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एक जुलाई से लागू होगा जीएसटी, अभी तक नहीं हो पाया व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन
Updated Tue, 27 Jun 2017 11:55 PM IST
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एक जुलाई से लागू होगा जीएसटी, अभी तक नहीं हो पाया व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। एक जुलाई से जीएसटी लागू हो जाएगा। लेकिन अभी तक व्यापारी अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं करवा रहे हैं। अभी तक रजिस्ट्रेशन करवाने का अंतिम समय है। जीएसटी का विरोध कर रहे कपड़ा व्यापारियों में से काफी कम संख्या में रजिस्ट्रेशन करवाया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अधिकारी शेष बचे तीन दिनों में अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर अनावश्यक परेशानियों से बचें। दूसरी ओर उचित जानकारी के अभाव में व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सेल्स एंड टैक्स विभाग के अनुसार जिला में कुल सात हजार टेक्स पेई व्यापारी हैं। जिसमें अब तक पांच हजार व्यापारियों ने अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाया है। 30 जून तक व्यापारियों को अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। यह उनके लिए आखिरी मौका है। अभी जिला में दो हजार व्यापारी जीएसटी के रेजिस्ट्रेशन करवाने के लिए शेष रह गए है।
कपड़ा व्यापारी है विरोध में नहीं करवा रहे रजिस्ट्रेशन
जीएसटी पर एक ओर तो विभाग द्वारा धड़ल्ले से रजिस्ट्रेशन करवाए जा रहे हैं। वहीं कपड़ा व्यापारी इसके विरोध में है। ऐसे में कपड़े के अधिकतर व्यापारी जीएसटी पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाने से पीछे हट रहे हैं। कपड़ा मार्केट एसोसिएशन के जिला प्रधान रमेश डामला ने बताया कि कपड़ा व्यापारियों में जीएसटी को लेकर काफी विरोध है। जिसके रोष स्वरूप वह अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं करवा है।
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व्यापारियों में असमंजस की स्थिति
जीएसटी को लागू होने में भले ही काफी कम समय बचा हो, लेकिन व्यापारियों में अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। करियाणा की दुकान संचालक राजेश कुमार ने कहा कि उसे अभी समझ नहीं आ रहा है कि जीएसटी में उसे किस तरह से टेक्स देना होगा। इस बारे में कोई जानकारी मिले तो ही वे आगे कुछ काम कर पाएंगे। टैक्स लागू होने के बाद ही पता चल सकेगा कि आखिर इसके तहत कैसे काम करना है।
समय-समय पर दी जा रही ट्रेनिंग
टैक्स एंड सेल्स विभाग के डीईटीसी एएस कटारिया ने बताया कि जीएसटी पर सरकार के निर्देशानुसार समय समय पर व्यापारियों को ट्रेनिंग दी जा रही हे। जिससे उनके भीतर कोई भी असमंजस की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने बताया कि वह पिछले लंबे समय से व्यापारियों के लिए सेमिनारों का आयोजन कर रहे है। विभाग में जीएसटी के रजिस्ट्रेशन के लिए 30 जून आखिरी मौका है। इसके बाद व्यापारी फर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सकेगा। 30 जून के बाद सरकार की ओर से जैसी गाइडलाइन आएगी उस पर कार्य किया जाएगा।
मोदी जी ये तो बता दो करना क्या है..
