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Kaithal News: प्रदेश में 40 हजार किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं, कैथल के हैं 2102 किसान

Sat, 07 Oct 2023 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 07 Oct 2023 01:52 AM IST
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40 thousand farmers in the state are not registered on the portal, 2102 farmers are from Kaithal
प्रदेश में 40 हजार किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं, कैथल के हैं 2102 किसान
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ये वे किसान हैं जिनकी जमीन एक जिले में तो रिहायश किसी अन्य में, नहीं कट रहे गेट पास

जिलों में अब तहसीलदार ने पटवारियों की लगाई ड्यूटियां, किया जाएगा पंजीकरण



फोटो नंबर-10

संवाद न्यूज एजेंसी

कैथल। सीजन में अधिकतर अनाज मंडियां धान से अटी हुई हैं। वहीं प्रदेश में 40 हजार किसानों का पंजीकरण मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर नहीं हुआ है। ये वे किसान हैं, जिनकी जमीन एक जिले में है, लेकिन रिहायश किसी दूसरे जिले में है। इसमें कैथल के 2102 किसान शामिल हैं। पंजीकरण नहीं होने से किसानों के गेट पास नहीं कट पा रहे हैं। समस्या को देखते हुए अब जिलों में इस कार्य को लेकर तहसीलदारों ने पटवारियों की ड्यूटियां लगाई हैं।


जिले के 2102 किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण न होने से इन्हें धान की फसल बेचने में समस्या आ रही है। दरअसल ये वे किसान हैं, जिनकी जमीन कैथल में है, लेकिन वे रहने वाले किसी और जिले के हैं। इसी प्रकार प्रदेश में ऐसे 40 हजार किसान हैं, जिनके समक्ष इस तरह की समस्या है। किसानों की शिकायतों के बाद अब जिलों में तहसीलदारों की ओर से पटवारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि ऐसे किसानों का चिह्नीकरण कर पंजीकरण कराया जा सके। विदित हो कि मेरा ब्योरा, मेरा फसल पोर्टल पर पंजीकरण करवाने के लिए किसान को अपना पहचान पत्र, आधार कार्ड, जमीन के कागज, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो, निवास प्रमाण पत्र देना होता है। कृषि उपनिदेशक डॉ. महाबीर ने बताया कि कैथल जिले में 2102 किसान हैं, जिनका अभी मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है। वहीं जिला राजस्व अधिकारी रण विजय सुल्तानियां ने बताया कि प्रदेश में 40 हजार किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन तो दूसरे जिलों में हैं, लेकिन वह रहने वाले किसी अन्य जिले के हैं।
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पोर्टल के ये हैं फायदे ——

- एक ही जगह पर खेती से जुड़ी सभी सरकारी सुविधाओं की उपलब्धता।

- खाद, बीज, ऋण और कृषि उपकरणों की सब्सिडी लेने में आसानी।

- फसल की बिजाई-कटाई का समय और मंडी संबंधित जानकारी।

- प्राकृतिक आपदा-विपदा के दौरान सही समय पर मुआवजा दिलवाना।

- न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की बिक्री की सुविधा।
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