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Kaithal News: 308 बच्चे कभी नहीं गए स्कूल, 98 ने बीच में छोड़ी पढ़ाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 11:17 PM IST
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308 children never went to school; 98 dropped out midway.
कैथल। जिस उम्र में बच्चों के कंधों पर स्कूल बैग होना चाहिए, उस उम्र में जिले के सैकड़ों बच्चे शिक्षा की मुख्याधारा से बाहर हैं। समग्र शिक्षा अभियान के जनवरी में हुए सर्वे के अनुसार जिले में 7 से 14 साल की उम्र के 406 बच्चे ऐसे मिले, जो स्कूलों से बाहर हैं। इनमें 308 बच्चों का कभी किसी स्कूल में दाखिला ही नहीं हुआ। वहीं 98 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने दाखिला लिया लेकिन बाद में पढ़ाई छोड़ दी।
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अब इन बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की तैयारी है। समग्र शिक्षा अभियान ने इसके लिए हुमाना पीपल टू पीपल इंडिया एनजीओ के साथ मिलकर योजना तैयार की है। बच्चों को पहले छह माह का ब्रिज कोर्स करवाया जाएगा। इसके बाद उनकी उम्र और शैक्षणिक स्तर के अनुसार नजदीकी सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया जाएगा।
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15 दिन चला था सर्वे
समग्र शिक्षा अभियान की ओर से 1 से 15 जनवरी तक जिले में सर्वे करवाया गया था। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना था, जो स्कूल से बाहर हैं। सर्वे में सामने आए आंकड़ों ने शिक्षा के अधिकार कानून के लिए भी सवाल खड़े किए हैं। 7 से 14 साल की उम्र को बच्चों की अनिवार्य स्कूली शिक्षा से जोड़कर देखा जाता है। इसके बावजूद 308 बच्चे ऐसे मिले, जो अब तक स्कूल तक नहीं पहुंच पाए। अभियान के तहत अब इन बच्चों की दोबारा पहचान और सत्यापन भी किया जा रहा है।
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इसी माह खुलेंगे 14 स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर
इन बच्चों को पढ़ाई के लिए तैयार करने के लिए जिले में सितंबर माह में 14 स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर शुरू किए जाएंगे। समग्र शिक्षा अभियान में सहायक परियोजना संयोजक मनोज पवार व एनजीओ के जिला संयोजक रोहित कुमार का कहना है कि इसके लिए 14 स्वयंसेवक शिक्षकों का चयन किया जा चुका है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। इसके बाद चिन्हित क्षेत्रों में केंद्र संचालित होंगे। कैथल शहर में सबसे ज्यादा चार केंद्र खोले जाएंगे। इसके अलावा पूंडरी, ढांड, सेरधा और चंदाना समेत अन्य क्षेत्रों में भी केंद्र बनाए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र में कम से कम 20 बच्चों को रखने की योजना है। ये सभी केंद्र नजदीकी सरकारी स्कूलों में एक कमरे में चलेंगे। यहां बच्चों को छह माह तक पढ़ाया जाएगा। उन्हें सामान्य स्कूल की पढ़ाई के लिए तैयार किया जाएगा। कोर्स पूरा होने के बाद उम्र के अनुसार कक्षा में दाखिला दिलाया जाएगा।

पांच साल में 880 बच्चों को जोड़ा मुख्यधारा से
समग्र शिक्षा अभियान के अनुसार यह प्रयास नया नहीं है। अभियान के तहत पहले भी बड़ी संख्या में स्कूल से बाहर बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया है। आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में 251 बच्चों को मुख्यधारा में शामिल किया गया। 2022-23 में 204, 2023-24 में 180 और 2024-25 में 117 बच्चों का दाखिला करवाया गया। वर्ष 2025-26 में 128 बच्चे स्कूल पहुंचे। इस तरह पांच वर्षों में 880 बच्चों को ब्रिज कोर्स के बाद स्कूलों से जोड़े जाने का दावा किया गया है। वहीं वर्ष 2026-27 के लिए अब तक करीब 408 बच्चों की पहचान की जा चुकी है। इनमें सर्वे में सामने आए बच्चे भी शामिल हैं। विभाग का लक्ष्य इन सभी को चरणबद्ध तरीके से स्कूलों तक पहुंचाना है।


कोई बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे
7 से 14 साल के ऐसे बच्चों की पहचान की जाती है, जो कभी स्कूल नहीं गए या पढ़ाई छोड़ चुके हैं। उन्हें छह महीने का ब्रिज कोर्स करवाया जाता है। इसके बाद उम्र और स्तर के अनुसार स्कूल में दाखिला दिलाया जाता है। अब तक 880 बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। प्रयास है कि आने वाले समय में कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
राजेंद्र आजाद, जिला परियोजना संयोजक, समग्र शिक्षा अभियान, शिक्षा विभाग, कैथल।
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