जीएसटी को लेकर लोगों में लाख तरह की दुविधाएं, आशंकाएं, समाधान कोई नहीं
जमीन पर तनाव का कारण बना जीएसटी सोशल मीडिया पर बांट रहा है मुस्कुराहटें
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। जुम्मा-जुम्मा चार दिन रह गए जीएसटी लगने में, पर दुकानदारों को आज तक पता ही नहीं है कि इस नए कानून के तहत व्यापार करना कैसे है। बिल कैसे कटेंगे, किस चीज पर कितना टैक्स लगेगा, पुराने स्टाक का क्या होगा। इस तरह के बहुत सारे सवाल हैं जिनके बारे में दुकानदारों की सारी जानकारी सुनी सुनाई बातों पर आधारित है। व्हाट्स एप पर बंट रहे ज्ञान ने व्यापारियों को और दुविधा में डाल रखा है। जीएसटी पर बने हंसाने वाले संदेशों से ज्यादा डराने वाले मैसेज इधर-उधर हो रहे हैं। लिहाजा लोगों को सरकार से यह उम्मीद थी कि वह 1 जुलाई से पहले पहले कोई न कोई बुकलेट जरूर बंटवाएगी, जिसमें जीएसटी से संबंधित तमाम जानकारियां मिल जाएंगी। या फिर मोदी जी मन की बात में जीएसटी की परतें खोल देंगे, मगर न कोई बुकलेट आई और न ही मोदी जी बोले। सरकार ने जीएसटी को लेकर व्यापक स्तर पर चलाए जाने वाले जिस जागरूकता अभियान की बात की थी, वह जिले के बड़े बड़े चार्टर्ड अकाउंटेंटों के सेमिनारों तक ही सीमित रहा। सरकार के जीएसटी प्रशिक्षित प्रचारक आम व्यापारियों तक पहुंचे ही नहीं और चार्टर्ड अकाउंटेंटों तक पहुंचना महंगा होने के कारण सभी सीमांत व्यापारियों के लिए संभव नहीं हुआ। इसलिए तमाम तरह की आशंकाओं और दुविधाओं से घिरे व्यापारी धड़कते दिल से पहली तारीख के इंतजार में हैं कि जो होगा देखा जाएगा।
बाजार में भारी मंदी की मार
आज जब जीएसटी के पूर्व प्रभावों का जायजा लेने के लिए चीका के बाजार का चक्कर लगाया तो हालत रविवार जैसे थे। दुकानदार बैठे थे पर सामान नहीं बिक रहा था। एक दुकानदार से पूछा तो जवाब मिला कि बाजार में मंदी तो पहले ही से थी पर कुछ दिनों से जीएसटी का बड़ा शोर है। अफवाहें फैली हैं कि फलां चीज सस्ती हो जाएगी..फलां चीज महंगी हो जाएगी, अनेक तरह की आशंकाओं के कारण दुकानदार ना तो नया माल मंगवा रहे हैं और ना ही लोग खरीदने आ रहे हैं। बाजार में घूम रहे कैथल के एक दाल सप्लायर ने बताया कि जिस भी दुकान पर जाओ एक ही जवाब मिलता है कि जीएसटी लगने के बाद देखेंगे कि क्या मंगवाना है क्या नहीं।
टैक्स दरों को लेकर भारी संशय
बाजार में लोग इतने डरे हुए दिखे कि जैसे जीएसटी नहीं कोई बला आ रही हो। लोगों ने अपनी बात तो कही पर इस निवेदन के साथ कि हमारा नाम मत छापना। दुकानदारों ने कहा कि अखबारी विज्ञापनों में सरकार द्वारा चंद चीजों पर लगने वाले जीएसटी की जानकारी देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री की जा रही है मगर बाजार में इतनी तरह की वस्तुएं हैं किस पर कितना जीएसटी लगेगा कुछ पता नहीं। कोई कुछ कहता है कोई कुछ। किसकी मानें।
सोशल मीडिया में खूब चर्चे
जमीनी स्तर पर बेशक जीएसटी लोगों के तनाव का कारण बना हुआ पर सोशल मीडिया पर जीएसटी के कारण बहुत मुस्कुराहटें फैल रही हैं। एक साहब की पोस्ट देखिए
जीएसटी समझने का आसान तरीका
टीचर- अगर एक आम के पेड़ पर 10 केले लगे हैं और उनमें से 7 अमरूद तोड़ लिए तो कितने अंगूर बचे
विद्यार्थी- सर 9 हाथी बचे।
टीचर- वह तुम्हें कैसे पता
विद्यार्थी- सर क्योंकि आज में लंच में गोभी की सब्जी लाया हूं।
शिक्षा : रोज ब्रश करना चाहिए, वरना पेट्रोल महंगा हो जाएगा।
एक दूसरा स्टेटस देखिए-
एक कबूतर को तराजू में वजन करके पालो और 1 किलो मक्का लाकर उसे 10 दिन में पूरा खिला दो लेकिन उसकी बीट रोजाना इक्ट्ठी करो और 10 दिन बाद उसको तोलो।
