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Kaithal News: खट्टी मीठी यादें समेटे है 106 वर्ष पुराना इमली का पेड़
Mon, 05 Jun 2023 02:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 05 Jun 2023 02:49 AM IST
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कैथल। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में स्थित 106 वर्ष पुराना इमली का पेड़ खट्टी-मीठी यादें समेटे हुए है। यहां पर शिक्षा प्राप्त कर चुके लाखों बच्चों की किलकारियां, कहकहों, कारस्तानियों का भी साक्षी रहा है।
प्राचार्य रविंद्र शर्मा ने बताया कि अंग्रेजों के शासन काल में बने इस विद्यालय की स्थापना 1908 में हुई थी। उस काल की वास्तुकला और निर्माण की भवन में कुछ यादें आज इस विद्यालय में शेष है, जिनमें इमली का पेड़ सबसे पुराना है। इसी इमली के पेड़ के नीचे बैठकर लाखों बच्चों ने अपने भविष्य की कल्पनाओं को साकार रूप देने की प्रेरणा भी प्राप्त की। इसी विद्यालय के भवन के साथ सटी हुई कई फुट ऊंची हिंद सिनेमा की दीवार भी होती थी, जिसे लांघकर विद्यार्थी अक्सर सिनेमा में लगी फिल्म देखने जाया करते थे।
1982 मैट्रिक बैच के ही डॉ. प्रद्युन भल्ला, जो आज इसी विद्यालय में प्राध्यापक हैं। उन्होंने बताया कि इन कमरों में बैठकर किस प्रकार अपने सहपाठियों के साथ मौज मस्ती, शरारतें, हंसी-खुशी व मिलजुल कर रहते थे। विद्यालय में पढ़े हुए लाखों छात्रों में से हजारों छात्र बहुत ऊंचे पदों पर हरियाणा सरकार एवं भारत सरकार के कई विभागों की शोभा बढ़ा रहे हैं।
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डॉ. भल्ला बताते हैं कि उस समय में प्राचार्य एवं अध्यापकों का डर बहुत अधिक होता था और वर्ष में एक दिन विद्यालय का निरीक्षण होता था। इस पेड़ को उस समय के मुख्याध्यापक लाला शिवनारायण के प्रयासों से अंतू राम नामक व्यक्ति ने लगाया था। जो अब इस दुनिया में नहीं है। मगर जिस तरह से वह इस पेड़ की रखवाली करता था व अर्ध अवकाश के समय इस पेड़ से तोड़े गए इमली के खंजर को छात्रों को बांटा करता था। उसका चेहरा किसी भी विद्यार्थी के जहन से ओझल नहीं हुआ है। आज के समय में इस इमली के पेड़ की देखरेख माली गंगाराम कर रहे हैं।
कुछ दिन पूर्व 1982 बैच के कुछ विद्यार्थी लगभग 41 साल बाद इसी इमली के पेड़ के आसपास एकत्रित हुए और उन्होंने अपनी यादों को ताजा किया। वन विभाग के अधिकारी रणबीर सिंह ने बताया कि सरकार ने 75 वर्ष पुराने पेड़ों के संरक्षण के लिए पेंशन देने का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। इसलिए जिले में पुराने पेड़ की देखरेख के लिए कोई पेंशन नहीं दी जा रही। यदि सरकारी की ओर से कोई नोटिफिकेशन आएगा तो इसे लागू किया जाएगा।
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प्राचार्य रविंद्र शर्मा ने बताया कि अंग्रेजों के शासन काल में बने इस विद्यालय की स्थापना 1908 में हुई थी। उस काल की वास्तुकला और निर्माण की भवन में कुछ यादें आज इस विद्यालय में शेष है, जिनमें इमली का पेड़ सबसे पुराना है। इसी इमली के पेड़ के नीचे बैठकर लाखों बच्चों ने अपने भविष्य की कल्पनाओं को साकार रूप देने की प्रेरणा भी प्राप्त की। इसी विद्यालय के भवन के साथ सटी हुई कई फुट ऊंची हिंद सिनेमा की दीवार भी होती थी, जिसे लांघकर विद्यार्थी अक्सर सिनेमा में लगी फिल्म देखने जाया करते थे।
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1982 मैट्रिक बैच के ही डॉ. प्रद्युन भल्ला, जो आज इसी विद्यालय में प्राध्यापक हैं। उन्होंने बताया कि इन कमरों में बैठकर किस प्रकार अपने सहपाठियों के साथ मौज मस्ती, शरारतें, हंसी-खुशी व मिलजुल कर रहते थे। विद्यालय में पढ़े हुए लाखों छात्रों में से हजारों छात्र बहुत ऊंचे पदों पर हरियाणा सरकार एवं भारत सरकार के कई विभागों की शोभा बढ़ा रहे हैं।
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डॉ. भल्ला बताते हैं कि उस समय में प्राचार्य एवं अध्यापकों का डर बहुत अधिक होता था और वर्ष में एक दिन विद्यालय का निरीक्षण होता था। इस पेड़ को उस समय के मुख्याध्यापक लाला शिवनारायण के प्रयासों से अंतू राम नामक व्यक्ति ने लगाया था। जो अब इस दुनिया में नहीं है। मगर जिस तरह से वह इस पेड़ की रखवाली करता था व अर्ध अवकाश के समय इस पेड़ से तोड़े गए इमली के खंजर को छात्रों को बांटा करता था। उसका चेहरा किसी भी विद्यार्थी के जहन से ओझल नहीं हुआ है। आज के समय में इस इमली के पेड़ की देखरेख माली गंगाराम कर रहे हैं।
कुछ दिन पूर्व 1982 बैच के कुछ विद्यार्थी लगभग 41 साल बाद इसी इमली के पेड़ के आसपास एकत्रित हुए और उन्होंने अपनी यादों को ताजा किया। वन विभाग के अधिकारी रणबीर सिंह ने बताया कि सरकार ने 75 वर्ष पुराने पेड़ों के संरक्षण के लिए पेंशन देने का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। इसलिए जिले में पुराने पेड़ की देखरेख के लिए कोई पेंशन नहीं दी जा रही। यदि सरकारी की ओर से कोई नोटिफिकेशन आएगा तो इसे लागू किया जाएगा।