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Kaithal News: धनवान व्यक्ति वही जो करे सेवा भक्ति ः आचार्य संतोष
Tue, 10 Sep 2024 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 10 Sep 2024 03:54 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में जारी कथा के पांचवें दिन आचार्य संतोष त्रिपाठी ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। भगवान बृजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखें हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोडकर गिर्राज जी की पूजा शुरू कर दी तो इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश की। तब कृष्ण भगवान ने गिर्राज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया। तब इंद्र को भगवान की सत्ता का अहसास हुआ और इंद्र ने भगवान से क्षमा मांगी।
आचार्य ने कहा कि भागवत कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरी से मिलने का मार्ग बता देती है। कलयुग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा की कलयुग में मनुष्य को पुण्य तो सीधे होते है परन्तु मानस पाप नहीं होते। कलयुग में हरी नाम से ही जीव का कल्याण हो जाता है। कलयुग में ईश्वर का नाम ही काफी है। सच्चे हृदय से हरी नाम के सिमरण मात्र से कल्याण संभव है।
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इसके लिए कठिन तपस्या और यज्ञ आदि करने की आवश्यकता नहीं है। जबकि सतयुग, द्वापर और त्रेता युग में ऐसा नहीं था। कथा के अंतिम पड़ाव में पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु कृष्ण भजनों पर झूम कर नाचे।
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कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में जारी कथा के पांचवें दिन आचार्य संतोष त्रिपाठी ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करे। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि पूतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। भगवान बृजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखें हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोडकर गिर्राज जी की पूजा शुरू कर दी तो इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश की। तब कृष्ण भगवान ने गिर्राज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया। तब इंद्र को भगवान की सत्ता का अहसास हुआ और इंद्र ने भगवान से क्षमा मांगी।
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आचार्य ने कहा कि भागवत कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरी से मिलने का मार्ग बता देती है। कलयुग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा की कलयुग में मनुष्य को पुण्य तो सीधे होते है परन्तु मानस पाप नहीं होते। कलयुग में हरी नाम से ही जीव का कल्याण हो जाता है। कलयुग में ईश्वर का नाम ही काफी है। सच्चे हृदय से हरी नाम के सिमरण मात्र से कल्याण संभव है।
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इसके लिए कठिन तपस्या और यज्ञ आदि करने की आवश्यकता नहीं है। जबकि सतयुग, द्वापर और त्रेता युग में ऐसा नहीं था। कथा के अंतिम पड़ाव में पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु कृष्ण भजनों पर झूम कर नाचे।