अब आप ये देखो कि एक किलो मक्का थी और अब बीट कितनी आई।
आप पाओगे कि सिर्फ 200 ग्राम बीट ही आई और कबूतर में वजन भी मात्र 100 ग्राम ही बढ़ा।
क्या आपको समझ आया कि 700 ग्राम मक्का कहां गया।
तो फिर आपको जीएसटी क्या खाक समझ आएगा।
फेसबुक पर खूब लाइक्स बटोर रहा ये वाला स्टेटस अपडेट वाकई जबरदस्त है। देखिए-
जिस देश में लोगों को शौच कहां करनी है, यह भी टीवी पर अमिताभ बच्चन को एडवरटाइजमेंट के जरिये समझाना पड़ता है।
उस देश के लोगों को जीएसटी किसी का बाप भी नहीं समझा सकता।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। एक जुलाई से जीएसटी लागू हो जाएगा। लेकिन अभी तक व्यापारी अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं करवा रहे हैं। अभी तक रजिस्ट्रेशन करवाने का अंतिम समय है। जीएसटी का विरोध कर रहे कपड़ा व्यापारियों में से काफी कम संख्या में रजिस्ट्रेशन करवाया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अधिकारी शेष बचे तीन दिनों में अपना रजिस्ट्रेशन करवा कर अनावश्यक परेशानियों से बचें। दूसरी ओर उचित जानकारी के अभाव में व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सेल्स एंड टैक्स विभाग के अनुसार जिला में कुल सात हजार टेक्स पेई व्यापारी हैं। जिसमें अब तक पांच हजार व्यापारियों ने अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाया है। 30 जून तक व्यापारियों को अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। यह उनके लिए आखिरी मौका है। अभी जिला में दो हजार व्यापारी जीएसटी के रेजिस्ट्रेशन करवाने के लिए शेष रह गए है।
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कपड़ा व्यापारी है विरोध में नहीं करवा रहे रजिस्ट्रेशन
जीएसटी पर एक ओर तो विभाग द्वारा धड़ल्ले से रजिस्ट्रेशन करवाए जा रहे हैं। वहीं कपड़ा व्यापारी इसके विरोध में है। ऐसे में कपड़े के अधिकतर व्यापारी जीएसटी पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाने से पीछे हट रहे हैं। कपड़ा मार्केट एसोसिएशन के जिला प्रधान रमेश डामला ने बताया कि कपड़ा व्यापारियों में जीएसटी को लेकर काफी विरोध है। जिसके रोष स्वरूप वह अपनी फर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं करवा है।
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व्यापारियों में असमंजस की स्थिति
जीएसटी को लागू होने में भले ही काफी कम समय बचा हो, लेकिन व्यापारियों में अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। करियाणा की दुकान संचालक राजेश कुमार ने कहा कि उसे अभी समझ नहीं आ रहा है कि जीएसटी में उसे किस तरह से टेक्स देना होगा। इस बारे में कोई जानकारी मिले तो ही वे आगे कुछ काम कर पाएंगे। टैक्स लागू होने के बाद ही पता चल सकेगा कि आखिर इसके तहत कैसे काम करना है।
समय-समय पर दी जा रही ट्रेनिंग
टैक्स एंड सेल्स विभाग के डीईटीसी एएस कटारिया ने बताया कि जीएसटी पर सरकार के निर्देशानुसार समय समय पर व्यापारियों को ट्रेनिंग दी जा रही हे। जिससे उनके भीतर कोई भी असमंजस की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने बताया कि वह पिछले लंबे समय से व्यापारियों के लिए सेमिनारों का आयोजन कर रहे है। विभाग में जीएसटी के रजिस्ट्रेशन के लिए 30 जून आखिरी मौका है। इसके बाद व्यापारी फर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सकेगा। 30 जून के बाद सरकार की ओर से जैसी गाइडलाइन आएगी उस पर कार्य किया जाएगा।
मोदी जी ये तो बता दो करना क्या है..
