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Kaithal News: 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण
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पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए आयोजित बैठक में निर्देश देतीं डीसी अपराजिता।
- फोटो : वारदात के समय जेब में कारतूस भरकर लाया था आरोपी अभिषेक
कैथल। जिले में सोमवार को राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्य को गति देने के लिए लघु सचिवालय स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंस हॉल में बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त अपराजिता ने बैठक में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे सर्वेक्षण कार्य की समीक्षा की। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत जिले के धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में आमजन के पास उपलब्ध 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों और अभिलेखीय दस्तावेजों की पहचान की जाएगी। इसके बाद उनका दस्तावेजीकरण कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यह समस्त डाटा ज्ञान भारतम् मिशन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा जिससे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके।
इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने भी प्रदेशभर के उपायुक्तों से कार्य की प्रगति के बारे में फीडबैक लिया। डीसी ने बताया कि जिले में इस कार्य के लिए जिला स्तरीय समिति गठित की गई है। इसके नोडल अधिकारी एडीसी सुशील कुमार बनाए गए हैं। वहीं सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों में नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए पांडुलिपियों का भौतिक सत्यापन, मैपिंग और डाटा संग्रहण सुनिश्चित करेंगे। बैठक में बताया गया कि अब तक जिले में 387 पांडुलिपियां पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी हैं। साथ ही हर घर दस्तक अभियान के माध्यम से आमजन को जागरूक करने और अभिलेख दान अभियान के जरिये लोगों को स्वेच्छा से जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
नागरिक स्वयं भी ज्ञान भारतम् एप के माध्यम से पांडुलिपियों की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करने में सक्षम नहीं है तो वह संबंधित ग्राम सचिव के माध्यम से भी जानकारी उपलब्ध करा सकता है।
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डीसी अपराजिता ने कहा कि राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना, डिजिटाइज करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि 10 जून तक इस कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों के पास पांडुलिपियां या अभिलेख हैं, वे उन्हीं के पास सुरक्षित रहेंगे, सरकार केवल उनका रिकॉर्ड तैयार कर संरक्षण में सहयोग करेगी।
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इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने भी प्रदेशभर के उपायुक्तों से कार्य की प्रगति के बारे में फीडबैक लिया। डीसी ने बताया कि जिले में इस कार्य के लिए जिला स्तरीय समिति गठित की गई है। इसके नोडल अधिकारी एडीसी सुशील कुमार बनाए गए हैं। वहीं सभी एसडीएम अपने-अपने क्षेत्रों में नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए पांडुलिपियों का भौतिक सत्यापन, मैपिंग और डाटा संग्रहण सुनिश्चित करेंगे। बैठक में बताया गया कि अब तक जिले में 387 पांडुलिपियां पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी हैं। साथ ही हर घर दस्तक अभियान के माध्यम से आमजन को जागरूक करने और अभिलेख दान अभियान के जरिये लोगों को स्वेच्छा से जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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नागरिक स्वयं भी ज्ञान भारतम् एप के माध्यम से पांडुलिपियों की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करने में सक्षम नहीं है तो वह संबंधित ग्राम सचिव के माध्यम से भी जानकारी उपलब्ध करा सकता है।
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डीसी अपराजिता ने कहा कि राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखना, डिजिटाइज करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि 10 जून तक इस कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा करना सभी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों के पास पांडुलिपियां या अभिलेख हैं, वे उन्हीं के पास सुरक्षित रहेंगे, सरकार केवल उनका रिकॉर्ड तैयार कर संरक्षण में सहयोग करेगी।