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Kaithal News: सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के 72 पद खाली, चार में प्राचार्य ही नहीं
Sun, 28 Dec 2025 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 28 Dec 2025 12:15 AM IST
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कपिल तंवर
कैथल। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए जहां अनुभवी और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की आवश्यकता होती है, वहीं जिले के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी देखने को मिल रही है। जिले के सरकारी कॉलेजों में 175 स्वीकृत पदों में से 72 शिक्षक पद लगभग पांच सालों से खाली पड़े हैं। सात कॉलेजों में से चार बिना प्राचार्य के चल रहे हैं। कुल मिलाकर शिक्षकों की कमी का सीधा असर कॉलेजों में पढ़ाई पर पड़ रहा है और विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।
जिले के जिन कॉलेजों में प्राचार्य नहीं हैं, इनमें अन्य कॉलेजों के प्राचार्यों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। जबकि जिले में प्राचार्य के कुल सात पद स्वीकृत हैं। राजकीय कॉलेज कलायत, धनौरी, सेरधा और राजौंद में प्राचार्य के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
जिले के उच्चतर शिक्षा अधिकारी डॉ. मनोज भांभू स्वयं डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज कैथल के साथ-साथ राजकीय कॉलेज धनौरी में भी प्राचार्य का प्रभार संभाल रहे हैं। वहीं कलायत और सेरधा के कॉलेजों में अंग्रेजी विषय के
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प्रोफेसरों को प्राचार्य का अतिरिक्त जिम्मा सौंपा गया है। एक-एक प्राचार्य द्वारा दो-दो कॉलेजों का प्रभार संभालने के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होना स्वाभाविक है। संवाद
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राजकीय कॉलेज कलायत
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राजकीय कॉलेज धनौरी
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राजकीय कॉलेज सेरधा
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राजकीय कॉलेज राजौंद
डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज कैथल में बीए की कक्षाएं तो शुरू कर दी गई हैं, लेकिन विडंबना यह है कि कॉलेज में संबंधित विषयों के शिक्षक ही पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। कॉलेज में हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस, अंग्रेजी और फिजिकल एजुकेशन जैसे विषयों के शिक्षकों का अभाव बना हुआ है।
डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज में कुल 62 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल करीब 46 पद ही भरे हुए हैं। राजौंद के राजकीय कॉलेज में शिक्षक का एक पद रिक्त है।
कलायत में 15 पद खाली ः कलायत के राजकीय कॉलेज में लगभग 24 स्वीकृत पदों में से 15 पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि कलायत कॉलेज में अंग्रेजी विषय का एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि हिंदी, हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस के लिए भी केवल एक-एक शिक्षक ही कार्यरत हैं। सेरधा और धनौरी के कॉलेजों में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। यहां राजकीय कॉलेज कैथल और कलायत के शिक्षकों के सहारे ही कक्षाएं लगवाई जा रही हैं। इसी तरह चक्कू लदाना के राजकीय कॉलेज में भी अस्थायी व्यवस्था के सहारे पढ़ाई करवाई जा रही है। शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षकों के अभाव में कई विषयों की पूरे सप्ताह एक भी कक्षा नहीं लग पाती। परीक्षा के समय सिलेबस अधूरा रह जाता है और छात्रों को स्वयं पढ़ाई करनी पड़ती है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति और भी कठिन है, क्योंकि वे कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर सकते।
लगभग चार साल से खाली हैं पद
जिले के राजकीय कॉलेजों में लगभग चार साल से ये पद खाली पड़े हैं। दूसरी ओर सेरधा में राजकीय कॉलेज इसी वर्ष शुरू तो हो गया है लेकिन यहां पर एक भी शिक्षक नहीं है। डॉ. भीमराव आंबेडकर और राजकीय कॉलेज कलायत के शिक्षकों के सहारे यहां की शिक्षा व्यवस्था चल रही है।
103 शिक्षक संभाल रहे लगभग 3500 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का जिम्मा
जिले के 7 अलग-अलग राजकीय कॉलेजों में पढ़ रहे लगभग 3500 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का जिम्मा 103 शिक्षकों पर है। शिक्षकों की कमी के चलते कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कभी-कभी तो एक ही शिक्षक को अन्य कॉलेजों में कक्षाएं लेकर आनी होती है, इससे न केवल शिक्षक को परेशानी होती है बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका पूरा-पूरा असर पड़ता है।
राजकीय कॉलेजों में कुल सीटें और कोर्स
कॉलेज
कुल कोर्स ॅएंट्री सीटें
डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज, कैथल
10
620
राजकीय कॉलेज, चक्कू लदाना
01
60
राजकीय कॉलेज, राजौंद
01
60
राजकीय कन्या कॉलेज, चीका
06
460
राजकीय कन्या कॉलेज, कलायत 03
