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डिपो में 128 बसों थमे रहे पहिए, गतव्य पर जाने के लिए भटकते रहे यात्री
Updated Tue, 07 Aug 2018 11:58 PM IST
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128 बसों के थमे पहिये, रोडवेज को 15 लाख का फटका, भटकते रहे यात्री
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश सरकार द्वारा 700 बसें किराये पर चलाने व मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 के विरोध में मंगलवार को रोडवेज का चक्का जाम रहा। चक्का जाम होने के कारण यात्री अपने गंतव्य पर जाने के लिए दर दर भटकतें रहे। कैथल डिपो में 128 बसें रूटों पर दौड़ती हैं, जो मंगलवार को बंद रहीं। इससे कैथल डिपो में करीब 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं लगभग 30 हजार यात्रियों का आना-जाना प्रभावित रहा।
हरियाणा रोडवेज संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर की गई हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने मंगलवार सुबह बस स्टैंड पर नारेबाजी की। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार किराये पर बसें चलाकर जनविरोधी होने का सबूत दे रही है। सरकार शुरू से ही कह रही है कि जल्द ही प्रदेश में 600 नई बसें खरीदी जाएंगी। परंतु अब तक ये बसें नहीं खरीदी गई।
उधर, बसें बंद रहने से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। लोगों को प्राइवेट बसें चलने से कुछ राहत मिली। बसों की हड़ताल का ऑटो चालकों ने भी खूब फायदा उठाया। एक आटो में 10 से अधिक सवारियां ले जाई जा रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से बस स्टैंड पर काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
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यात्रियों को हुई परेशानी : शहर निवासी राजन ने बताया कि एक समारोह में शामिल होने के लिए उन्हें परिवार सहित दिल्ली जाना था। उन्हें मालूम नहीं था कि रोडवेज की हड़ताल है। दिल्ली के लिए कोई प्राइवेट साधन भी नहीं जाता है। उन्हें पता होता वे सुबह ही ट्रेन के माध्यम से दिल्ली चले जाते। लेकिन अब उन्हें हड़ताल के कारण घर वापस लौटना पड़ेगा।
बुजुर्ग तारा सिंह ने बताया कि उसे कौथली देने के लिए अपनी बहन के घर सिरसा जाना है। लेकिन यहां पर रोडवेज की हड़ताल है। हड़ताल होने के कारण काफी कठिनाई होगी। बुजुर्ग ने बताया कि कैथल तै तो रेलगाड़ी भी कौन्या जांदी। इब मैं तो घणा तंग हो लिया।
दिनभर धरने पर डटे रहे रोडवेज कर्मचारी : हड़ताल के दौरान हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले रोडवेज कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रोडवेज के समस्त कर्मचारियों ने मंगलवार को 128 बसों का चक्का जाम किया। जिसकी अध्यक्षता डिपो के प्रधान सुरेश मराठा व रामफल शिमला ने की। संचालन महाबीर ने किया। संयुक्त संघर्ष समिति के नेता इंद्र सिंह बधाना, सरबत सिंह पूनिया, वीरेंद्र सिंह धनखड़ व पहल सिंह तवर व जसबीर सिंह शमसेर सिंह सिसमोर ने संयुक्त बयान में बताया कि केंद्र सरकार नए मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करके सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र का निजीकरण करने का रास्ता साफ करना चाहती है। आम जनता से किफायती व सुरक्षित सरकारी परिवहन की सेवा छीनना चाहती है। इससे सरकारी परिवहन सेवा का क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा। वहीं इस बिल में वाहन चालकों पर सजा व दंड को बढ़ाकर कई गुणा कर दिया गया है। हरियाणा सरकार इस बिल के पास होने से पहले ही इस बिल के मसौदे को हरियाणा में लागू करने पर उतावली हो रही है। इसी उतावलेपन के तहत 700 बसों को ठेके पर लेने का फैसला किया गया है। जबकि हरियाणा की जनता, किसी भी गांव की पंचायत, कोई भी छात्र या छात्रा, कोई भी बेरोजगार युवक या कोई भी कर्मचारी प्राइवेट बसों की मांग नहीं कर रहे हैं। सभी प्रदेश वासियों द्वारा केवल सरकारी बसों की मांग की जा रही है।
यह है रोडवेज कर्मचारियों की मांगे-
- मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 को रद्द करवाना।
- सरकार द्वारा 700 बसें ठेके पर लेने का फैसला रद्द करना।
- हाई कोर्ट के फैसले से प्रभावित कर्मचारियों को राहत देने के लिए विधानसभा में कानून बनाया जाए।
- कच्चे कर्मचारियों को शीघ्र पक्का करना।
- 2016 में लगे चालक-परिचालकों को नियुक्ति तिथि से पक्का करना।
- पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाना।
- परिवहन के सरकारी सार्वजनिक क्षेत्र को वित्तिय सहायता देकर इस क्षेत्र को बचाया व बढ़ाया जाना।
- परिवहन बेड़े में 14000 नई सरकारी बसें शामिल करना।
यह रहे मौजूद : हड़ताल के दौरान जिला प्रधान सर्व कर्मचारी संघ जसबीर सिंह, कर्मचारी महासंघ के जिला सचिव बलवान कुडू, कृष्ण गुलियाणा, गुरदयाल सिंह, रामफल, बलकार, सतनाम सिंह, शमसेर सिंह मान, महाबीर, रणबीर बालू, बिरेन्द्र बालू, सतबीर बालू रघबीर, राजकुमार नेपेवाला, सत्यवान, जरनैल सिंह, अशोक शर्मा, अमित कुंडू, ओमपाल भाल, सतबीर गोयत, रामपाल शर्मा, शिव दत्त शर्मा सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। उधर, कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानीं गई तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है। बुधवार सुबह की मीटिंग में समाधान नहीं हुआ तो चक्का जाम जारी रहेगा।
- कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, प्रदेश सरकार द्वारा 700 बसें किराये पर चलाने व मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 का कर रहे थे विरोध
फोटो नंबर-1 से 7
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश सरकार द्वारा 700 बसें किराये पर चलाने व मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 के विरोध में मंगलवार को रोडवेज का चक्का जाम रहा। चक्का जाम होने के कारण यात्री अपने गंतव्य पर जाने के लिए दर दर भटकतें रहे। कैथल डिपो में 128 बसें रूटों पर दौड़ती हैं, जो मंगलवार को बंद रहीं। इससे कैथल डिपो में करीब 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं लगभग 30 हजार यात्रियों का आना-जाना प्रभावित रहा।
हरियाणा रोडवेज संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर की गई हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने मंगलवार सुबह बस स्टैंड पर नारेबाजी की। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार किराये पर बसें चलाकर जनविरोधी होने का सबूत दे रही है। सरकार शुरू से ही कह रही है कि जल्द ही प्रदेश में 600 नई बसें खरीदी जाएंगी। परंतु अब तक ये बसें नहीं खरीदी गई।
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उधर, बसें बंद रहने से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। लोगों को प्राइवेट बसें चलने से कुछ राहत मिली। बसों की हड़ताल का ऑटो चालकों ने भी खूब फायदा उठाया। एक आटो में 10 से अधिक सवारियां ले जाई जा रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से बस स्टैंड पर काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
