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अंग्रेजों के जमाने में बनीं थी नगर पालिका पूंडरी, वर्तमान पार्षद के दादा बनें भी थे नगर पालिका के मनोनित सदस्य
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:25 AM IST
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अंग्रेजों के जमाने में बनी थी नगर पालिका पूंडरी, वर्तमान पार्षद के दादा बने थे नगर पालिका के मनोनीत सदस्य
आजादी से पहले मुस्लिम आबादी भी खूब थी क्षेत्र में, 6 में से एक पार्षद मुस्लिम थे, उस जमाने के सबसे अमीर व्यक्ति
अंग्रेजों ने संयुक्त पंजाब में करनाल जिले के छोटे शहर के तौर पर दी थी पूंडरी नगर पालिका को स्वीकृति
आज बदहाल है नगर पालिका, महज 2 किलोमीटर के क्षेत्र में सिमटा नगर पालिका का क्षेत्र, सीवरेज, गलियों सहित कई तरह की समस्याएं
फोटो संख्या-16 व 17
नसीब सैनी
कैथल। पूंडरी नगर पालिका में एक बार फिर से चुनाव होने जा रहा है। लेकिन यह बात कम ही लोग जानते होंगे कि पूंडरी नगर पालिका अंग्रेजों के जमाने की है। वर्ष 1929 में नगर पालिका की सीमाएं निर्धारित करते हुए तत्कालीन पंजाब सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसमें करनाल जिले का हिस्सा स्वीकृत करते हुए पूंडरी को छोटे शहर के तौर पर स्वीकृति दी थी। उस समय 6 पार्षद थे। एक क्लर्क व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति की गई थी। इन सभी का एक चित्र भी है। जो इन पार्षदों के परिवारों द्वारा सहेज कर रखा गया है।
पहली नगर पालिका के मनोनीत सदस्य बने चौधरी जमना राम के पौत्र 76 साल के पूर्ण चंद नंबरदार बताते हैं कि पूंडरी पहले केवल 4 दरवाजों के अंदर बसता था। जिसमें पूंडरी गेट, कैथली गेट, पाई गेट व हाबड़ी गेट शामिल हैं। इन्हीं गेटों के केंद्रीय भाग में शहर के बड़े लोग रहते थे। मेहनती व गरीब लोग शहर के बाहरी इलाके में बसते थे। उनके दादा उस समय बड़े जमींदार थेे। उन्हें भी पहली नगर पालिका में बतौर सदस्य मनोनीत किया गया था। इसके अलावा पांच अन्य सदस्य पार्षद थे। जिसमें लाला रामचंद्र बड़े सेठ थे। छोटे बासुदेव व बड़े बासुदेव भी बड़े सेठ थे। उस समय में इस क्षेत्र के सबसे अमीर व्यक्ति रशीद हुसैन थे। जो पहली नगर पालिका में चेयरमैन बनाए गए थे। उनके दादा के अलावा इस समय पूंडरी में रह रहे नगर पालिका के चेयरमैन भी बन चुके भूप सैनी के दादा चौधरी तूही सिंह भी पहली नगर पालिका में सदस्य थे। चौधरी तूही सिंह उस जमाने के बुद्धिजीवी व्यक्ति थे। भूप सिंह सैनी इस बार भी शायद चुनाव लड़ें। उस समय चुनाव नहीं होते थे। केवल सदस्य मनोनीत किए जाते थे। उनके पास जो फोटो है, उसमें 6 पार्षदों के अलावा एक क्लर्क लछमनसरुप सिंह व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नन्हीं राम भी दिखाई दे रहे हैं। बरसाने की ओर सड़क पर हुसैन की कोठी थी। जिसमें उस समय की अत्याधुनिक लाइटें भी लगी हुई थीं। उसी का लिया हुआ एक चित्र आज भी उनके पास महफूज है।
तूही राम के पौत्र एवं चेयरमैन रहे भूप सिंह सैनी ने बताया कि उनके पहली नगर पालिका में मनोनीत सदस्य बने थे। इसके बाद अध्यापक नियुक्त हो गए थे। इसके बाद उनके पिता ने चुनाव लड़ा। लेकिन जीत नहीं पाए। फिर उन्होंने खुद 1994 में चुनाव लड़ा और लगातार 3 चुनाव जीते। एक बार चुनाव हारे भी। वर्ष 2005 में चेयरमैन बनें।
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आज जात-पात की लड़ाई में मुद्दे छूट रहे हैं पीछे : पूर्ण सिंह बताते हैं कि आज का जमाना पूरी तरह से बदल गया है। आज जात-पात का जहर घोला जा रहा है। जिसमें सीवरेज, स्वास्थ्य, गलियों जैसे मुद्दे पीछे छूट गए हैं। चुनाव में संकीर्णता आ गई है। लोग अपने जमीर से समझौता करके चुनाव लड़ रहे हैं। जो सही नहीं है।
अंग्रेजों के जमाने की नगर पालिका का क्षेत्र 2 किलोमीटर में सिमटा : वर्ष 1929 में जो नगर पालिका अस्तित्व में आ गई थी, उसके आस-पास के शहरों व गांव राजौंद व कलायत में अभी हाल ही के वर्षों में नगर पालिकाएं बनीं हैं। 90 साल की हो चली पूंडरी नगर पालिका में विकास की बजाए क्षेत्र सिमट कर महज 8 किलोमीटर के एरिया में रह गया है। स्थिति यह है कि इस नगर पालिका में पिछले पांच साल में महज 8 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं।
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आजादी से पहले मुस्लिम आबादी भी खूब थी क्षेत्र में, 6 में से एक पार्षद मुस्लिम थे, उस जमाने के सबसे अमीर व्यक्ति
अंग्रेजों ने संयुक्त पंजाब में करनाल जिले के छोटे शहर के तौर पर दी थी पूंडरी नगर पालिका को स्वीकृति
आज बदहाल है नगर पालिका, महज 2 किलोमीटर के क्षेत्र में सिमटा नगर पालिका का क्षेत्र, सीवरेज, गलियों सहित कई तरह की समस्याएं
फोटो संख्या-16 व 17
नसीब सैनी
कैथल। पूंडरी नगर पालिका में एक बार फिर से चुनाव होने जा रहा है। लेकिन यह बात कम ही लोग जानते होंगे कि पूंडरी नगर पालिका अंग्रेजों के जमाने की है। वर्ष 1929 में नगर पालिका की सीमाएं निर्धारित करते हुए तत्कालीन पंजाब सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसमें करनाल जिले का हिस्सा स्वीकृत करते हुए पूंडरी को छोटे शहर के तौर पर स्वीकृति दी थी। उस समय 6 पार्षद थे। एक क्लर्क व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति की गई थी। इन सभी का एक चित्र भी है। जो इन पार्षदों के परिवारों द्वारा सहेज कर रखा गया है।
पहली नगर पालिका के मनोनीत सदस्य बने चौधरी जमना राम के पौत्र 76 साल के पूर्ण चंद नंबरदार बताते हैं कि पूंडरी पहले केवल 4 दरवाजों के अंदर बसता था। जिसमें पूंडरी गेट, कैथली गेट, पाई गेट व हाबड़ी गेट शामिल हैं। इन्हीं गेटों के केंद्रीय भाग में शहर के बड़े लोग रहते थे। मेहनती व गरीब लोग शहर के बाहरी इलाके में बसते थे। उनके दादा उस समय बड़े जमींदार थेे। उन्हें भी पहली नगर पालिका में बतौर सदस्य मनोनीत किया गया था। इसके अलावा पांच अन्य सदस्य पार्षद थे। जिसमें लाला रामचंद्र बड़े सेठ थे। छोटे बासुदेव व बड़े बासुदेव भी बड़े सेठ थे। उस समय में इस क्षेत्र के सबसे अमीर व्यक्ति रशीद हुसैन थे। जो पहली नगर पालिका में चेयरमैन बनाए गए थे। उनके दादा के अलावा इस समय पूंडरी में रह रहे नगर पालिका के चेयरमैन भी बन चुके भूप सैनी के दादा चौधरी तूही सिंह भी पहली नगर पालिका में सदस्य थे। चौधरी तूही सिंह उस जमाने के बुद्धिजीवी व्यक्ति थे। भूप सिंह सैनी इस बार भी शायद चुनाव लड़ें। उस समय चुनाव नहीं होते थे। केवल सदस्य मनोनीत किए जाते थे। उनके पास जो फोटो है, उसमें 6 पार्षदों के अलावा एक क्लर्क लछमनसरुप सिंह व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नन्हीं राम भी दिखाई दे रहे हैं। बरसाने की ओर सड़क पर हुसैन की कोठी थी। जिसमें उस समय की अत्याधुनिक लाइटें भी लगी हुई थीं। उसी का लिया हुआ एक चित्र आज भी उनके पास महफूज है।
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तूही राम के पौत्र एवं चेयरमैन रहे भूप सिंह सैनी ने बताया कि उनके पहली नगर पालिका में मनोनीत सदस्य बने थे। इसके बाद अध्यापक नियुक्त हो गए थे। इसके बाद उनके पिता ने चुनाव लड़ा। लेकिन जीत नहीं पाए। फिर उन्होंने खुद 1994 में चुनाव लड़ा और लगातार 3 चुनाव जीते। एक बार चुनाव हारे भी। वर्ष 2005 में चेयरमैन बनें।
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आज जात-पात की लड़ाई में मुद्दे छूट रहे हैं पीछे : पूर्ण सिंह बताते हैं कि आज का जमाना पूरी तरह से बदल गया है। आज जात-पात का जहर घोला जा रहा है। जिसमें सीवरेज, स्वास्थ्य, गलियों जैसे मुद्दे पीछे छूट गए हैं। चुनाव में संकीर्णता आ गई है। लोग अपने जमीर से समझौता करके चुनाव लड़ रहे हैं। जो सही नहीं है।
अंग्रेजों के जमाने की नगर पालिका का क्षेत्र 2 किलोमीटर में सिमटा : वर्ष 1929 में जो नगर पालिका अस्तित्व में आ गई थी, उसके आस-पास के शहरों व गांव राजौंद व कलायत में अभी हाल ही के वर्षों में नगर पालिकाएं बनीं हैं। 90 साल की हो चली पूंडरी नगर पालिका में विकास की बजाए क्षेत्र सिमट कर महज 8 किलोमीटर के एरिया में रह गया है। स्थिति यह है कि इस नगर पालिका में पिछले पांच साल में महज 8 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं।