता है, जो टिटनेस का भी जोखिम पैदा कर सकता है। रेबीज एक वायरल बीमारी है जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है और जानलेवा हो सकती है। बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के कारण घाव में दर्द, लालिमा, सूजन और मवाद आ सकती है और यदि यह रक्तप्रवाह में फैल जाए तो सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।