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युवा नौकर नहीं, मालिक बनें : धनखड़
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:41 AM IST
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दीक्षांत समारोह में पहुंची छात्राएं।
- फोटो : jind
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प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने बुधवार को हिंदू कन्या कॉलेज के दीक्षांत समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नौकर नहीं मालिक बनें। इसके लिए ही काम करें। कृषि मंत्री ने कहा कि वे सिर्फ डिग्री प्राप्त करना ही अपने जीवन का ध्येय नहीं बनाएं बल्कि नौकर बनने की बजाय मालिक बनने के लिए अपनी ऊर्जा का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में दूसरे के लिए आदर का भाव है।
हिंदू धर्म में दूसरे की महानता को सहज ही स्वीकार किया जाता है। उन्होंने छात्राओं से पूछा कि आपके विचारों को कौन चलाता है। उन्होंने कहा कि हमारा मस्तिष्क ही इनको कमांड देता है। यदि विचारों को ठीक नहीं चलाया तो हम नियंत्रण खो देंगे। उन्होंने नेल्सन मंडेला का उदाहरण देते हुए कहा कि वे 27 साल जेल में रहे, मगर जब जेल से बाहर आए तो उन्हें उनसे कोई नाराजगी नहीं थी, जिनके कारण वे जेल में गए थे। इसी प्रकार पुरानी फाइलों को, दूसरों के प्रति नाराजगी को हमें मस्तिष्क से डिलीट करना चाहिए। इससे सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
गीता में मिलता है कर्म का उल्लेख
कृषि मंत्री ने कहा कि गीता में भी कर्म, विकर्म और अकर्म का उल्लेख मिलता है जो हमें जीवन में बड़ा लक्ष्य तय कर कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा पद्धति को कमजोर करने का काम किया। विद्यार्थी मालिक बनने के संस्कारों की शिक्षा को छोड़कर नौकर बनने की शिक्षा ग्रहण करने लगे। उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि देश के निर्माता बनो, मालिक बनो, नौकरी देने वाले बनो।
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जाट आरक्षण के सवाल पर सकपकाए धनखड़
कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान कृषि मंत्री से सवाल पूछा गया कि सरकार पहले कहती थी कि धरना देने वाले चंदा खाऊ हैं, लेकिन ऐसे लोगों से बातचीत क्यों की गई। इस पर धनखड़ सकपका गए और गाड़ी की ओर बड़े। यहां रुक कर उन्होंने सवाल पूछने वाले पत्रकार को कुछ नसीहत दी। एक कैमरामैन ने इसे रिकार्ड कर लिया। इस पर धनखड़ ने उसे नसीहत दी कि जो बातें उन्होंने मीडिया को नहीं कही, उन्हें प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।
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हिंदू धर्म में दूसरे की महानता को सहज ही स्वीकार किया जाता है। उन्होंने छात्राओं से पूछा कि आपके विचारों को कौन चलाता है। उन्होंने कहा कि हमारा मस्तिष्क ही इनको कमांड देता है। यदि विचारों को ठीक नहीं चलाया तो हम नियंत्रण खो देंगे। उन्होंने नेल्सन मंडेला का उदाहरण देते हुए कहा कि वे 27 साल जेल में रहे, मगर जब जेल से बाहर आए तो उन्हें उनसे कोई नाराजगी नहीं थी, जिनके कारण वे जेल में गए थे। इसी प्रकार पुरानी फाइलों को, दूसरों के प्रति नाराजगी को हमें मस्तिष्क से डिलीट करना चाहिए। इससे सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
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गीता में मिलता है कर्म का उल्लेख
कृषि मंत्री ने कहा कि गीता में भी कर्म, विकर्म और अकर्म का उल्लेख मिलता है जो हमें जीवन में बड़ा लक्ष्य तय कर कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी शिक्षा पद्धति को कमजोर करने का काम किया। विद्यार्थी मालिक बनने के संस्कारों की शिक्षा को छोड़कर नौकर बनने की शिक्षा ग्रहण करने लगे। उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि देश के निर्माता बनो, मालिक बनो, नौकरी देने वाले बनो।
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जाट आरक्षण के सवाल पर सकपकाए धनखड़
कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान कृषि मंत्री से सवाल पूछा गया कि सरकार पहले कहती थी कि धरना देने वाले चंदा खाऊ हैं, लेकिन ऐसे लोगों से बातचीत क्यों की गई। इस पर धनखड़ सकपका गए और गाड़ी की ओर बड़े। यहां रुक कर उन्होंने सवाल पूछने वाले पत्रकार को कुछ नसीहत दी। एक कैमरामैन ने इसे रिकार्ड कर लिया। इस पर धनखड़ ने उसे नसीहत दी कि जो बातें उन्होंने मीडिया को नहीं कही, उन्हें प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए।