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राज्यस्तरीय मिलर्स के लिए महत्वपूर्ण समाचार

Rohtak Bureau Updated Wed, 12 Sep 2018 12:02 AM IST
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सीएम से करेंगे मिलर्स की समस्याओं के समाधान की मांग : छाबड़ा
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हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन की बैठक
- कहा- भाजपा शासित राज्यों में मिलिंग चार्जेज 70 रुपये प्रति क्विंटल तो हरियाणा में महज 10 रुपये क्यों
फोटो संख्या-41
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के नवनियुक्त प्रधान अमरजीत छाबड़ा की अगुवाई में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि हरियाणा के मिलर्स की समस्याओं को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलेगा। जिसमें प्रदेश के मिलर्स की समस्या के समाधान की मांग की जाएगी। सरकार ने यदि मिलर्स की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया तो मिलर्स इस बार कस्टम मिलिंग करने में असमर्थ होंगे।
अंबाला रोड स्थित होटल ग्रेस में नवनियुक्त राज्य प्रधान ने कहा कि हरियाणा के मिलर्स के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। जबकि भाजपा शासित राज्यों में ही अनेकों ऐसे राज्य हैं, जहां मिलर्स को काफी सुविधाएं प्राप्त हैं। कई दशकों से चल रही मिलर्स की समस्याओं के लिए सरकार व पुरानी मिलर्स एसोसिएशन जिम्मेवार रही हैं। वे पूरे प्रदेश से मिलर्स की एक मजबूत टीम बनाकर सरकार से मिलर्स की समस्याओं के लिए संघर्ष कर उनका समाधान करवाएंगे। उनके साथ प्रो. राजकुमार, सचिन मित्तल, प्रवेश कुमार, अमरजीत चीका, महावीर चीका, राजेश कुमार चीका, नवीन मिगलानी, महावीर सिंह, रमेश ढांड एसोसिएशन प्रधान, राजेंद्र कुमार, गुलाब सिंह ढांड, बलकार सिंह, तरसेम गोयल, ओमप्रकाश, राजीव सिंगला पिहोवा सहित काफी संख्या में मिलर्स मौजूद रहे।

इन मुद्दों को रखा जाएगा मुख्यमंत्री के सामने :
1. धान की सरकारी खरीद में स्टोरेज प्वाइंट मंडी बनाया गया है। जबकि यह उनका मिल होना चाहिए। मंडी से मिल तक लोडिंग-अनलोडिंग के लिए मिलर्स को खुद खर्च करना पड़ता है। सरकार इस खर्च को वहन करे।
2. कस्टम मिलिंग व मेंटेनेंस चार्जेज नहीं दिया जाता। जबकि मिलों में रखी धान पर सरकार का संयुक्त कब्जा रहता है। सरकार इस खर्च को वहन करे।
3. मिलर्स से एक क्विंटल धान के मुकाबले 40 से 50 साल पुरानी नीति के अनुसार 67 किलो चावल लिया जाता है। जबकि उस समय धान हाथ से कटाई के बाद सूखा होता था। अब अधिकतर कंबाइन से कटाई होती है तो वह नमीयुक्त रहता है। इसमें चावल कम निकलता है। इसलिए मिलर्स से एक क्विंटल धान के लिए 62 किलो चावल लिया जाए।
4. कई राज्यों में मिलिंग चार्जेज 70 रुपये तक सरकार देती है। जबकि मिलर्स का एक क्विंटल पर करीब 120 रुपये खर्च आता है। इसमें भी हरियाणा में मिलर्स को प्रति क्विंटल महज 10 रुपये मिलिंग चार्जेज दिया जाता है। जो कम से कम 100 रुपये होना चाहिए।
5. चावल जमा करवाते समय एफसीआई के कर्मचारी की मनमानी रोकने के लिए टेक्नीकल लैब लगाई जाए। जिसमें जांच होने के बाद चावल जमा करवाने में आसानी होगी।
6. बारदाने की सुविधा पंजाब की तर्ज पर दी जाए।
7. दिसंबर व जनवरी माह में ठंड के कारण धान सूखाने में दिक्कत होती है। इसलिए 31 मार्च की बजाए बिना होल्डिंग चार्ज के 30 जून तक की छूट दी जाए।
8. पॉलिस, टुकड़ा, डैमेज की नीतियों में भी समय की मांग अनुसार बदलाव किया जाए।
9. बिजली के 170 रुपये प्रति किलोवाट के फिक्स चार्ज पूरी तरह से खत्म होने चाहिए।
10. एमपी, राजस्थान, नरेला (दिल्ली) सहित कई राज्यों की तर्ज पर मार्केट फीस पूरी तरह से खत्म की जाए।
11. चावल व धान की तर्ज पर मिल में प्रयोग होने वाले उपकरणों को भी जीएसटी से छूट दी जाए।
12. कई सालों से चावल में नमी की मात्रा के लिए लगाए जा रहे कट व इतनी ही मात्रा में अतिरिक्त चावल लेने की परंपरा बंद हो। दोनों में से एक नियम लागू हो।

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