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Kaithal News: रेड जोन में 129 गांव, 800 से नीचे पहुंचा लिंगानुपात
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। लिंगानुपात के मामले में जिले के 278 में 129 गांव रेड जोन में आ चुके हैं। इस गांवों का लिंगानुपात 800 से नीचे पहुंच गया है। इसमें 10 गांवों की स्थिति सबसे अधिक खराब है। हालांकि 102 गांवों में एक हजार से अधिक लिंगानुपात है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कम लिंगानुपात वाले गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। जिले में पीएनडीटी के तहत 49 मामले दर्ज हो चुके हैं।
जिले के 100 गांव ऐसे हैं जिनमें एक हजार लड़कों पर बेटियों का आंकड़ा 750 से कम है। 29 गांवों में आंकड़ा 750 से 800 के बीच है और इन्हें रेड जोन में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों को रेड जोन में शामिल कर यहां बेटियां बचाने के लिए पूरा फोकस रखने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ डीएलएसए, पंचायतें भी इस अभियान में भागीदारी बढ़ाएंगी। वहीं, 800 से 900 लिंगानुपात वाले जिले में सात गांव हैं। इन्हें येलो जोन में रखा गया है। इसी प्रकार 900 से 950 तक लिंगानुपात वाले गांव की संख्या सात है। 950 से एक हजार वाले गांवों की संख्या 33 है। 900 से ऊपर लिंगानुपात वाले गांवों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रीन जोन में रखा जाता है।
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कम लिंगानुपात वाले गांवों पर विशेष फोकस : कम लिंगानुपात वाले गांव में आंकड़े सुधारने के लिए 15 से 28 जुलाई तक स्वास्थ्य विभाग विशेष जागरूकता शिविर लगा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ अन्य विभाग भी इसमें मिलकर काम कर रहे हैं जिनमे डीएलएसए, ग्राम पंचायतें, आंगनबाड़ी वर्कर, एनजीओ शामिल हैं। जिले में स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर, एमटीपी सेंटर व आईवीएफ सेंटरों की निगरानी रखी जा रही है और उनका समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जा रहा है।
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कैथल। लिंगानुपात के मामले में जिले के 278 में 129 गांव रेड जोन में आ चुके हैं। इस गांवों का लिंगानुपात 800 से नीचे पहुंच गया है। इसमें 10 गांवों की स्थिति सबसे अधिक खराब है। हालांकि 102 गांवों में एक हजार से अधिक लिंगानुपात है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कम लिंगानुपात वाले गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। जिले में पीएनडीटी के तहत 49 मामले दर्ज हो चुके हैं।
जिले के 100 गांव ऐसे हैं जिनमें एक हजार लड़कों पर बेटियों का आंकड़ा 750 से कम है। 29 गांवों में आंकड़ा 750 से 800 के बीच है और इन्हें रेड जोन में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन गांवों को रेड जोन में शामिल कर यहां बेटियां बचाने के लिए पूरा फोकस रखने का निर्णय लिया है।
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स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ डीएलएसए, पंचायतें भी इस अभियान में भागीदारी बढ़ाएंगी। वहीं, 800 से 900 लिंगानुपात वाले जिले में सात गांव हैं। इन्हें येलो जोन में रखा गया है। इसी प्रकार 900 से 950 तक लिंगानुपात वाले गांव की संख्या सात है। 950 से एक हजार वाले गांवों की संख्या 33 है। 900 से ऊपर लिंगानुपात वाले गांवों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रीन जोन में रखा जाता है।
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कम लिंगानुपात वाले गांवों पर विशेष फोकस : कम लिंगानुपात वाले गांव में आंकड़े सुधारने के लिए 15 से 28 जुलाई तक स्वास्थ्य विभाग विशेष जागरूकता शिविर लगा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ अन्य विभाग भी इसमें मिलकर काम कर रहे हैं जिनमे डीएलएसए, ग्राम पंचायतें, आंगनबाड़ी वर्कर, एनजीओ शामिल हैं। जिले में स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर, एमटीपी सेंटर व आईवीएफ सेंटरों की निगरानी रखी जा रही है और उनका समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जा रहा है।