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बीमा से 21 सब्जियों, फलों और मसाला फसलों को किया जाएगा कवर
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हरियाणा सरकार ने बागवानी किसानों को खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बागवानी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (एमबीबीवाई) के कार्यान्वयन को स्वीकृति प्रदान की है।
इस योजना के तहत 21 सब्जियों, फलों और मसाला फसलों को कवर किया जाएगा।
डीसी प्रदीप दहिया ने बताया कि इस योजना को बागवानी फसल आश्वासन योजना के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को ज्यादा जोखिम वाली बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। बागवानी किसानों को विभिन्न कारकों के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है, जिनमें फसलों में अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण जैसे जैविक कारक और बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला, अत्यधिक तापमान जैसे प्राकृतिक कारक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि योजना के तहत किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों की 30 हजार रुपये और फल फसलों की 40 हजार रुपये की बीमा राशि के विरूद्घ केवल 2.5 प्रतिशत यानी क्रमश: 750 रुपये और 1000 रुपये ही अदा करने होंगे। मुआवजे के लिए सर्वेक्षण और नुकसान की चार श्रेणियों 25, 50, 75 और 100 प्रतिशत होंगी। यह योजना वैकल्पिक होगी और पूरे राज्य में लागू होगी। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए बजट का भी प्रावधान किया जाएगा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत राज्य और जिला स्तरीय समितियां राज्य एवं जिला स्तर पर निगरानी, समीक्षा और विवादों का समाधान करेंगी।
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इस योजना के तहत 21 सब्जियों, फलों और मसाला फसलों को कवर किया जाएगा।
डीसी प्रदीप दहिया ने बताया कि इस योजना को बागवानी फसल आश्वासन योजना के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को ज्यादा जोखिम वाली बागवानी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। बागवानी किसानों को विभिन्न कारकों के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है, जिनमें फसलों में अचानक बीमारी फैलने, कीटों के संक्रमण जैसे जैविक कारक और बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि, सूखा, पाला, अत्यधिक तापमान जैसे प्राकृतिक कारक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि योजना के तहत किसानों को सब्जी एवं मसाला फसलों की 30 हजार रुपये और फल फसलों की 40 हजार रुपये की बीमा राशि के विरूद्घ केवल 2.5 प्रतिशत यानी क्रमश: 750 रुपये और 1000 रुपये ही अदा करने होंगे। मुआवजे के लिए सर्वेक्षण और नुकसान की चार श्रेणियों 25, 50, 75 और 100 प्रतिशत होंगी। यह योजना वैकल्पिक होगी और पूरे राज्य में लागू होगी। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए बजट का भी प्रावधान किया जाएगा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत राज्य और जिला स्तरीय समितियां राज्य एवं जिला स्तर पर निगरानी, समीक्षा और विवादों का समाधान करेंगी।
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