जीएसटी को लेकर लोगों में लाख तरह की दुविधाएं, आशंकाएं, समाधान कोई नहीं
जमीन पर तनाव का कारण बना जीएसटी सोशल मीडिया पर बांट रहा है मुस्कुराहटें
अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। जुम्मा-जुम्मा चार दिन रह गए जीएसटी लगने में, पर दुकानदारों को आज तक पता ही नहीं है कि इस नए कानून के तहत व्यापार करना कैसे है। बिल कैसे कटेंगे, किस चीज पर कितना टैक्स लगेगा, पुराने स्टाक का क्या होगा। इस तरह के बहुत सारे सवाल हैं जिनके बारे में दुकानदारों की सारी जानकारी सुनी सुनाई बातों पर आधारित है। व्हाट्स एप पर बंट रहे ज्ञान ने व्यापारियों को और दुविधा में डाल रखा है। जीएसटी पर बने हंसाने वाले संदेशों से ज्यादा डराने वाले मैसेज इधर-उधर हो रहे हैं। लिहाजा लोगों को सरकार से यह उम्मीद थी कि वह 1 जुलाई से पहले पहले कोई न कोई बुकलेट जरूर बंटवाएगी, जिसमें जीएसटी से संबंधित तमाम जानकारियां मिल जाएंगी। या फिर मोदी जी मन की बात में जीएसटी की परतें खोल देंगे, मगर न कोई बुकलेट आई और न ही मोदी जी बोले। सरकार ने जीएसटी को लेकर व्यापक स्तर पर चलाए जाने वाले जिस जागरूकता अभियान की बात की थी, वह जिले के बड़े बड़े चार्टर्ड अकाउंटेंटों के सेमिनारों तक ही सीमित रहा। सरकार के जीएसटी प्रशिक्षित प्रचारक आम व्यापारियों तक पहुंचे ही नहीं और चार्टर्ड अकाउंटेंटों तक पहुंचना महंगा होने के कारण सभी सीमांत व्यापारियों के लिए संभव नहीं हुआ। इसलिए तमाम तरह की आशंकाओं और दुविधाओं से घिरे व्यापारी धड़कते दिल से पहली तारीख के इंतजार में हैं कि जो होगा देखा जाएगा।
बाजार में भारी मंदी की मार
आज जब जीएसटी के पूर्व प्रभावों का जायजा लेने के लिए चीका के बाजार का चक्कर लगाया तो हालत रविवार जैसे थे। दुकानदार बैठे थे पर सामान नहीं बिक रहा था। एक दुकानदार से पूछा तो जवाब मिला कि बाजार में मंदी तो पहले ही से थी पर कुछ दिनों से जीएसटी का बड़ा शोर है। अफवाहें फैली हैं कि फलां चीज सस्ती हो जाएगी..फलां चीज महंगी हो जाएगी, अनेक तरह की आशंकाओं के कारण दुकानदार ना तो नया माल मंगवा रहे हैं और ना ही लोग खरीदने आ रहे हैं। बाजार में घूम रहे कैथल के एक दाल सप्लायर ने बताया कि जिस भी दुकान पर जाओ एक ही जवाब मिलता है कि जीएसटी लगने के बाद देखेंगे कि क्या मंगवाना है क्या नहीं।
टैक्स दरों को लेकर भारी संशय
बाजार में लोग इतने डरे हुए दिखे कि जैसे जीएसटी नहीं कोई बला आ रही हो। लोगों ने अपनी बात तो कही पर इस निवेदन के साथ कि हमारा नाम मत छापना। दुकानदारों ने कहा कि अखबारी विज्ञापनों में सरकार द्वारा चंद चीजों पर लगने वाले जीएसटी की जानकारी देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री की जा रही है मगर बाजार में इतनी तरह की वस्तुएं हैं किस पर कितना जीएसटी लगेगा कुछ पता नहीं। कोई कुछ कहता है कोई कुछ। किसकी मानें।
सोशल मीडिया में खूब चर्चे
जमीनी स्तर पर बेशक जीएसटी लोगों के तनाव का कारण बना हुआ पर सोशल मीडिया पर जीएसटी के कारण बहुत मुस्कुराहटें फैल रही हैं। एक साहब की पोस्ट देखिए
जीएसटी समझने का आसान तरीका
टीचर- अगर एक आम के पेड़ पर 10 केले लगे हैं और उनमें से 7 अमरूद तोड़ लिए तो कितने अंगूर बचे
विद्यार्थी- सर 9 हाथी बचे।
टीचर- वह तुम्हें कैसे पता
विद्यार्थी- सर क्योंकि आज में लंच में गोभी की सब्जी लाया हूं।
शिक्षा : रोज ब्रश करना चाहिए, वरना पेट्रोल महंगा हो जाएगा।
एक दूसरा स्टेटस देखिए-
एक कबूतर को तराजू में वजन करके पालो और 1 किलो मक्का लाकर उसे 10 दिन में पूरा खिला दो लेकिन उसकी बीट रोजाना इक्ट्ठी करो और 10 दिन बाद उसको तोलो।
अब आप ये देखो कि एक किलो मक्का थी और अब बीट कितनी आई।
आप पाओगे कि सिर्फ 200 ग्राम बीट ही आई और कबूतर में वजन भी मात्र 100 ग्राम ही बढ़ा।
क्या आपको समझ आया कि 700 ग्राम मक्का कहां गया।
तो फिर आपको जीएसटी क्या खाक समझ आएगा।
फेसबुक पर खूब लाइक्स बटोर रहा ये वाला स्टेटस अपडेट वाकई जबरदस्त है। देखिए-
जिस देश में लोगों को शौच कहां करनी है, यह भी टीवी पर अमिताभ बच्चन को एडवरटाइजमेंट के जरिये समझाना पड़ता है।
उस देश के लोगों को जीएसटी किसी का बाप भी नहीं समझा सकता।