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यात्रियों को हुई परेशानी : शहर निवासी राजन ने बताया कि एक समारोह में शामिल होने के लिए उन्हें परिवार सहित दिल्ली जाना था। उन्हें मालूम नहीं था कि रोडवेज की हड़ताल है। दिल्ली के लिए कोई प्राइवेट साधन भी नहीं जाता है। उन्हें पता होता वे सुबह ही ट्रेन के माध्यम से दिल्ली चले जाते। लेकिन अब उन्हें हड़ताल के कारण घर वापस लौटना पड़ेगा।
बुजुर्ग तारा सिंह ने बताया कि उसे कौथली देने के लिए अपनी बहन के घर सिरसा जाना है। लेकिन यहां पर रोडवेज की हड़ताल है। हड़ताल होने के कारण काफी कठिनाई होगी। बुजुर्ग ने बताया कि कैथल तै तो रेलगाड़ी भी कौन्या जांदी। इब मैं तो घणा तंग हो लिया।
दिनभर धरने पर डटे रहे रोडवेज कर्मचारी : हड़ताल के दौरान हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले रोडवेज कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रोडवेज के समस्त कर्मचारियों ने मंगलवार को 128 बसों का चक्का जाम किया। जिसकी अध्यक्षता डिपो के प्रधान सुरेश मराठा व रामफल शिमला ने की। संचालन महाबीर ने किया। संयुक्त संघर्ष समिति के नेता इंद्र सिंह बधाना, सरबत सिंह पूनिया, वीरेंद्र सिंह धनखड़ व पहल सिंह तवर व जसबीर सिंह शमसेर सिंह सिसमोर ने संयुक्त बयान में बताया कि केंद्र सरकार नए मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करके सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र का निजीकरण करने का रास्ता साफ करना चाहती है। आम जनता से किफायती व सुरक्षित सरकारी परिवहन की सेवा छीनना चाहती है। इससे सरकारी परिवहन सेवा का क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा। वहीं इस बिल में वाहन चालकों पर सजा व दंड को बढ़ाकर कई गुणा कर दिया गया है। हरियाणा सरकार इस बिल के पास होने से पहले ही इस बिल के मसौदे को हरियाणा में लागू करने पर उतावली हो रही है। इसी उतावलेपन के तहत 700 बसों को ठेके पर लेने का फैसला किया गया है। जबकि हरियाणा की जनता, किसी भी गांव की पंचायत, कोई भी छात्र या छात्रा, कोई भी बेरोजगार युवक या कोई भी कर्मचारी प्राइवेट बसों की मांग नहीं कर रहे हैं। सभी प्रदेश वासियों द्वारा केवल सरकारी बसों की मांग की जा रही है।
यह है रोडवेज कर्मचारियों की मांगे-
- मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 को रद्द करवाना।
- सरकार द्वारा 700 बसें ठेके पर लेने का फैसला रद्द करना।
- हाई कोर्ट के फैसले से प्रभावित कर्मचारियों को राहत देने के लिए विधानसभा में कानून बनाया जाए।
- कच्चे कर्मचारियों को शीघ्र पक्का करना।
- 2016 में लगे चालक-परिचालकों को नियुक्ति तिथि से पक्का करना।
- पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाना।
- परिवहन के सरकारी सार्वजनिक क्षेत्र को वित्तिय सहायता देकर इस क्षेत्र को बचाया व बढ़ाया जाना।
- परिवहन बेड़े में 14000 नई सरकारी बसें शामिल करना।
यह रहे मौजूद : हड़ताल के दौरान जिला प्रधान सर्व कर्मचारी संघ जसबीर सिंह, कर्मचारी महासंघ के जिला सचिव बलवान कुडू, कृष्ण गुलियाणा, गुरदयाल सिंह, रामफल, बलकार, सतनाम सिंह, शमसेर सिंह मान, महाबीर, रणबीर बालू, बिरेन्द्र बालू, सतबीर बालू रघबीर, राजकुमार नेपेवाला, सत्यवान, जरनैल सिंह, अशोक शर्मा, अमित कुंडू, ओमपाल भाल, सतबीर गोयत, रामपाल शर्मा, शिव दत्त शर्मा सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। उधर, कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानीं गई तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है। बुधवार सुबह की मीटिंग में समाधान नहीं हुआ तो चक्का जाम जारी रहेगा।
- कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, प्रदेश सरकार द्वारा 700 बसें किराये पर चलाने व मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 का कर रहे थे विरोध
फोटो नंबर-1 से 7