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नोटबंदी को साल बीता, 2000 रुपये के नोट के छुट्टे करवाने में छूटते हैं पसीने
Updated Thu, 09 Nov 2017 11:39 PM IST
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नोटबंदी को एक साल बीते, 2000 छुट्टे कराने में अब भी छूटते हैं पसीने
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नोटबंदी को एक साल हो गए हैं, मगर इसका असर अब भी है। लोगों का कहना है कि, एक हजार रुपये के नोट की बजाय दो हजार रुपये का नया नोट आने के बाद भी छोटे-मध्यम वर्ग के दुकानदारों की समस्या कम नहीं हुई। दुकानदारों का कहना है ग्राहक की ओर से कम रुपयों की वस्तु पर दो हजार रुपयों का नोट दिए जाने से काफी परेशानी होती है। छुट्टे न होने से कई बार ग्राहक सामान लिए बिना ही लौट जाते हैं।
छुट्टे की समस्या से दिक्कत:-बुक स्टोर के दुकानदार राजीव आहुजा ने बताया कि नोटबंदी के एक वर्ष के बाद भी उनके काम में सुधार नहीं हुआ है। एक वर्ष के बाद भी छुट्टे की समस्या के कारण दिक्कत है। एक ग्राहक यदि कुछ सौ रुपये की वस्तु खरीदता है और 2000 रुपये दे दे तो उसके लिए शेष राशि की व्यवस्था करना टेढ़ी खीर हो जाती है। दिन में ऐसे एक-दो ग्राहक और आ जाएं तो इतने छोटे नोट कहां से लाएं।
व्यवस्था बदलने में लगेगा समय, धैर्य की जरूरत:-जनरल स्टोर के दुकानदार आशु ने बताया कि नो बंदी के बाद से आम जनता को परेशानी एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कम नहीं हुई है। परेशानी को दूर होने में अभी थोड़ा समय और लगेगा। इसलिए जनता को धैर्य रखना चाहिए। व्यवस्था बदलने में अधिक समय लगता है।
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ऑनलाइन लेन देन पर सरचार्ज हो कम:-दुकानदार गोपाल ने बताया कि नोटबंदी के बाद सरकार की ओर से ऑनलाइन पेंमेट की प्रकिया पर जोर दिया है। बाजार में नकदी के लेन देन की समस्या बरकरार है। सरकार ऑनलाइन लेन देन पर लगने वाले सरचार्ज को कम करे। जिससे ग्राहक और दुकानदार दोनों की परेशानी कम होगी।
छोटे व्यापारियों की चिल्लर की समस्या बढ़ी:-कपड़ा व्यापारी अमित कुमार ने बताया कि नोटबंदी के बाद मंदी में कोई कमी नहीं आई है। दूसरा सरकार ने जीएसटी का बोझ व्यापारी पर डाल दिया है। नोटबंदी के दौरान सरकार की ओर से दो हजार रुपये का नोट बाजार में लाने के बाद व्यापारी के लिए छुट्टे की समस्या बढ़ गई है। छोटे व्यापारी का कम रकम का व्यापार होने के कारण परेशानी होती है। सरकार को इसके समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नोटबंदी को एक साल हो गए हैं, मगर इसका असर अब भी है। लोगों का कहना है कि, एक हजार रुपये के नोट की बजाय दो हजार रुपये का नया नोट आने के बाद भी छोटे-मध्यम वर्ग के दुकानदारों की समस्या कम नहीं हुई। दुकानदारों का कहना है ग्राहक की ओर से कम रुपयों की वस्तु पर दो हजार रुपयों का नोट दिए जाने से काफी परेशानी होती है। छुट्टे न होने से कई बार ग्राहक सामान लिए बिना ही लौट जाते हैं।
छुट्टे की समस्या से दिक्कत:-बुक स्टोर के दुकानदार राजीव आहुजा ने बताया कि नोटबंदी के एक वर्ष के बाद भी उनके काम में सुधार नहीं हुआ है। एक वर्ष के बाद भी छुट्टे की समस्या के कारण दिक्कत है। एक ग्राहक यदि कुछ सौ रुपये की वस्तु खरीदता है और 2000 रुपये दे दे तो उसके लिए शेष राशि की व्यवस्था करना टेढ़ी खीर हो जाती है। दिन में ऐसे एक-दो ग्राहक और आ जाएं तो इतने छोटे नोट कहां से लाएं।
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व्यवस्था बदलने में लगेगा समय, धैर्य की जरूरत:-जनरल स्टोर के दुकानदार आशु ने बताया कि नो बंदी के बाद से आम जनता को परेशानी एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कम नहीं हुई है। परेशानी को दूर होने में अभी थोड़ा समय और लगेगा। इसलिए जनता को धैर्य रखना चाहिए। व्यवस्था बदलने में अधिक समय लगता है।
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ऑनलाइन लेन देन पर सरचार्ज हो कम:-दुकानदार गोपाल ने बताया कि नोटबंदी के बाद सरकार की ओर से ऑनलाइन पेंमेट की प्रकिया पर जोर दिया है। बाजार में नकदी के लेन देन की समस्या बरकरार है। सरकार ऑनलाइन लेन देन पर लगने वाले सरचार्ज को कम करे। जिससे ग्राहक और दुकानदार दोनों की परेशानी कम होगी।
छोटे व्यापारियों की चिल्लर की समस्या बढ़ी:-कपड़ा व्यापारी अमित कुमार ने बताया कि नोटबंदी के बाद मंदी में कोई कमी नहीं आई है। दूसरा सरकार ने जीएसटी का बोझ व्यापारी पर डाल दिया है। नोटबंदी के दौरान सरकार की ओर से दो हजार रुपये का नोट बाजार में लाने के बाद व्यापारी के लिए छुट्टे की समस्या बढ़ गई है। छोटे व्यापारी का कम रकम का व्यापार होने के कारण परेशानी होती है। सरकार को इसके समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए।