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Kaithal News: लघु नाटिका से दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश

Sat, 31 Jan 2026 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 31 Jan 2026 12:44 AM IST
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A powerful message of water conservation was given through a short play.
30केएलटी3: जल संरक्षण को लेकर छात्राओं ने बनाए पोस्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलायत में जल संरक्षण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्राओं द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका के माध्यम से जल के महत्व और उसके संरक्षण का संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी तथा स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामगोपाल शर्मा ने की। लघु नाटिका के माध्यम से बच्चों को घरों में जल के अत्यधिक और अनावश्यक उपयोग से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति सचेत किया गया। साथ ही आम जनमानस को भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल संरक्षण के राष्ट्रीय अभियान सप्ताह 2025-26 के बारे में जानकारी देते हुए इसमें सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।
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डॉ. रामगोपाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की इस मुहिम को जन-जन से जोड़कर इसे एक अंतरराष्ट्रीय मिशन का रूप देना समय की आवश्यकता है।
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इस अवसर पर प्रवक्ता गुरनाम सिंह ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि पृथ्वी पर सभी जीवों के लिए जल एक बहुमूल्य संपदा है। जल के बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व जल और जंगल पर निर्भर करता है। ये दोनों ही हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के आधार स्तंभ हैं। जल को जीवन और जंगल को धरती के फेफड़े कहा जाता है। सदियों से ये हमें जीवन प्रदान कर रहे हैं, लेकिन मानव की लापरवाही और स्वार्थ के कारण आज दोनों ही गंभीर संकट में हैं।

उन्होंने जल बचाव के व्यावहारिक उपायों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हाथ धोने या फल-सब्जियां साफ करने के लिए नल के बहते पानी के बजाय बर्तन में पानी का प्रयोग करना चाहिए तथा पशुओं को नहलाने के लिए जोहड़ या अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग किया जाना चाहिए।


कार्यक्रम के अंत में एक बार फिर स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर प्राध्यापक प्रदीप कुमार, विश्व प्रताप सिंह राणा, बृजपाल सिंह, श्रीमती प्रतिभा सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
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