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दावे रह गए धरे, विश्वास हार गए नप चेयरमैन
Updated Thu, 17 Aug 2017 11:55 PM IST
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दावे रह गए धरे, विश्वास हार गए नप चेयरमैन
-नगर परिषद चेयरमैन यशपाल प्रजापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित, 21 पार्षदों ने हाथ उठाकर जताया अविश्वास
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस ने भाजपा के ही पार्षदों के सहयोग से कैथल में बड़ा झटका दिया है। नगर परिषद चेयरमैन यशपाल प्रजापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए बुलाई गई बैठक में 31 में से 21 पार्षदों ने हाथ उठाकर चेयरमैन के प्रति अविश्वास जताया। जिस पर डीसी ने उन्हें पद से हटाने का एलान कर दिया और बैठक की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेशानुसार सील कर दी। इसके साथ ही भाजपा द्वारा किए जा रहे सारे दावे धरे के धरे रह गए। महज एक साल के भीतर ही चेयरमैन को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
वीरवार को भाजपा समर्थित 13 पार्षदों के अलावा कांग्रेस समर्थित 8 पार्षद निर्धारित समय से 5 मिनट पहले परिषद कार्यालय में एक बस से पहुंचे। इस दौरान भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी। 11 बजे से महज 2 मिनट पहले डीसी सुनीता वर्मा परिषद कार्यालय पहुंची। चेयरमैन यशपाल प्रजापति एवं उनके समर्थक 9 पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे। निर्धारित समय पर शुरू हुई बैठक में सभी 21 पार्षदों ने डीसी को गुप्त मतदान की बजाए हाथ खड़े करवाकर वोटिंग करवाए जाने की मांग को लेकर शपथ पत्र दिए। जिस पर डीसी ने सभी पार्षदों के हाथ खड़े करवाकर वोटिंग करवाई तो सभी 21 पार्षदों ने चेयरमैन के प्रति अविश्वास जताया। अंत में डीसी ने एलान कर दिया कि दो तिहाई बहुमत खोने के चलते यशपाल प्रजापति अब चेयरमैन नहीं रहे। डीसी ने बैठक की कार्रवाई कर रिकॉर्ड सील कर दिया।
इसी के साथ सभी 21 पार्षदों व उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। मीटिंग के बाद पार्षद मन्नत पैलेस में पहुंचे। जहां कांग्रेस के नेताओं के साथ जीत का जश्न मनाया गया। असंतुष्ट पार्षद मोहन लाल शर्मा, राकेश सरदाना, प्रतिनिधि धर्मबीर भोला ने कहा कि यशपाल प्रजापति की भेदभाव, भ्रष्टाचारी नीतियों के खिलाफ पार्षदों की एकजुटता रंग लाई और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ है। मोहन लाल शर्मा ने कहा कि सही मायनों में आज कैथल आजाद हुआ है। अब परिषद में समान रूप से कार्य हों, ऐसी व्यवस्था किए जाने का प्रयास होगा। पार्षदों को तोड़ने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए गए, लेकिन पार्षद नहीं झुके। पार्षद वीरेंद्र बिल्लू ने कहा कि भाजपा इस राजनीति में सुरजेवाला को घसीटना चाहती थी। लेकिन उनके न आने के बावजूद भाजपा के ही समर्थक पार्षद ही चेयरमैन की नीतियों से असंतुष्ट हैं।
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उधर, अंदर जहां चेयरमैन की कुर्सी जा रही थी, वहीं बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता हावी रहे। यहां डीएसपी सतीश गौतम, एसएचओ अशोक कुमार, एसएचओ ट्रैफिक रमेश चंद्र के साथ जमकर मारपीट व धक्कामुक्की हुई। इतना ही नहीं भाजपा के मनोनीत पार्षदों एवं 9 सदस्यीय कमेटी के साथ जमकर धक्का-मुक्की हुई। उन्हें मजबूरन वापस लौटना पड़ा।
चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने कहा कि उन्होंने शहर का समान विकास करवाने का प्रयास किया। जो भी फैसला हुआ, स्वीकार है।
कल तक 12 से 13 पार्षदों का दावा करने वाले इस मामले में प्रभारी बनाए गए विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि जो गुट हारा है, वह भाजपा का है। जो जीता है, उसमें भी ज्यादा भाजपा समर्थक पार्षद हैं। नया चेयरमैन भी भाजपा का बनेगा। यशपाल प्रजापति को चेयरमैन बनाने के दावे पर उन्होंने कहा कि प्रयास था दोनों गुट एक हो जाएं, लेकिन नहीं हो पाए। भाजपा नेताओं व पुलिस अधिकारियों के साथ मारपीट की जानकारी होने से उन्होंने इंकार कर दिया।
अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि शहर की जनता का फैसला सिर माथे है। शहर में रुके विकास कार्य सर्वोपरि हैं। रुके विकास कार्यों, भय व आतंक के माहौल से निजात पाने के लिए शहर की जनता ने शहर की सरकार को बदला है। हम जनता के विश्वासमत को स्वीकार करते हैं।
