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रामगढ़ पांडवा की बेटी बनी प्रदेश की एकमात्र कृषि वैज्ञानिक
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:29 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। गांव रामगढ़ पांडवा के छोटे से किसान की बेटी अब देश के किसान को अधिक उपज देने वाली फसलों की किस्में तैयार करके देगी। रामगढ़ पांडवा के एक छोटे से किसान व पूर्व सैनिक ओमप्रकाश सहारण की बेटी रीना ने सभी मिथक तोड़ते हुए बुलंदी को छुआ है। रीना सहारण हरियाणा से अकेली कैंडिडेट हैं जो देश की एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस की पात्रता परीक्षा पास कर कृषि सहायक वैज्ञानिक चुनी गई हैं। उनके सिलेक्शन पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है।
रीना सहारण ने अपनी पढ़ाई का सफर कलायत के एमडीएन स्कूल से गोल्ड मेडल के साथ शुरू किया। बारहवीं कक्षा में मेडिकल संकाय की छात्रा ने प्रथम स्थान हासिल किया। बीएससी एग्रीकल्चर गोल्ड मेडल के साथ पूरी की तथा अनुवांशिक एवं पौध प्रजनन में एमएससी में भी उन्होंने गोल्ड हासिल किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई का सफर जारी रखते हुए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में ही पीएचडी में एडमिशन लिया और 25 हजार रुपये मास की छात्रवृत्ति हासिल की। रीना सहारण ने बताया कि उनके दादा फूल सिंह सहारण हमेशा उनके आदर्श रहे, जिनकी प्रेरणा से वे इस मुकाम पर पहुंची हैं। उनके दादा छोटे से किसान थे। उनका सपना था कि रीना बहुत बड़ी कृषि वैज्ञानिक बने। उनके पिता ने भी हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और मुकाम हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
रामगढ़ पांडवा की बेटी बनी प्रदेश की एकमात्र कृषि वैज्ञानिक
-एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस की पात्रता परीक्षा पास कर कृषि सहायक वैज्ञानिक चुनी गई
फोटो नंबर-45
कलायत। गांव रामगढ़ पांडवा के छोटे से किसान की बेटी अब देश के किसान को अधिक उपज देने वाली फसलों की किस्में तैयार करके देगी। रामगढ़ पांडवा के एक छोटे से किसान व पूर्व सैनिक ओमप्रकाश सहारण की बेटी रीना ने सभी मिथक तोड़ते हुए बुलंदी को छुआ है। रीना सहारण हरियाणा से अकेली कैंडिडेट हैं जो देश की एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस की पात्रता परीक्षा पास कर कृषि सहायक वैज्ञानिक चुनी गई हैं। उनके सिलेक्शन पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है।
रीना सहारण ने अपनी पढ़ाई का सफर कलायत के एमडीएन स्कूल से गोल्ड मेडल के साथ शुरू किया। बारहवीं कक्षा में मेडिकल संकाय की छात्रा ने प्रथम स्थान हासिल किया। बीएससी एग्रीकल्चर गोल्ड मेडल के साथ पूरी की तथा अनुवांशिक एवं पौध प्रजनन में एमएससी में भी उन्होंने गोल्ड हासिल किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई का सफर जारी रखते हुए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में ही पीएचडी में एडमिशन लिया और 25 हजार रुपये मास की छात्रवृत्ति हासिल की। रीना सहारण ने बताया कि उनके दादा फूल सिंह सहारण हमेशा उनके आदर्श रहे, जिनकी प्रेरणा से वे इस मुकाम पर पहुंची हैं। उनके दादा छोटे से किसान थे। उनका सपना था कि रीना बहुत बड़ी कृषि वैज्ञानिक बने। उनके पिता ने भी हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और मुकाम हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
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रामगढ़ पांडवा की बेटी बनी प्रदेश की एकमात्र कृषि वैज्ञानिक
-एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस की पात्रता परीक्षा पास कर कृषि सहायक वैज्ञानिक चुनी गई
फोटो नंबर-45