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एनआरआई के गांव प्रेमपुरा में जबरदस्त आमने-सामने की टक्कर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2022 01:48 AM IST
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A fierce face-to-face collision in NRI's village Prempura
कैथल। प्रेमपुरा जिले का ऐसा गांव है, जिसके हर घर से कम से कम एक या इससे अधिक सदस्य दुनिया के विभिन्न देशों में रोजगार व पढ़ाई के लिए गए हुए हैं। 31 साल साल पहले गांव कवारतन से अलग होकर यह अलग पंचायत अस्तित्व में आई थी। तब से आज तक यहां केवल दो बार चुनाव हुआ है और चार बार सर्वसम्मति सरपंच चुन लिया गया लेकिन अबकी कांटे की टक्कर इतनी जबरदस्त है कि प्रेमपुरा व रामपुरा सहित एक डेरे में बंटी इस पंचायत में लगभग हर घर की दीवार पर चुनाव के संबंध में पोस्टर चस्पा है। लोगों का कहना है कि आदमपुर के विधानसभा चुनाव को भी इस गांव के पोस्टरवार ने पीछे छोड़ दिया है।
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एनआरआई के गांव कहे जाने वाले प्रेमपुरा में प्रवेश करते ही बड़े-बड़े पोस्टर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। जैसे-जैसे रामपुरा गांव में आगे बढ़ते हैं, हर घर की दीवार, छतों पर बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर लगे हुए हैं। यहां पूछने पर बुजुर्गों ने बताया कि इस गांव में काफी लोग विदेशों में गए हुए हैं। दोनों ही उम्मीदवार सक्षम हैं और मतदाताओं से वोट की अपील कर रहे हैं। यहां एक उम्मीदवार का कार्यालय भी था। इसके बाद आगे करीब एक किलोमीटर की दूरी पर गांव प्रेमपुरा है। जहां गांव से पहले ही बड़े-बड़े पोस्टर व बैनर चुनावी माहौल की गर्मी ब्यां कर रहे हैं। यहां आलीशान कोठियां इस बात की गवाह हैं कि यह गांव संपन्नता में किसी बड़े विकसित शहर का भी मुंह चिढ़ा दे। कोठियों के अंदर पार्क से लेकर हर तरह की सुख सुविधा नजर आती है।
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यहां एक जगह बैठे गांव के पांच से छह बुजुर्ग एक उम्मीदवार के समर्थक थे। यहां बैठे पूर्व सरपंच बलजिंद्र सिंह मुलतानी ने बताया कि इस गांव की पंचायत का गठन 1991 में हुआ था। उस समय सर्वसम्मति हुई। इसके बाद 1994 में चुनाव हुआ। फिर 1999 में सर्वसम्मति हुई। अब तक कुल चार बार सर्वसम्मति हो चुकी हैे लेकिन इस बार चुनाव से सरपंच का फैसला होगा। गांव से अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, स्पेन, बेल्जियम, इटली, दुबई सहित अनेक देशों को लोग गए हुए हैं। अब चुनाव के समय 100 से अधिक लोग वोट डालने के लिए गांव में आ चुके हैं। इतने ही आजकल में पहुंच जाएंगे। ये युवा भी यहां आकर अपने-अपने पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में वोट की अपील कर रहे हैं। गांव में किसी तरह की कोई कमी नहीं है। हर व्यक्ति सक्षम है और इसीलिए बिना किसी गोलबंदी के वोट डालने को लेकर स्वतंत्र है। इसी कारण वोटों के लिए आपसी प्रतिद्वंद्वता के साथ प्रयास किया जा रहा है।
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12 साल में एक भी एफआईआर नहीं
पूरे गांव में भाईचारा इतना है कि पिछले 12 साल से वे या उनके परिवार से सरपंच रहे हैं। एक भी एफआईआर गांव से कोर्ट तक नहीं पहुंचीं। दो शिकायतें थाने तक जरूर पहुंचीं, लेकिन उनमें भी आपसी समझौता हो चुका है। पूरा गांव अमन व चैन के साथ रहता है।
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