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पशुओं में मुंहखुर रोग की रोकथाम के लिए शुरू हुआ वैक्सीनेशन
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:56 PM IST
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पशुओं में मुंहखुर रोग की रोकथाम के लिए शुरू हुआ वैक्सीनेशन
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत।
गांव बालू में पशुओं में फैले मुंहखुर रोग की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग की छह लोगों की टीम हर पशुपालक के घर में जाकर दुधारू पशुओं का वैक्सीनेशन कर रही है। गत दिवस शुरू हुए अभियान में गांव बालू के करीब 7 हजार पशुओं की वैक्सीनेशन की जाएगी।
बता दें कि अमर उजाला ने 24 फरवरी को गांव बालू के पशुपालकों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। समाचार छपने के बाद पशुपालन विभाग सक्रिय हुआ और गांव में टीकाकरण अभियान शुरू हो गया। पशु चिकित्सक डा. त्रिलोक शर्मा ने बताया कि गांव बालू में मुंहखुर नामक बीमारी के फैल जाने से पशु पालक परेशानी में थे। उनके पास वेक्सीन आते ही गांव में टीकाकरण का अभियान शुरू कर दिया गया है। गांव बालू की तीनों पट्टियों में करीब 7 हजार पशु हैं जिनमें गाय, भैंस, भैंसा, बैल व शिशु शामिल हैं। उनकी टीम में 6 लोग शामिल हैं जो घर-घर जाकर पशुओं को वेक्सीन दे रहे हैं। गांव बालू समेत 14 गांवों में पशु टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। विभाग के द्वारा पशुओं को लगाए जाने वाले टीके सरकार की ओर से निशुल्क लगाए जाते हैं।
पूरे गांव में फैल चुकी थी बीमारी : पशुपालकों का कहना है कि अचानक पूरे गांव मे यह बीमारी फैल गई। जिसके कारण गाय, भैंस, बैल व अन्य पशु त्रस्त हो गए थे। पशुपालक गुरुदेव, मेवा सिंह, राजेंद्र कुमार ने कहा कि इस रोग के कारण पशु को तेज बुखार हो रहा है। बीमार पशु के मुंह, मसूड़े, जीभ के ऊपर नीचे ओंठ के अंदर का भाग, खुरों के बीच की जगह पर छोटे-छोटे दाने से उभरे हैं जो धीरे धीरे मिलकर बड़ा छाला बनाते हैं। इस बीमारी के कारण दुधारू पशुओं का दूध बहुत कम हो गया है।
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पशु चिकित्सक डा. त्रिलोक चंद शर्मा ने बताया कि विभक्त-खुर वाले पशुओं का यह अत्यंत संक्रामक एवं घातक विषाणुजनित रोग है। यह गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर आदि पालतू पशुओं एवं हिरन आदि जंगली पशुओं को हो सकता है। यह रोग पशुओं को, एक बहुत ही छोटे आंख से न दिख पाने वाले कीड़े द्वारा होता है। जिसे विषाणु या वायरस कहते हैं। गांव बालू में इस रोग से प्रभावित एक भैंसा आया था, जिसके कारण से पशुओं में रोग फैल गया। उन्होंने कहा कि साल में एक बार पशुओं का वैक्सीनेशन करना होता है जो अक्तूबर 2017 में किया जा चुका है। वैक्सीनेशन के बाद भी पशुओं में रोग फैल गया है।
अमर उजाला ने 24 फरवरी को गांव बालू के पशुपालकों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था
समाचार छपने के बाद पशुपालन विभाग सक्रिय हुआ तथा गांव में शुरू हो गया टीकाकरण अभियान
फोटो संख्या-14
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अमर उजाला ब्यूरो
कलायत।
गांव बालू में पशुओं में फैले मुंहखुर रोग की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग की छह लोगों की टीम हर पशुपालक के घर में जाकर दुधारू पशुओं का वैक्सीनेशन कर रही है। गत दिवस शुरू हुए अभियान में गांव बालू के करीब 7 हजार पशुओं की वैक्सीनेशन की जाएगी।
बता दें कि अमर उजाला ने 24 फरवरी को गांव बालू के पशुपालकों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। समाचार छपने के बाद पशुपालन विभाग सक्रिय हुआ और गांव में टीकाकरण अभियान शुरू हो गया। पशु चिकित्सक डा. त्रिलोक शर्मा ने बताया कि गांव बालू में मुंहखुर नामक बीमारी के फैल जाने से पशु पालक परेशानी में थे। उनके पास वेक्सीन आते ही गांव में टीकाकरण का अभियान शुरू कर दिया गया है। गांव बालू की तीनों पट्टियों में करीब 7 हजार पशु हैं जिनमें गाय, भैंस, भैंसा, बैल व शिशु शामिल हैं। उनकी टीम में 6 लोग शामिल हैं जो घर-घर जाकर पशुओं को वेक्सीन दे रहे हैं। गांव बालू समेत 14 गांवों में पशु टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। विभाग के द्वारा पशुओं को लगाए जाने वाले टीके सरकार की ओर से निशुल्क लगाए जाते हैं।
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पूरे गांव में फैल चुकी थी बीमारी : पशुपालकों का कहना है कि अचानक पूरे गांव मे यह बीमारी फैल गई। जिसके कारण गाय, भैंस, बैल व अन्य पशु त्रस्त हो गए थे। पशुपालक गुरुदेव, मेवा सिंह, राजेंद्र कुमार ने कहा कि इस रोग के कारण पशु को तेज बुखार हो रहा है। बीमार पशु के मुंह, मसूड़े, जीभ के ऊपर नीचे ओंठ के अंदर का भाग, खुरों के बीच की जगह पर छोटे-छोटे दाने से उभरे हैं जो धीरे धीरे मिलकर बड़ा छाला बनाते हैं। इस बीमारी के कारण दुधारू पशुओं का दूध बहुत कम हो गया है।
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पशु चिकित्सक डा. त्रिलोक चंद शर्मा ने बताया कि विभक्त-खुर वाले पशुओं का यह अत्यंत संक्रामक एवं घातक विषाणुजनित रोग है। यह गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर आदि पालतू पशुओं एवं हिरन आदि जंगली पशुओं को हो सकता है। यह रोग पशुओं को, एक बहुत ही छोटे आंख से न दिख पाने वाले कीड़े द्वारा होता है। जिसे विषाणु या वायरस कहते हैं। गांव बालू में इस रोग से प्रभावित एक भैंसा आया था, जिसके कारण से पशुओं में रोग फैल गया। उन्होंने कहा कि साल में एक बार पशुओं का वैक्सीनेशन करना होता है जो अक्तूबर 2017 में किया जा चुका है। वैक्सीनेशन के बाद भी पशुओं में रोग फैल गया है।
अमर उजाला ने 24 फरवरी को गांव बालू के पशुपालकों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था
समाचार छपने के बाद पशुपालन विभाग सक्रिय हुआ तथा गांव में शुरू हो गया टीकाकरण अभियान
फोटो संख्या-14