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1200 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों को लगाया ताला, वर्कर्स रही हड़ताल पर
Updated Tue, 20 Feb 2018 12:00 AM IST
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केंद्रों का किराया नहीं मिलने पर आंगनबाड़ी वर्कर्स हड़ताल पर, केंद्रों पर लगाया ताला
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले के 1200 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों की वर्कर्स सोमवार को हड़ताल पर रहीं और केंद्रों को ताले लगाकर जवाहर पार्क व लघु सचिवालय में एकत्र हुई। वहां सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही शहर में प्रदर्शन भी किया। केंद्रों के बंद रहने के कारण करीब 35 हजार बच्चों को दोपहर के समय खाना नहीं मिला। वर्कर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी पता नहीं है कि कितने केंद्र सोमवार को बंद रहे। प्रदर्शन की अध्यक्ष यूनियन की राज्य महासचिव शकुंतला ने किया।
सोमवार को आंगनबाड़ी वर्करों ने 1200 से अधिक केंद्रों में तालाबंदी की। इस कारण इन केंद्रों पर कार्यरत सभी वर्कर और हेल्पर हड़ताल पर रहीं। जिले के करीब 35 हजार नौनिहालों को दोपहर का भोजन नहीं मिला। महासचिव शकुंतला ने कहा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तभी से आंगनबाड़ी वर्करों को बरगलाया जा रहा है। उसने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर पिछले 45 वर्षों से केंद्र सरकार की स्कीम आईसीडीएस के तहत समाज सेवा का कार्य कर रही है। इस मौके पर राज्य कोषाध्यक्ष संतरो, राजबाला जाखौली, कमला दयोरा सहित अन्य वर्कर व हेल्पर मौजूद रही।
केंद्रों से वापस लौटे बच्चे
हड़ताल के कारण सुबह केंद्रों पर पहुंचे बच्चे वापस लौट गए। बच्चों को लेकर्र आइं महिलाएं भी उन्हें लेकर वापस चली गईं। जिले भर में आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब 35 हजार बच्चों के लिए हर रोज दोपहर का भोजन बनता है या फिर कोई अन्य खाद्य सामग्री दी जाती है। प्रत्येक बच्चे को 6 रुपये की दर से खाद्य सामग्री मुहैया करवाई जाती है। सोमवार को ये सभी बच्चे घर पर ही रहे।
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दूसरी यूनियन के मिले सदस्य तो पदाधिकारियों के साथ हुई बहस
जिस समय आंगनबाड़ी वर्कर की यूनियन ज्ञापन देने के बाद लघु सचिवालय के पार्क में पहुंचीं तो यहां धरना दे रही अन्य यूनियन की कार्यकर्ता इनमें शामिल हुई। उनके पहुंचते ही महासचिव और अन्य पदाधिकारियों के साथ उसकी जुबानी जंग हुुई। महासचिव ने कहा कि अन्य यूनियन की पदाधिकारी हमारी यूनियन से आगे न निकले। आपको प्रदर्शन में जल्द पहुंचना चाहिए था। एकमत होकर सरकार के साथ लड़ाई लड़ने मतलब यह नहीं है कि कोई दूसरी यूनियन हमारी यूनियन की सदस्यों को अपनी और खींच लें।
वहीं पीओआईसीडीएस रेनू पसरीचा का कहना है कि उन्हें मीडिया के माध्यम से ही पता चला है कि वर्कर्स हड़ताल पर हैं। इस बारे में विभाग की ओर से भी कोई आदेश नहीं आए हैं कि वर्कर्स का वेतन काटना है या नहीं। जैसे ही विभाग के आदेश आएंगे, उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी। डीसी सुनीता वर्मा का भी कहना है कि सरकार की ओर से इस बारे में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले के 1200 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों की वर्कर्स सोमवार को हड़ताल पर रहीं और केंद्रों को ताले लगाकर जवाहर पार्क व लघु सचिवालय में एकत्र हुई। वहां सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही शहर में प्रदर्शन भी किया। केंद्रों के बंद रहने के कारण करीब 35 हजार बच्चों को दोपहर के समय खाना नहीं मिला। वर्कर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी पता नहीं है कि कितने केंद्र सोमवार को बंद रहे। प्रदर्शन की अध्यक्ष यूनियन की राज्य महासचिव शकुंतला ने किया।
सोमवार को आंगनबाड़ी वर्करों ने 1200 से अधिक केंद्रों में तालाबंदी की। इस कारण इन केंद्रों पर कार्यरत सभी वर्कर और हेल्पर हड़ताल पर रहीं। जिले के करीब 35 हजार नौनिहालों को दोपहर का भोजन नहीं मिला। महासचिव शकुंतला ने कहा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तभी से आंगनबाड़ी वर्करों को बरगलाया जा रहा है। उसने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर पिछले 45 वर्षों से केंद्र सरकार की स्कीम आईसीडीएस के तहत समाज सेवा का कार्य कर रही है। इस मौके पर राज्य कोषाध्यक्ष संतरो, राजबाला जाखौली, कमला दयोरा सहित अन्य वर्कर व हेल्पर मौजूद रही।
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केंद्रों से वापस लौटे बच्चे
हड़ताल के कारण सुबह केंद्रों पर पहुंचे बच्चे वापस लौट गए। बच्चों को लेकर्र आइं महिलाएं भी उन्हें लेकर वापस चली गईं। जिले भर में आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब 35 हजार बच्चों के लिए हर रोज दोपहर का भोजन बनता है या फिर कोई अन्य खाद्य सामग्री दी जाती है। प्रत्येक बच्चे को 6 रुपये की दर से खाद्य सामग्री मुहैया करवाई जाती है। सोमवार को ये सभी बच्चे घर पर ही रहे।
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दूसरी यूनियन के मिले सदस्य तो पदाधिकारियों के साथ हुई बहस
जिस समय आंगनबाड़ी वर्कर की यूनियन ज्ञापन देने के बाद लघु सचिवालय के पार्क में पहुंचीं तो यहां धरना दे रही अन्य यूनियन की कार्यकर्ता इनमें शामिल हुई। उनके पहुंचते ही महासचिव और अन्य पदाधिकारियों के साथ उसकी जुबानी जंग हुुई। महासचिव ने कहा कि अन्य यूनियन की पदाधिकारी हमारी यूनियन से आगे न निकले। आपको प्रदर्शन में जल्द पहुंचना चाहिए था। एकमत होकर सरकार के साथ लड़ाई लड़ने मतलब यह नहीं है कि कोई दूसरी यूनियन हमारी यूनियन की सदस्यों को अपनी और खींच लें।
वहीं पीओआईसीडीएस रेनू पसरीचा का कहना है कि उन्हें मीडिया के माध्यम से ही पता चला है कि वर्कर्स हड़ताल पर हैं। इस बारे में विभाग की ओर से भी कोई आदेश नहीं आए हैं कि वर्कर्स का वेतन काटना है या नहीं। जैसे ही विभाग के आदेश आएंगे, उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी। डीसी सुनीता वर्मा का भी कहना है कि सरकार की ओर से इस बारे में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं।