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हेलमेट साथ लेकर तो चलना मंजूर लेकिन पहनना नहीं
Updated Wed, 28 Feb 2018 12:29 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सड़क सुरक्षा के नियमों में हमें हेलमेट पहनने की शिक्षा दी जाती है। ताकि दुघर्टना होने पर हमारी जन बच सके। इस पर कुछ लोग जागरूक तो हो जाते हैं। लेकिन यह जागरूकता हेलमेट को डालने की नहीं बल्कि साथ लेकर चलने की होती है। यह केवल इसलिए किया जाता है कि अगर रास्ते में कही चालान काट रहे पुलिस कर्मचारी दिखे तो उनसे बचने के लिए हेलमेट पहन लें। पुलिस से बचने के बाद इसे तुरंत उतार दिया जाता है। जिससे हादसे में जान की हानि की संभावनाएं बनीं रहती हैं।
सुरक्षा के लिए हेलमेट जरूरी : प्रोफेसर ऋचा लांग्यान ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण करने वाले युवक व युवतियों को हेलमेट पहनना बोझ लगता है। जबकि उनकी सोच ऐसी न होकर हेलमेट को अपनी सुरक्षा समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ युवा हेलमेट साथ तो रखते हैं लेकिन वह हेलमेट को नहीं पहनते हैं। उन्हें ऐसा न कर अपनी सुरक्षा पर सोचना चाहिए।
हेलमेट दुर्घटना में संजीवनी : प्रोफेसर विनय सिंघल ने कहा कि हेलमेट पहनना ड्राइविंग के समय एक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए हमें इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह हमारे लिए दुर्घटना में संजीवनी तक साबित होता है।
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नियमों का उल्लंघन नहीं बर्दाश्त : यातायात पुलिस प्रभारी मनदीप सिंह ने कहा कि यदि कोई दो पहिया वाहन चालक ड्राइविंग के समय हाथ में हेलमेट लेकर चलता है तो उसका भी चालान किया जाता है। इस पर वह हेलमेट साथ में रखने की बात करता है उसकी बिल्कुल भी नहीं सुनी जाती। साथ ही चालकों को पुलिस द्वारा समय समय पर जागरूक किया जाता है।
हेलमेट साथ लेकर तो चलना मंजूर लेकिन पहनना नहीं
पुलिस को देखा तो चालान से बचने के लिए पहन लिया हेलमेट
हाइवे पर हेलमेट पहनने को समझते है बोझ
फोटो नंबर-34 से 37
कैथल। सड़क सुरक्षा के नियमों में हमें हेलमेट पहनने की शिक्षा दी जाती है। ताकि दुघर्टना होने पर हमारी जन बच सके। इस पर कुछ लोग जागरूक तो हो जाते हैं। लेकिन यह जागरूकता हेलमेट को डालने की नहीं बल्कि साथ लेकर चलने की होती है। यह केवल इसलिए किया जाता है कि अगर रास्ते में कही चालान काट रहे पुलिस कर्मचारी दिखे तो उनसे बचने के लिए हेलमेट पहन लें। पुलिस से बचने के बाद इसे तुरंत उतार दिया जाता है। जिससे हादसे में जान की हानि की संभावनाएं बनीं रहती हैं।
सुरक्षा के लिए हेलमेट जरूरी : प्रोफेसर ऋचा लांग्यान ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण करने वाले युवक व युवतियों को हेलमेट पहनना बोझ लगता है। जबकि उनकी सोच ऐसी न होकर हेलमेट को अपनी सुरक्षा समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ युवा हेलमेट साथ तो रखते हैं लेकिन वह हेलमेट को नहीं पहनते हैं। उन्हें ऐसा न कर अपनी सुरक्षा पर सोचना चाहिए।
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हेलमेट दुर्घटना में संजीवनी : प्रोफेसर विनय सिंघल ने कहा कि हेलमेट पहनना ड्राइविंग के समय एक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए हमें इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह हमारे लिए दुर्घटना में संजीवनी तक साबित होता है।
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नियमों का उल्लंघन नहीं बर्दाश्त : यातायात पुलिस प्रभारी मनदीप सिंह ने कहा कि यदि कोई दो पहिया वाहन चालक ड्राइविंग के समय हाथ में हेलमेट लेकर चलता है तो उसका भी चालान किया जाता है। इस पर वह हेलमेट साथ में रखने की बात करता है उसकी बिल्कुल भी नहीं सुनी जाती। साथ ही चालकों को पुलिस द्वारा समय समय पर जागरूक किया जाता है।
हेलमेट साथ लेकर तो चलना मंजूर लेकिन पहनना नहीं
पुलिस को देखा तो चालान से बचने के लिए पहन लिया हेलमेट
हाइवे पर हेलमेट पहनने को समझते है बोझ
फोटो नंबर-34 से 37