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बाजरे की सरकारी खरीद सूची में नाम न आने से किसानों में मायूसी
Updated Fri, 05 Oct 2018 12:30 AM IST
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बाजरे की सरकारी खरीद सूची में नाम न आने से किसानों में मायूसी
फोटो नंबर-29
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। मेरी फसल मेरा ब्यौरा स्कीम के तहत पोर्टल पर सारी सूचनाएं देने के बावजूद भी किसानों का बाजरे की सरकारी खरीद सूची में नाम न आने से किसानों में मायूसी छाई है। किसान अश्विनी, राजकुमार, सुरेश, भलेराम, सुरेद्र राणा, गोदू ने बताया कि उन लोगों ने अपने खेतों में बाजरे की फसल बो रखी है। निर्धारित तिथि से पूर्व ही उन लोगों ने सरकारी पोर्टल पर मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सभी सूचनाएं अपलोड़ करवा दी थी। अब जब बाजरा की सरकारी खरीद के लिए किसानों की जो सूचि जारी हुई है उसमें उन लोगों का नाम ही नही है। किसानों का कहना था कि यह उन लोगों के साथ धोखा है। उनका कहना था कि सरकारी खरीद पर बाजरा के दाम 1950 रुपए प्रति क्विंटल मिलने हैं पर उनका नाम खरीद सूची में न होने के कारण उन लोगों को प्राइवेट खरीद में इसे बेचना पड़ेगा। प्राइवेट खरीद में बाजरा इस समय 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। किसानों का कहना था कि सरकार की फसल विविधिकरण नीति के तहत उन लोगों ने इस बार बाजरा की फसल बोने का निर्णय लिया था। अशोक कुमार ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा स्कीम के तहत वे लोग प्राइवेट दुकानदारों के पास सूचनाएं अपलोड़ करवाने के लिए घूमते रहे पर पोर्टल बिजी ही मिला। कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनके खेतों में सर्वे करके खुद फार्म भरे। आढ़ती के माध्यम से मार्केटिंग बोर्ड में भी उन लोगों ने फार्म भर कर दिए। जब सीएचसी में उनका ब्यौरा अपलोड़ नही हो पाया तो वे लोग 15 सितंबर को कलायत स्थित कृषि विभाग के कार्यालय में अपने फार्म देकर आ गए। अब जब माकेटिंग बोर्ड के पास आई किसानों की लिस्ट उन लोगों ने देखी तो उसमें उनका नाम ही नही मिला। किसानों का कहना था कि लुंज सरकारी नीतियों के कारण से उन लोगों को भारी नुकसान हो गया। उनका इस मामले में कोई कसूर नही है उनकी फसल की सरकारी खरीद होनी चाहिए।
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फोटो नंबर-29
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। मेरी फसल मेरा ब्यौरा स्कीम के तहत पोर्टल पर सारी सूचनाएं देने के बावजूद भी किसानों का बाजरे की सरकारी खरीद सूची में नाम न आने से किसानों में मायूसी छाई है। किसान अश्विनी, राजकुमार, सुरेश, भलेराम, सुरेद्र राणा, गोदू ने बताया कि उन लोगों ने अपने खेतों में बाजरे की फसल बो रखी है। निर्धारित तिथि से पूर्व ही उन लोगों ने सरकारी पोर्टल पर मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सभी सूचनाएं अपलोड़ करवा दी थी। अब जब बाजरा की सरकारी खरीद के लिए किसानों की जो सूचि जारी हुई है उसमें उन लोगों का नाम ही नही है। किसानों का कहना था कि यह उन लोगों के साथ धोखा है। उनका कहना था कि सरकारी खरीद पर बाजरा के दाम 1950 रुपए प्रति क्विंटल मिलने हैं पर उनका नाम खरीद सूची में न होने के कारण उन लोगों को प्राइवेट खरीद में इसे बेचना पड़ेगा। प्राइवेट खरीद में बाजरा इस समय 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। किसानों का कहना था कि सरकार की फसल विविधिकरण नीति के तहत उन लोगों ने इस बार बाजरा की फसल बोने का निर्णय लिया था। अशोक कुमार ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा स्कीम के तहत वे लोग प्राइवेट दुकानदारों के पास सूचनाएं अपलोड़ करवाने के लिए घूमते रहे पर पोर्टल बिजी ही मिला। कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनके खेतों में सर्वे करके खुद फार्म भरे। आढ़ती के माध्यम से मार्केटिंग बोर्ड में भी उन लोगों ने फार्म भर कर दिए। जब सीएचसी में उनका ब्यौरा अपलोड़ नही हो पाया तो वे लोग 15 सितंबर को कलायत स्थित कृषि विभाग के कार्यालय में अपने फार्म देकर आ गए। अब जब माकेटिंग बोर्ड के पास आई किसानों की लिस्ट उन लोगों ने देखी तो उसमें उनका नाम ही नही मिला। किसानों का कहना था कि लुंज सरकारी नीतियों के कारण से उन लोगों को भारी नुकसान हो गया। उनका इस मामले में कोई कसूर नही है उनकी फसल की सरकारी खरीद होनी चाहिए।