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कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, 14 अप्रैल को मनाई जाएगी रामनवमी: शर्मा
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कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र, 14 अप्रैल को मनाई जाएगी रामनवमी : शर्मा
फोटो नंबर-28
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शनिवार से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं, जो 14 अप्रैल तक चलेंगे। पूरे साल में चार बार नवरात्र आते हैं। श्री हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र से ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्र का होता है, जो सितंबर से अक्टूबर के दौरान आते हैं।
हिंदू मान्यता के अनुसार चैत्र और शारदीय नवरात्र को ही महत्वपूर्ण माना गया है। चैत्र नवरात्र को वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। 6 अप्रैल से नौ दिनों तक पूरे विधि-विधान से दुर्गा मां के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। पंडित ने बताया कि 14 अप्रैल को राम नवमी मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्र साल में आने वाले सबसे पहले नवरात्र होते हैं। इस नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इसके साथ रामायण के अनुसार माना जाता है कि भगवान राम ने चैत्र के महीने में देवी दुर्गा की उपासना कर रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी।
चैत्र नवरात्रि का महत्व : पंडित शर्मा ने बताया कि चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि से ही हिंदू नववर्ष का प्रारंभ होता है। विक्रम संवत 2075 समाप्त होगा और विक्रम संवत 2076 प्रारंभ होगा। चैत्र नवरात्र से हिंदू नववर्ष से हिन्दू पंचांग की गणना की जाती है। हिन्दू पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्र से पहले आदि शक्ति देवी मां दुर्गा अवतरित हुई थीं। ब्रह्म पुराण में भी इसका जिक्र है कि देवी दुर्गा ने विष्णु जी की नाभि से उत्पन्न हुए ब्रह्माजी को सृष्टि निर्माण करने के लिए कहा। चैत्र मास में ही सृष्टि का निर्माण हुआ और चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। फिर भगवान श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था।
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कैथल। शनिवार से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं, जो 14 अप्रैल तक चलेंगे। पूरे साल में चार बार नवरात्र आते हैं। श्री हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र से ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्र का होता है, जो सितंबर से अक्टूबर के दौरान आते हैं।
हिंदू मान्यता के अनुसार चैत्र और शारदीय नवरात्र को ही महत्वपूर्ण माना गया है। चैत्र नवरात्र को वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है। 6 अप्रैल से नौ दिनों तक पूरे विधि-विधान से दुर्गा मां के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। पंडित ने बताया कि 14 अप्रैल को राम नवमी मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्र साल में आने वाले सबसे पहले नवरात्र होते हैं। इस नवरात्र से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इसके साथ रामायण के अनुसार माना जाता है कि भगवान राम ने चैत्र के महीने में देवी दुर्गा की उपासना कर रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी।
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चैत्र नवरात्रि का महत्व : पंडित शर्मा ने बताया कि चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि से ही हिंदू नववर्ष का प्रारंभ होता है। विक्रम संवत 2075 समाप्त होगा और विक्रम संवत 2076 प्रारंभ होगा। चैत्र नवरात्र से हिंदू नववर्ष से हिन्दू पंचांग की गणना की जाती है। हिन्दू पुराणों के अनुसार चैत्र नवरात्र से पहले आदि शक्ति देवी मां दुर्गा अवतरित हुई थीं। ब्रह्म पुराण में भी इसका जिक्र है कि देवी दुर्गा ने विष्णु जी की नाभि से उत्पन्न हुए ब्रह्माजी को सृष्टि निर्माण करने के लिए कहा। चैत्र मास में ही सृष्टि का निर्माण हुआ और चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। फिर भगवान श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्र में ही हुआ था।
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