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-नगर परिषद चेयरमैन यशपाल प्रजापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित, 21 पार्षदों ने हाथ उठाकर जताया अविश्वास
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस ने भाजपा के ही पार्षदों के सहयोग से कैथल में बड़ा झटका दिया है। नगर परिषद चेयरमैन यशपाल प्रजापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए बुलाई गई बैठक में 31 में से 21 पार्षदों ने हाथ उठाकर चेयरमैन के प्रति अविश्वास जताया। जिस पर डीसी ने उन्हें पद से हटाने का एलान कर दिया और बैठक की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेशानुसार सील कर दी। इसके साथ ही भाजपा द्वारा किए जा रहे सारे दावे धरे के धरे रह गए। महज एक साल के भीतर ही चेयरमैन को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।
वीरवार को भाजपा समर्थित 13 पार्षदों के अलावा कांग्रेस समर्थित 8 पार्षद निर्धारित समय से 5 मिनट पहले परिषद कार्यालय में एक बस से पहुंचे। इस दौरान भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी। 11 बजे से महज 2 मिनट पहले डीसी सुनीता वर्मा परिषद कार्यालय पहुंची। चेयरमैन यशपाल प्रजापति एवं उनके समर्थक 9 पार्षद बैठक में नहीं पहुंचे। निर्धारित समय पर शुरू हुई बैठक में सभी 21 पार्षदों ने डीसी को गुप्त मतदान की बजाए हाथ खड़े करवाकर वोटिंग करवाए जाने की मांग को लेकर शपथ पत्र दिए। जिस पर डीसी ने सभी पार्षदों के हाथ खड़े करवाकर वोटिंग करवाई तो सभी 21 पार्षदों ने चेयरमैन के प्रति अविश्वास जताया। अंत में डीसी ने एलान कर दिया कि दो तिहाई बहुमत खोने के चलते यशपाल प्रजापति अब चेयरमैन नहीं रहे। डीसी ने बैठक की कार्रवाई कर रिकॉर्ड सील कर दिया।
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इसी के साथ सभी 21 पार्षदों व उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। मीटिंग के बाद पार्षद मन्नत पैलेस में पहुंचे। जहां कांग्रेस के नेताओं के साथ जीत का जश्न मनाया गया। असंतुष्ट पार्षद मोहन लाल शर्मा, राकेश सरदाना, प्रतिनिधि धर्मबीर भोला ने कहा कि यशपाल प्रजापति की भेदभाव, भ्रष्टाचारी नीतियों के खिलाफ पार्षदों की एकजुटता रंग लाई और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ है। मोहन लाल शर्मा ने कहा कि सही मायनों में आज कैथल आजाद हुआ है। अब परिषद में समान रूप से कार्य हों, ऐसी व्यवस्था किए जाने का प्रयास होगा। पार्षदों को तोड़ने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए गए, लेकिन पार्षद नहीं झुके। पार्षद वीरेंद्र बिल्लू ने कहा कि भाजपा इस राजनीति में सुरजेवाला को घसीटना चाहती थी। लेकिन उनके न आने के बावजूद भाजपा के ही समर्थक पार्षद ही चेयरमैन की नीतियों से असंतुष्ट हैं।
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उधर, अंदर जहां चेयरमैन की कुर्सी जा रही थी, वहीं बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता हावी रहे। यहां डीएसपी सतीश गौतम, एसएचओ अशोक कुमार, एसएचओ ट्रैफिक रमेश चंद्र के साथ जमकर मारपीट व धक्कामुक्की हुई। इतना ही नहीं भाजपा के मनोनीत पार्षदों एवं 9 सदस्यीय कमेटी के साथ जमकर धक्का-मुक्की हुई। उन्हें मजबूरन वापस लौटना पड़ा।
चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने कहा कि उन्होंने शहर का समान विकास करवाने का प्रयास किया। जो भी फैसला हुआ, स्वीकार है।
कल तक 12 से 13 पार्षदों का दावा करने वाले इस मामले में प्रभारी बनाए गए विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि जो गुट हारा है, वह भाजपा का है। जो जीता है, उसमें भी ज्यादा भाजपा समर्थक पार्षद हैं। नया चेयरमैन भी भाजपा का बनेगा। यशपाल प्रजापति को चेयरमैन बनाने के दावे पर उन्होंने कहा कि प्रयास था दोनों गुट एक हो जाएं, लेकिन नहीं हो पाए। भाजपा नेताओं व पुलिस अधिकारियों के साथ मारपीट की जानकारी होने से उन्होंने इंकार कर दिया।
अखिल भारतीय कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि शहर की जनता का फैसला सिर माथे है। शहर में रुके विकास कार्य सर्वोपरि हैं। रुके विकास कार्यों, भय व आतंक के माहौल से निजात पाने के लिए शहर की जनता ने शहर की सरकार को बदला है। हम जनता के विश्वासमत को स्वीकार करते हैं।