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भुगतान ना होने पर एनएचआई के लिए अधिग्रहित जमीन मालिक किसान व प्रशासन हुआ आमने-सामने

Fri, 16 Jun 2017 11:52 PM IST
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:52 PM IST
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भुगतान ना होने पर एनएचआई के लिए अधिग्रहित जमीन मालिक किसान व प्रशासन हुआ आमने-सामने
10 एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन और ग्रामीण आमने-सामने
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। तितरम मोड से चंडीगढ़ तक बनाए जा रहे नेशनल हाइवे के तहत बाईपास निर्माण में कई जगह जमीन ना मिलने के कारण नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारी परेशान हैं। वीरवार को गांव नरड़ के किसानों की 10 एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन और गांव के सैंकड़ों की संख्या में लोग आमने-सामने आ गए। बाद में बातचीत से किसी तरह मामला शांत हुआ। नरड़ के अलावा प्यौदा, हरसौला, सेगा में भी जमीन संबंधी विवाद के कारण नेशनल हाइवे निर्माण कार्य में बाधा आ रही है।

पीएम मोदी ने रखी थी आधारशिला
हिसार से राजस्थान बॉर्डर चंडीगढ़ तक करीब 2400 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाए जा रहे नेशनल हाइवे का शुभारंभ पीएम नरेंद्र मोदी ने किया था। इसे अलग-अलग टुकड़ों में कंपनियों को ठेका देकर बनवाया जा रहा है। तितरम मोड से पिहोवा तक 459 करोड़ रुपये में एक कंपनी हाइवे का निर्माण कर रही है। जिसमें अब जमीन संबंधी मामलों के कारण एनएचएआई को परेशानी आ रही है।
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गांव नरड़ के लोग और प्रशासन आमने-सामने, भारी पुलिस बल पहुंचा
गांव नरड़ के किसान शमशेर सिंह सहित अन्य की 10 एकड़ जमीन के लिए अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है। लेकिन एनएचएआई के अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ इस जमीन पर कब्जे के लिए पहुंच गए। जहां करीब 4 दिनों से सैंकड़ों की संख्या में गांव वासी भंडारा लगाकर पहले से ही डटे हुए थे। पुलिस फोर्स व गांव के लोग एक बार तो आमने-सामने हो गए थे। लेकिन नायब तहसीलदार द्वारा बातचीत के बाद सप्ताह भर के लिए मामले को टाल दिया गया।
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किसान शमशेर सिंह ने बताया कि उनकी 10 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ है। यह जमीन संतर राम, मुख्त्यार सिंह, जिले सिंह, सूबे सिंह, अमृत लाल, सुरेश कुमार, टेकचंद, ओमप्रकाश, जगदीश, जसमेर, संजू, मनोज सहित अन्य के नाम है। जमीन के लिए उन्हें करीब 6 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगताना होना है। उन्हें अभी तक इसका भुगता नहीं किया गया है। जिस कारण वह जमीन नहीं छोड़ेंगे। एनएचएआई जबरन उनकी जमीन छीनने पर उतारु है। उनकी मांग है कि उनका भुगतान कर दिया जाए और जमीन ले ली जाए। प्रशासन पुलिस फोर्स लेकर पहुंचा था। लेकिन यहां गांव के लोगों ने उनका पूरा साथ दिया। बाद में बातचीत कर प्रशासन वापिस लौट गया। उनकी एक ही मांग है, उन्हें उनकी जमीन के बदले दी जाने वाली राशि दी जाए।
तहसीलदार राकेश कुमार का कहना है कि इस 10 एकड़ जमीन के लिए एनएचएआई की ओर से भुगतान हो चुका है। पूरा पैसा पहले राजस्व विभाग को बाद में उनके शीर्षक का विवाद होने के कारण कोर्ट में जमा है। न्यायालय का फैसला आने पर ही उनके भुगतान का रास्ता साफ हो पाएगा। अधिग्रहण पहले ही हो चुका है। किसानों का कब्जा अवैध है। उनसे बातचीत की जा रही है।
एनएचआई के डिप्टी प्रोजैक्ट मैनेजर राजेश कुमार ने कहा कि एनएचएआई द्वारा पैसा दे दिया गया है। जो विवाद है, वह किसानों का पारिवारिक है। प्रयास किया जा रहा है कि किसान खुद ही जमीन विभाग को दे दें। ताकि प्रोजेक्ट पूरा किया जा सके।

गांव प्यौदा में आ रही है सबसे ज्यादा परेशानी
एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार गांव प्यौदा में सबसे ज्यादा परेशानी है। यहां 70 प्रतिशत किसानों को भुगतान हो चुका है। 30 प्रतिशत किसानों की जमीन का अधिग्रहण बाद में हुआ है। लेकिन लोग इस बात पर अड़े हैं कि सभी का पहले भुगतान हो, तभी जमीन दी जाएगी। अभी तक वहां जमीन नहीं मिल पाई।
इसी तरह हरसौला, सेगा में भी जमीन संबंधी विवाद के कारण बाईपास निर्माण में परेशानी आ रही है। जुलाई 2018 में यह प्रोजेक्ट पूरा होना है। ऐसे में जमीन विवाद नहीं निपटे तो प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी भी हो सकती है।


कैथल शहर के बाहर से बन रहा है बाईपास
राजस्थान बॉर्डर से लेकर चंडीगढ़ तक बन रहे एनएच में तितरम मोड से लेकर क्योडक़ गांव तक कैथल शहर के बाहर से करीब 18 किलोमीटर लंबा बाईपास बन रहा है। जिसके बन जाने से जहां शहर में ट्राफिक कम होगा। वहीं शहर का विकास भी होगा।
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