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क्लासरूम में रखा मिला गैस सिलेंडर, लटक रही बिजली की तारें
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:55 PM IST
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क्लासरूम में सिलेंडर, पीने के पानी में मच्छर
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
अधिकतर सरकारी स्कूलों में अव्यवस्थाएं तो रहती ही हैं, उनका समाधान करने पर प्रशासन का कितना ध्यान है इसकी एक बानगी निरीक्षण के दौरान सामने आयी। शुक्रवार को हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य व्यवस्थाओं की जांच के लिए गांव पाडला व संगतपुरा के राजकीय स्कूलों में पहुंची। यहां होमवर्क की नोटबुक न मिलने पर तो उन्होंने संज्ञान लिया परंतु बड़ी खामियों पर उनका ध्यान ही नहीं गया।
क्लासरूम में गैस सिलेंडर रखा था तो साइंस रूम में बिजली की नंगी तारें झूल रही थीं। पीने के पानी की टंकीं में मच्छर पनप रहे थे तो नलों में काई जमी हुई थी। एजूसेट रूम पर ताला लगा था, तो 11 में से एक ही कंप्यूटर चालू मिला। अग्नि शामक यंत्र खराब पड़े थे।
निरीक्षण के लिए रमनदीप कौर शुक्रवार को पहले गांव पाड़ला के राजकीय कन्या स्कूल में पहुंची जहां पर मिड-डे-मील बन रहा था। जहां उन्होंने गेहूं व चावल की जांच की। इसके बाद वे पांचवीं कक्षा में पहुंची। वहां बच्चों से छुट्टियों के होम वर्क को देखने के लिए नोट बुक मांगी गई। यहां पर होम वर्क देने वाली नोट बुक नहीं लगवाई गई थी। जिस पर उन्होंने अध्यापक को फटकार लगाई।
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इसके बाद अगले क्लास रूम का दौरा किया गया तो यहां गैस सिलेंडर रखा हुआ था। इस पर ध्यान दिए बिना टीम साइंस रूम में गई वहां पर विज्ञान के उपकरण तो रखे थे। लेकिन वे डिब्बे में पैक थे। इस पर आयोग सदस्या ने अध्यापक को इन उपकरणों डिब्बे से बाहर निकालने के लिए कहा।
यहां पर रखे उपकरणों से कुछ ही ऊपर मीटर के साथ बिजली की नगीं तार लटक रहे थे। लेकिन इस ओर आयोग का ध्यान नहीं गया। साइंस लैब के बाद आयोग की सदस्य कंप्यूटर लैब में कंप्यूटरों की जांच करने पहुंची। जहां कुल 11 कंप्यूटर थे। जिसमें से केवल एक ही कंप्यूटर चालू हालत में मिला। यहां स्थित फायर गैस सिलेंडर भी एक्सपायर हो चुका था।
इसके बाद हेडमास्टर के कार्यालय में अध्यापकों की हाजिरी चेक की गई। दसवीं कक्षा में कोई भी अध्यापक नहीं मिला। बच्चों से डीईओ शमशेर सिरोही ने बच्चों से आरटीकल और वोवल के बारे में पूछा तो कक्षा में खड़ी हुई पहली छात्रा ने इसका जवाब गलत दिया। बाद में दूसरी छात्रा ने वोवल के बारे में बताया।
इस स्कूल का दौरा खत्म करके आयोग की सदस्य टीम के साथ स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में पहुंची। जहां सबसे पहले बारहवीं कक्षा के छात्रों से मिले वहां पर भी कोई टीचर नहीं था। जिस पर आयोग की सदस्य ने बच्चों की अंग्रेजी की कॉपी को जांचा। इसके बाद एजूसेट रूम को जांचा गया तो वहां ताला लगा हुआ मिला। काफी देर बाद भी अध्यापकों ने इस रुम का ताला नहीं खोला।
आयोग की टीम ने सभी खामियों पर सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण में डीईओ शमशेर सिरोही, सुरेश गुलशन, डा मंजू नैैन, रीतू सिंगला, पूजा, राजबीर,सोनू शर्मा मौजूद रहे।
नहीं मिले टीचर, बच्चे बैठे खाली
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रमनदीप कौर पाडला में स्कूलों का दौरा करने पहुंची तो दोनों ही स्कूलों में अध्यापकों की कमी मिली। जिस कारण बच्चे खाली बैठकर समय व्यतीत किया।
एक ही स्थान पर दो स्कूल, बच्चे बैठे थे जमीन पर
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रमनदीप कौर जब संगतपुरा के राजकीय स्कूल में पहुंची तो वहां एक स्कूल की बिल्डिंग में प्राइमरी व मिडिल दो स्कूल एक साथ चल रहे थे। यहां जानकारी मिली की स्कूल की बिल्डिंग एक ही है लेकिन इसके बावजूद भी यहां प्रार्थना और आधी छुट्टी अलग-अलग समय पर होती है। इसके साथ जब आयोग की सदस्य ने कक्षाओं का दौरा किया तो बड़ी कक्षा में भी छोटी कक्षा के विद्यार्थी एक साथ बैठे थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
