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Kaithal News: राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह समझौते से निपटे 6111 केस
Sun, 14 Dec 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 14 Dec 2025 01:19 AM IST
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लोक अदालत में समाधान करवाने के लिए आए हुए लोग।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कैथल के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पराशर की देखरेख में शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कुल 11,618 मामलों को सूचीबद्ध किया गया, जिनमें से 6,111 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से कुल 10,99,87,254 रुपये की राशि से संबंधित विभिन्न आपराधिक, एनआई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम विवाद, राजस्व व अन्य मामलों का निपटारा किया गया। इसके अलावा दो लाख रुपये के एक चेक बाउंस मामला भी आया। यह बलिंदर और परमजीत के बीच वर्ष 2015 का मामला था। परमजीत को बलिंदर के दो लाख रुपये देने थे। सुलह-समझौते के अनुसार परमजीत ने रुपये देने के लिए हामी भर ली। इस प्रकार दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर राजीनामा करवाया गया। इस मामले का निपटारा सत्र न्यायाधीश मोहित अग्रवाल ने किया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने बताया कि लोक अदालत वह मंच है, जहां विवादों का निपटारा पक्षकारों की आपसी सहमति से किया जाता है। इसमें न किसी की जीत होती है और न हार, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्द और आपसी समझ का वातावरण बनता है।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालत को सस्ते और त्वरित न्याय का सशक्त माध्यम माना जाता है, इसलिए इसे ‘जनता की अदालत’ भी कहा जाता है। लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार का न्यायालय शुल्क नहीं लिया जाता और यदि पहले से शुल्क जमा कराया गया हो तो निपटारे के बाद उसे वापस भी कर दिया जाता है।
इस अवसर पर विभिन्न बेंचों का गठन किया गया, जिनमें मोहित अग्रवाल (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश), देवेंद्र सिंह (प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय), विरेन कादयान (अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश, सीनियर डिवीजन), संदीप कौर (सिविल न्यायाधीश, जूनियर डिवीजन), प्रिंस कुमार (सिविल न्यायाधीश, जूनियर डिवीजन, कैथल) तथा अक्षय कुमार (अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश, सीनियर डिवीजन, गुहला) शामिल रहे।
मेरा हजारों रुपये का बिजली बिल आया है। मोबाइल पर संदेश मिला था कि बिजली बिल माफी के लिए शिविर लगा है, इसी उम्मीद में वे कैथल पहुंच गईं, लेकिन यहां आकर पता चला कि संदेश फर्जी था। -कृष्णा देवी, पाई
सोशल मीडिया पर वायरल संदेश देखने के बाद बिजली का बिल माफ करवाने की उम्मीद में सचिवालय पहुंचे, लेकिन अफसरों ने साफ कर दिया कि बिजली बिल माफ नहीं किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। -कृष्ण कुमार, कैथल
बिजली बिल माफी की अफवाह से उमड़ी भीड़
कैथल। सोशल मीडिया के माध्यम से शनिवार को अफवाह फैल गई कि लोक अदालत में बिजली के बकाया बिल माफ किए जाएंगे। सुबह से ही बिजली बिल माफी की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग, खासकर महिलाएं, न्यायिक परिसर और लघु सचिवालय परिसर में पहुंच गए। लोग बिल माफी से संबंधित जानकारी के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि लोक अदालत का आयोजन बिजली बिल माफी के लिए नहीं, बल्कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया गया था।
भीड़ अधिक होने पर अदालत के मुख्य गेट पर पुलिस कर्मचारियों ने जानकारी एकत्रित कर नियंत्रित तरीके से लोगों को प्रवेश दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से बिजली बिल माफी को लेकर कोई आदेश या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
इसके बाद बिजली बिल माफी की आस में आए लोग निराश होकर लौट गए। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि केवल सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें तथा सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रामक संदेशों पर भरोसा न करें। संवाद
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कैथल। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कैथल के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पराशर की देखरेख में शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कुल 11,618 मामलों को सूचीबद्ध किया गया, जिनमें से 6,111 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से कुल 10,99,87,254 रुपये की राशि से संबंधित विभिन्न आपराधिक, एनआई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम विवाद, राजस्व व अन्य मामलों का निपटारा किया गया। इसके अलावा दो लाख रुपये के एक चेक बाउंस मामला भी आया। यह बलिंदर और परमजीत के बीच वर्ष 2015 का मामला था। परमजीत को बलिंदर के दो लाख रुपये देने थे। सुलह-समझौते के अनुसार परमजीत ने रुपये देने के लिए हामी भर ली। इस प्रकार दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर राजीनामा करवाया गया। इस मामले का निपटारा सत्र न्यायाधीश मोहित अग्रवाल ने किया।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने बताया कि लोक अदालत वह मंच है, जहां विवादों का निपटारा पक्षकारों की आपसी सहमति से किया जाता है। इसमें न किसी की जीत होती है और न हार, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सौहार्द और आपसी समझ का वातावरण बनता है।
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उन्होंने कहा कि लोक अदालत को सस्ते और त्वरित न्याय का सशक्त माध्यम माना जाता है, इसलिए इसे ‘जनता की अदालत’ भी कहा जाता है। लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार का न्यायालय शुल्क नहीं लिया जाता और यदि पहले से शुल्क जमा कराया गया हो तो निपटारे के बाद उसे वापस भी कर दिया जाता है।
इस अवसर पर विभिन्न बेंचों का गठन किया गया, जिनमें मोहित अग्रवाल (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश), देवेंद्र सिंह (प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय), विरेन कादयान (अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश, सीनियर डिवीजन), संदीप कौर (सिविल न्यायाधीश, जूनियर डिवीजन), प्रिंस कुमार (सिविल न्यायाधीश, जूनियर डिवीजन, कैथल) तथा अक्षय कुमार (अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश, सीनियर डिवीजन, गुहला) शामिल रहे।
मेरा हजारों रुपये का बिजली बिल आया है। मोबाइल पर संदेश मिला था कि बिजली बिल माफी के लिए शिविर लगा है, इसी उम्मीद में वे कैथल पहुंच गईं, लेकिन यहां आकर पता चला कि संदेश फर्जी था। -कृष्णा देवी, पाई
सोशल मीडिया पर वायरल संदेश देखने के बाद बिजली का बिल माफ करवाने की उम्मीद में सचिवालय पहुंचे, लेकिन अफसरों ने साफ कर दिया कि बिजली बिल माफ नहीं किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। -कृष्ण कुमार, कैथल
बिजली बिल माफी की अफवाह से उमड़ी भीड़
कैथल। सोशल मीडिया के माध्यम से शनिवार को अफवाह फैल गई कि लोक अदालत में बिजली के बकाया बिल माफ किए जाएंगे। सुबह से ही बिजली बिल माफी की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग, खासकर महिलाएं, न्यायिक परिसर और लघु सचिवालय परिसर में पहुंच गए। लोग बिल माफी से संबंधित जानकारी के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि लोक अदालत का आयोजन बिजली बिल माफी के लिए नहीं, बल्कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया गया था।
भीड़ अधिक होने पर अदालत के मुख्य गेट पर पुलिस कर्मचारियों ने जानकारी एकत्रित कर नियंत्रित तरीके से लोगों को प्रवेश दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से बिजली बिल माफी को लेकर कोई आदेश या दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
इसके बाद बिजली बिल माफी की आस में आए लोग निराश होकर लौट गए। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि केवल सरकारी और आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें तथा सोशल मीडिया पर फैल रहे भ्रामक संदेशों पर भरोसा न करें। संवाद

लोक अदालत में समाधान करवाने के लिए आए हुए लोग।