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रिवाईज्ड हॉकी अकादमी खबर
Updated Wed, 06 Jun 2018 07:51 PM IST
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तीन साल पहले हुआ था हाबड़ी में हॉकी अकादमी बनाने का एलान
गांव में आएंगे सीएम, तो भी शिलान्यास तक का भी कार्यक्रम तय नहीं
-ऐन वक्त पर फाइल क्लियर ना होने पर अटका शिलान्यास का कार्यक्रम
-यूएसए से गांव के कुछ पूर्व हॉकी खिलाड़ी कर रहे हैं मदद
गांव के 40 से 50 युवा केवल हॉकी के दम पर सरकारी नौकरी में
फोटो संख्या-6 से 10
नसीब सैनी
कैथल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तीन साल पहले गांव हाबड़ी में हॉकी की उपलब्धियों को देखते हुए हॉकी अकादमी बनाने का एलान किया था। लेकिन सरकार तीन साल में अकादमी के लिए एक ईंट नहीं लगा पाई। सीएम अब 8 जून को गांव में आ रहे हैं तो भी फाइल के क्लियर ना होने के कारण अकादमी का शिलान्यास का कार्यक्रम संशय में है। प्रशासन ने ऐन वक्त पर जमीन संबंधी फाइल क्लीयर ना होने के कारण अकादमी शिलान्यास को मुख्य कार्यक्रम से हटा लिया है। यहां अकादमी तो नहीं बन पा रही है, इसके उल्ट बच्चों के लिए जो मैदान है, वहां मिल रही सुविधाएं भी नगण्य हो गई। प्रेक्टिस करने वाले 70 बच्चों में महज 10 के पास ही हॉकी स्टिक हैं। गेंद के नाम पर ईंट पत्थरों की मदद से प्रेक्टिस करनी पड़ती है।
खिलाड़ियों ने खेल उपलब्धियों से हासिल किया रोजगार
गांव में पूर्व हॉकी खिलाड़ी विवनजीत सिंह के अनुसार इस गांव में 1962 में हॉकी खेल की शुरुआत हुई थी। गांव के लोग गांव मेबडही, आस-पड़ोस के गांवों में मुकाबले जीतते थे और मस्त रहते थे। वर्ष 2000 के बाद हॉकी के मेडल से होने वाले लाभ की जानकारी मिली। इसके बाद गांव के 40 से 50 खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों के बलबूते सरकारी नौकरी हासिल की है। गांव के ही तीन हॉकी खिलाड़ी तो पिछली भर्ती में ही कोच नियुक्त हुए हैं। इनमें से ही एक कोच बृजभूषण सरकार द्वारा अब गांव में ही नियुक्त हैं।
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अंदरूनी विरोध है अड़चन की वजह
कुछ लोगों के अंदरूनी विरोध के चलते सीएम द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय स्तर की हॉकी अकादमी का काम रुका हुआ है। गांव में कोच बृजभूषण बताते हैं कि यहां सुविधाओं की इतनी कमी है। बाकियों को फुटबाल व हैंडबाल खिलाना पड़ता है। यूएसए में गए कुछ पूर्व खिलाड़ी कुलदीप सिंह, विक्रमजीत सिंह, अजायब सिंह सहित अन्य कुछ मदद कर देते हैं। एस्ट्रोटर्फ युक्त अकादमी बन जाए तो इस गांव के बच्चे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे।
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भारतीय टीम में खेलता है खिलाड़ी रवि
इस साल भी इस गांव के रवि ने भारतीय टीम में खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय टीम में परचम लहराया। हरपिंद्र सिंह भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। अंडर-18 स्कूल एशिया कप में इस गांव के रवि ने गोल्ड हासिल किया। गांव के 12 बच्चे नेशनल लेवल तक खेले हैं और नेशनल लेवल पर 7 ने मेडल हासिल किए हैं। इससे पूर्व सेवा सिंह, निशान सिंह, महाबीर शर्मा, सोहन लाल, गुरबाज सिंह, विवनजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, बलवान सिंह, बलबीर, रामप्रकाश सहित कई बड़े खिलाड़ी रह चुके हैं। सुविधाएं मिलें तो इस गांव का युवा बड़ा परिणाम दे सकता है।
वर्जन:
डीसी एसएस फूलिया ने कहा कि शिलान्यास पत्थर पर जो विषय लिखा जाता है। उसे क्लीयरेंस के लिए सरकार को भेजा है। यदि सरकार से अनुमति मिल जाती है तो शिलान्यास कार्यक्रम सीएम दौरे में शामिल कर लिया जाएगा। अन्यथा इसे लंबित रखा जाएगा। फिलहाल यह कार्यक्रम ना तो सीएम दौरे से बाहर है और ना ही फाइनल कार्यक्रम में शामिल है।