430
राजकीय कन्या कॉलेज, सेरध 02
240
राजकीय कन्या कॉलेज, धनौरी
01
160
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कैथल। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए जहां अनुभवी और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की आवश्यकता होती है, वहीं जिले के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी देखने को मिल रही है। जिले के सरकारी कॉलेजों में 175 स्वीकृत पदों में से 72 शिक्षक पद लगभग पांच सालों से खाली पड़े हैं। सात कॉलेजों में से चार बिना प्राचार्य के चल रहे हैं। कुल मिलाकर शिक्षकों की कमी का सीधा असर कॉलेजों में पढ़ाई पर पड़ रहा है और विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।
जिले के जिन कॉलेजों में प्राचार्य नहीं हैं, इनमें अन्य कॉलेजों के प्राचार्यों को अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। जबकि जिले में प्राचार्य के कुल सात पद स्वीकृत हैं। राजकीय कॉलेज कलायत, धनौरी, सेरधा और राजौंद में प्राचार्य के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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जिले के उच्चतर शिक्षा अधिकारी डॉ. मनोज भांभू स्वयं डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज कैथल के साथ-साथ राजकीय कॉलेज धनौरी में भी प्राचार्य का प्रभार संभाल रहे हैं। वहीं कलायत और सेरधा के कॉलेजों में अंग्रेजी विषय के
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प्रोफेसरों को प्राचार्य का अतिरिक्त जिम्मा सौंपा गया है। एक-एक प्राचार्य द्वारा दो-दो कॉलेजों का प्रभार संभालने के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होना स्वाभाविक है। संवाद
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राजकीय कॉलेज कलायत
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राजकीय कॉलेज धनौरी
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राजकीय कॉलेज सेरधा
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राजकीय कॉलेज राजौंद
डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज कैथल में बीए की कक्षाएं तो शुरू कर दी गई हैं, लेकिन विडंबना यह है कि कॉलेज में संबंधित विषयों के शिक्षक ही पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। कॉलेज में हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस, अंग्रेजी और फिजिकल एजुकेशन जैसे विषयों के शिक्षकों का अभाव बना हुआ है।
डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज में कुल 62 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल करीब 46 पद ही भरे हुए हैं। राजौंद के राजकीय कॉलेज में शिक्षक का एक पद रिक्त है।
कलायत में 15 पद खाली ः कलायत के राजकीय कॉलेज में लगभग 24 स्वीकृत पदों में से 15 पद खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि कलायत कॉलेज में अंग्रेजी विषय का एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि हिंदी, हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस के लिए भी केवल एक-एक शिक्षक ही कार्यरत हैं। सेरधा और धनौरी के कॉलेजों में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। यहां राजकीय कॉलेज कैथल और कलायत के शिक्षकों के सहारे ही कक्षाएं लगवाई जा रही हैं। इसी तरह चक्कू लदाना के राजकीय कॉलेज में भी अस्थायी व्यवस्था के सहारे पढ़ाई करवाई जा रही है। शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षकों के अभाव में कई विषयों की पूरे सप्ताह एक भी कक्षा नहीं लग पाती। परीक्षा के समय सिलेबस अधूरा रह जाता है और छात्रों को स्वयं पढ़ाई करनी पड़ती है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति और भी कठिन है, क्योंकि वे कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर सकते।
लगभग चार साल से खाली हैं पद
जिले के राजकीय कॉलेजों में लगभग चार साल से ये पद खाली पड़े हैं। दूसरी ओर सेरधा में राजकीय कॉलेज इसी वर्ष शुरू तो हो गया है लेकिन यहां पर एक भी शिक्षक नहीं है। डॉ. भीमराव आंबेडकर और राजकीय कॉलेज कलायत के शिक्षकों के सहारे यहां की शिक्षा व्यवस्था चल रही है।
103 शिक्षक संभाल रहे लगभग 3500 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का जिम्मा
जिले के 7 अलग-अलग राजकीय कॉलेजों में पढ़ रहे लगभग 3500 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का जिम्मा 103 शिक्षकों पर है। शिक्षकों की कमी के चलते कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कभी-कभी तो एक ही शिक्षक को अन्य कॉलेजों में कक्षाएं लेकर आनी होती है, इससे न केवल शिक्षक को परेशानी होती है बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका पूरा-पूरा असर पड़ता है।
राजकीय कॉलेजों में कुल सीटें और कोर्स
कॉलेज
कुल कोर्स ॅएंट्री सीटें
डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज, कैथल
10
620
राजकीय कॉलेज, चक्कू लदाना
01
60
राजकीय कॉलेज, राजौंद
01
60
राजकीय कन्या कॉलेज, चीका
06
460
राजकीय कन्या कॉलेज, कलायत 03
430
राजकीय कन्या कॉलेज, सेरध 02
240
राजकीय कन्या कॉलेज, धनौरी
01
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