अधिकतर सरकारी स्कूलों में अव्यवस्थाएं तो रहती ही हैं, उनका समाधान करने पर प्रशासन का कितना ध्यान है इसकी एक बानगी निरीक्षण के दौरान सामने आयी। शुक्रवार को हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य व्यवस्थाओं की जांच के लिए गांव पाडला व संगतपुरा के राजकीय स्कूलों में पहुंची। यहां होमवर्क की नोटबुक न मिलने पर तो उन्होंने संज्ञान लिया परंतु बड़ी खामियों पर उनका ध्यान ही नहीं गया।
क्लासरूम में गैस सिलेंडर रखा था तो साइंस रूम में बिजली की नंगी तारें झूल रही थीं। पीने के पानी की टंकीं में मच्छर पनप रहे थे तो नलों में काई जमी हुई थी। एजूसेट रूम पर ताला लगा था, तो 11 में से एक ही कंप्यूटर चालू मिला। अग्नि शामक यंत्र खराब पड़े थे।
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निरीक्षण के लिए रमनदीप कौर शुक्रवार को पहले गांव पाड़ला के राजकीय कन्या स्कूल में पहुंची जहां पर मिड-डे-मील बन रहा था। जहां उन्होंने गेहूं व चावल की जांच की। इसके बाद वे पांचवीं कक्षा में पहुंची। वहां बच्चों से छुट्टियों के होम वर्क को देखने के लिए नोट बुक मांगी गई। यहां पर होम वर्क देने वाली नोट बुक नहीं लगवाई गई थी। जिस पर उन्होंने अध्यापक को फटकार लगाई।
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इसके बाद अगले क्लास रूम का दौरा किया गया तो यहां गैस सिलेंडर रखा हुआ था। इस पर ध्यान दिए बिना टीम साइंस रूम में गई वहां पर विज्ञान के उपकरण तो रखे थे। लेकिन वे डिब्बे में पैक थे। इस पर आयोग सदस्या ने अध्यापक को इन उपकरणों डिब्बे से बाहर निकालने के लिए कहा।
यहां पर रखे उपकरणों से कुछ ही ऊपर मीटर के साथ बिजली की नगीं तार लटक रहे थे। लेकिन इस ओर आयोग का ध्यान नहीं गया। साइंस लैब के बाद आयोग की सदस्य कंप्यूटर लैब में कंप्यूटरों की जांच करने पहुंची। जहां कुल 11 कंप्यूटर थे। जिसमें से केवल एक ही कंप्यूटर चालू हालत में मिला। यहां स्थित फायर गैस सिलेंडर भी एक्सपायर हो चुका था।
इसके बाद हेडमास्टर के कार्यालय में अध्यापकों की हाजिरी चेक की गई। दसवीं कक्षा में कोई भी अध्यापक नहीं मिला। बच्चों से डीईओ शमशेर सिरोही ने बच्चों से आरटीकल और वोवल के बारे में पूछा तो कक्षा में खड़ी हुई पहली छात्रा ने इसका जवाब गलत दिया। बाद में दूसरी छात्रा ने वोवल के बारे में बताया।
इस स्कूल का दौरा खत्म करके आयोग की सदस्य टीम के साथ स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में पहुंची। जहां सबसे पहले बारहवीं कक्षा के छात्रों से मिले वहां पर भी कोई टीचर नहीं था। जिस पर आयोग की सदस्य ने बच्चों की अंग्रेजी की कॉपी को जांचा। इसके बाद एजूसेट रूम को जांचा गया तो वहां ताला लगा हुआ मिला। काफी देर बाद भी अध्यापकों ने इस रुम का ताला नहीं खोला।
आयोग की टीम ने सभी खामियों पर सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण में डीईओ शमशेर सिरोही, सुरेश गुलशन, डा मंजू नैैन, रीतू सिंगला, पूजा, राजबीर,सोनू शर्मा मौजूद रहे।
नहीं मिले टीचर, बच्चे बैठे खाली
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रमनदीप कौर पाडला में स्कूलों का दौरा करने पहुंची तो दोनों ही स्कूलों में अध्यापकों की कमी मिली। जिस कारण बच्चे खाली बैठकर समय व्यतीत किया।
एक ही स्थान पर दो स्कूल, बच्चे बैठे थे जमीन पर
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य रमनदीप कौर जब संगतपुरा के राजकीय स्कूल में पहुंची तो वहां एक स्कूल की बिल्डिंग में प्राइमरी व मिडिल दो स्कूल एक साथ चल रहे थे। यहां जानकारी मिली की स्कूल की बिल्डिंग एक ही है लेकिन इसके बावजूद भी यहां प्रार्थना और आधी छुट्टी अलग-अलग समय पर होती है। इसके साथ जब आयोग की सदस्य ने कक्षाओं का दौरा किया तो बड़ी कक्षा में भी छोटी कक्षा के विद्यार्थी एक साथ बैठे थे।